देशभर में मनाया जा रहा द्वितीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस ,’चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत इकलौता देश’………….

आज देशभर में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जा रहा है। कई संस्थानों में विशेष प्रोग्रामों का आयोजन किया जा रहा है। यह दूसरी बार है जब देश यह दिवस मना रहा है, इससे पहले 2024 में पहली बार राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया गया था। यह दिन इसरो की सफलता का स्मरण कराता है और वैज्ञानिक […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 23 अगस्त 2025, 06:16 AM 8 मिनट read
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देशभर में मनाया जा रहा द्वितीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस ,’चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत इकलौता देश’………….
Photo: UB India News Archive

आज देशभर में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जा रहा है। कई संस्थानों में विशेष प्रोग्रामों का आयोजन किया जा रहा है। यह दूसरी बार है जब देश यह दिवस मना रहा है, इससे पहले 2024 में पहली बार राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया गया था। यह दिन इसरो की सफलता का स्मरण कराता है और वैज्ञानिक विकास पर राष्ट्रीय गर्व की भावना उत्पन्न करता है। यह भारत की अंतरिक्ष शक्ति के निर्माण की प्रतिज्ञा को भी दर्शाता है। एक छात्र होने के नाते आपको इस दिन के महत्व और इतिहास के बारे में पता होना चाहिए।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर भारत मंडपम में कार्यक्रम का आयोजन किया। द्वितीय अंतरिक्ष दिवस कार्यक्रम में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्लाख् केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह और इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री मोदी ने वर्चुअली संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देशवासियों को दूसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की बधाई दी।  प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘इस बार के अंतरिक्ष दिवस की थीम आर्यभट्ट और गगनयान है। इसमें अतीत का आत्मविश्वास भी है और भविष्य का संकल्प भी। आज हम देख रहे हैं कि इतने कम समय में ही राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस हमारे युवाओं के बीच उत्साह और आकर्षण का विषय बन गया है। यह देश के लिए गौरव की बात है।’

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “साथियों, आज भारत सेमी-क्रायोजेनिक इंजन और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में तेजी से प्रगति कर रहा है। जल्द ही आप सभी वैज्ञानिकों की मेहनत से भारत गगनयान की उड़ान भी भरेगा। आने वाले समय में भारत अपना अंतरिक्ष स्टेशन भी बनाएगा। अब हम चंद्रमा और मंगल तक पहुंच चुके हैं। अब हमें गहरे अंतरिक्ष में उन हिस्सों की खोज करनी है, जहां मानवता के भविष्य के लिए कई आवश्यक रहस्य छिपे हैं।”

 

कार्यक्रम में इसरो अध्यक्ष वी नारायणन ने कहा कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के लिए कुछ लोगों को धन्यवाद देना चाहिए। 23 अगस्त 2023 एक ऐतिहासिक दिन था। भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रयान-3 की सफलतापूर्वक लैंडिंग कराई। हम ऐसा करने वाले एकमात्र देश हैं। भारत के प्रधानमंत्री एक दूरदर्शी नेता हैं और हमारे मंत्री ने हमें अंतरिक्ष गतिविधियों को अंजाम देने के लिए दिशानिर्देश दिए। उन्होंने ही चंद्रयान-3 के लैंडिंग स्थल का नाम ‘शिव शक्ति’ प्वाइंट रखा। उन्होंने 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में भी घोषित किया।

इसरो अध्यक्ष ने कहा कि एक बड़ी उपलब्धि हमारे एक गगनयात्री को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजना है। इसके लिए एक बार फिर प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहिए। यह उनका ही विचार था कि अपने रॉकेट के जरिये किसी गगनयात्री को अंतरिक्ष में भेजने से पहले हमें उनमें से एक यात्री को आईएसएस पर भेजना चाहिए। उनके इसी विजन के चलते आज हमें बड़ी सफलता मिली। शुभांशु शुक्ला आईएसएस गए और सकुशल वापस आ गए। उनके तीन सहयोगियों को भुलाया नहीं जा सकता। हमारे चार गगनयात्री हैं। मैं कहता था कि चारों लोग हमारे लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। आखिरकार केवल एक व्यक्ति को ही यह अवसर मिला।

इसरो चेयरमैन ने कहा कि हम चंद्रयान-4 मिशन शुरू करने जा रहे हैं। हम वीनस ऑर्बिटर मिशन शुरू करने जा रहे हैं। 2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा और 2028 तक पहला मॉड्यूल लॉन्च किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने NGL (नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्चर) को मंजूरी दे दी है। 2040 तक भारत चंद्रमा पर उतरेगा और हम उसे सुरक्षित वापस लाएंगे। 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम दुनिया के किसी भी अन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम के बराबर होगा।

पीएम मोदी ने अंतरिक्ष दिवस की दी बधाई

अंतरिक्ष के बारे में लोगों का ज्ञान बढ़ाने की कोशिश
इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक नीलेश एम देसाई ने कहा कि 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान 3 का लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा था। इसलिए इसकी याद में पीएम मोदी ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाने की घोषणा की थी। आज हम दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैं। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष के बारे में लोगों का ज्ञान बढ़ाना और उन्हें अंतरिक्ष में भारत द्वारा प्राप्त सफलताओं से प्रेरणा लेना है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक विशेषता यह रही है कि हमारे ग्रह अन्वेषण कार्यक्रम में हमने पहले परीक्षण में सफलता प्राप्त की है। केवल चंद्रयान 2 के दौरान ही हमने उतरने की कोशिश की थी, लेकिन हम असफल रहे। चंद्रयान-3 23 अगस्त 2023 को सफलतापूर्वक उतरा और भारत दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।

National Space Day 2025: यह दिवस क्यों मनाया जाता है?

भारत ने 23 अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी। जो कि भारत के लिए एक गौरवशाली यात्रा थी, जिसके बाद अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत ने अपनी एक अद्वितीय पहचान बनाई। इस यात्रा को सम्मान देने के लिए 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश है। यह भारत के अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है।

पहले राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की थीम क्या थी?

23 अगस्त 2024 में पहले राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया गया था। जिसका थीम था “चंद्रमा को छूते हुए जीवन को छूना: भारत की अंतर्गाथा।” यह थीम अंतरिक्ष अनुसंधान के मानव जीवन को रेखांकित करती है।

इस बार क्या है थीम?

इस बार द्वितीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस नई दिल्ली के भारत मंडप में मनाया जाएगा और उत्तर प्रदेश सहित पूरे प्रदेश के विद्यालयों में भी इसे मनाया जाएगा। इसकी थीम है ‘आर्यभट्ट से गगनयान: प्राचीन ज्ञान से अनंत संभावनाएं’।

इसका उद्देश्य क्या है? 

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का उद्देश्य चंद्रयान-3 मिशन की सफलता का सम्मान करना है साथ ही युवा पीढ़ी में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के प्रति उत्साह जगाना, भारत की अंतरिक्ष शक्तियों को उजागर करना और बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ना है।

विकसित भारत-2047 में देंगे योगदान, 2015-25 में लॉन्च किए दोगुने अंतरिक्ष मिशन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सम्मेलन 2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हम विकसित भारत-2047 में योगदान देंगे। उन्होंने सम्मेलन को नागरिकों तक अंतरिक्ष अनुप्रयोग पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

नारायणन ने कहा कि आज 55 अंतरिक्ष अनुप्रयोग हैं। इनमें टेलीविजन प्रसारण और मौसम पूर्वानुमान शामिल हैं। ये उपग्रह हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने देश की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 50 साल पहले भारत के पास उपग्रह तकनीक नहीं थी।
इसरो को अत्याधुनिक तकनीक पर ध्यान केंद्रित करने की पूरी स्वतंत्रता : पीके मिश्रा
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की ओर से शुरू किए गए अंतरिक्ष सेक्टर में सुधारों ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नवोन्मेषी और लचीला बना दिया है। इन सुधारों की वजह से इसरो अब अत्याधुनिक तकनीक और डीप स्पेस मिशनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए स्वतंत्र है, जबकि अनुप्रयोग और सेवाओं का दायित्व तेजी से विकसित हो रहे निजी क्षेत्र को सौंपा गया है। मिश्रा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की पूर्व संध्या पर इसरो की ओर से आयोजित नेशनल मीट-2 को संबोधित कर रहे थे।
पिछले महीने, 30 जून को निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) सैटेलाइट विश्व का सबसे महंगा उपग्रह बन गया। यह पूरी तरह इसरो द्वारा निर्मित और हमारे रॉकेट से कक्षा में स्थापित किया गया। आज हम विकसित देशों के कंधे से कंधा मिला कर खड़े हैं।  उन्होंने 2025 की प्रमुख उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा, 29 जनवरी को हमने 100वें रॉकेट का प्रक्षेपण किया।  2015-2025 में इसरो ने 2005-2015 की तुलना में लगभग दोगुने मिशन लॉन्च किए।

 

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