जयशंकर के जाल में फंसा पाकिस्तान, बिना नाम लिए दिया भाषण, पाकिस्तान की प्रतिक्रिया आतंकवाद की स्वीकारोक्ति’, भारत का पलटवार

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में बिना नाम लिए पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ बताते हुए कड़ा प्रहार किया. इससे पाकिस्तान तिलमिला गया और बोला कि भारत बिना सबूतों के उसके ऊपर आरोप लगा रहा है. इस पर […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 28 सितंबर 2025, 07:11 AM 9 मिनट read
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जयशंकर के जाल में फंसा पाकिस्तान, बिना नाम लिए दिया भाषण, पाकिस्तान की प्रतिक्रिया आतंकवाद की स्वीकारोक्ति’, भारत का पलटवार
Photo: UB India News Archive
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में बिना नाम लिए पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ बताते हुए कड़ा प्रहार किया. इससे पाकिस्तान तिलमिला गया और बोला कि भारत बिना सबूतों के उसके ऊपर आरोप लगा रहा है. इस पर भारत ने फिर जवाब दिया और पाकिस्तान को ‘टेररिस्तान’ करार देते हुए कहा कि उसकी आतंकवाद में संलिप्तता न केवल पड़ोसियों, बल्कि पूरे विश्व के लिए खतरा है.
दरअसल शनिवार को UNGA में अपने भाषण के दौरान डॉ. जयशंकर ने कहा, ‘हमारे अधिकारों की रक्षा करते हुए हमें खतरों का भी डटकर सामना करना होगा. आतंकवाद का मुकाबला हमारी प्राथमिकता है, क्योंकि यह कट्टरता, हिंसा, असहिष्णुता और भय का प्रतीक है. भारत आजादी के बाद से इस चुनौती का सामना कर रहा है, क्योंकि उसका एक पड़ोसी वैश्विक आतंकवाद का केंद्र है.’ उनके यह कहने पर UN तालियों से गूंज उठा. उन्होंने अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि यह सीमा-पार आतंकवाद का ताजा उदाहरण है, जिसमें निर्दोष पर्यटकों की हत्या की गई.

‘पाकिस्तान नहीं टेररिस्तान’

पाकिस्तान ने डॉ. जयशंकर के बयान का जवाब देने के लिए अपने जवाबी अधिकार (Right of Reply) का इस्तेमाल किया. पाकिस्तानी राजनयिक ने भारत पर आरोप लगाया कि वह बिना सबूत के पाकिस्तान को बदनाम कर रहा है. यह तब है जब विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम भी नहीं लिया था. इसी को चोर की दाढ़ी में तिनका कहते हैं.
जवाब में भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन के द्वितीय सचिव रेंटाला श्रीनिवास (Rentala Srinivas) ने कहा, ‘यह अपने आप में बहुत कुछ कहता है कि जिस पड़ोसी का नाम नहीं लिया गया, वह फिर भी जवाब देने आया और उसने अपनी लंबे समय से चली आ रही सीमा-पार आतंकवाद की आदत को स्वीकार कर लिया.’ उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान की पहचान खुद बोलती है. उसकी आतंकवाद में संलिप्तता इतने सारे स्थानों पर स्पष्ट दिखाई देती है कि वह न केवल अपने पड़ोसियों, बल्कि पूरे विश्व के लिए अभिशाप है. कोई भी तर्क या असत्य टेररिस्तान के अपराधों को छिपा नहीं सकता.’

बिलबिला गया पाकिस्तान

पाकिस्तान ने दोबारा जवाब देते हुए भारत पर अपने देश का नाम ‘टेररिस्तान’ कहकर अपमान करने का आरोप लगाया. उसने भारत पर अपनी खुफिया एजेंसियों के जरिए पड़ोसी देशों को अस्थिर करने का भी इल्जाम लगाया. लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ उसका रुख दृढ़ है और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को बेनकाब करना जरूरी है.

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के भाषण का अहम् बिंदु

(संयुक्त राष्ट्र महासभा – 80वाँ सत्र, 27 सितम्बर 2025)

माननीय अध्यक्ष, महासभा के सदस्यगण,

  1. मैं इस महासभा को संबोधित करते हुए भारत सरकार और जनता की ओर से आप सभी को नमस्कार करता हूँ।
    इस वर्ष हम एक गहरे सवाल के साथ इकट्ठे हुए हैं — संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक संकटों में कहाँ वास्तविक फर्क डाला है?

  2. आतंकवाद, युद्ध, व्यापारिक संघर्ष, महामारी, जलवायु आपदा — हर संकट हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या संयुक्त राष्ट्र अपनी मूल जिम्मेदारी पूरी कर रहा है।

  3. भारत दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा है। हमारे अनेक निर्दोष नागरिकों ने जान गंवाई है।
    यह कोई रहस्य नहीं कि कई बड़े आतंकवादी हमलों की जड़ एक ही देश में है — वह देश जो लगातार वैश्विक आतंकवाद का अड्डा बना हुआ है।

  4. आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता — न तो प्रॉक्सी युद्ध के रूप में, न ही “न्यूक्लियर ब्लैकमेल” की ढाल के पीछे छिपाकर।
    आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकना होगा, आतंकियों को शरण देने वालों को दंडित करना होगा, और उन्हें दण्डमुक्ति (impunity) नहीं दी जानी चाहिए।


⚖️ संयुक्त राष्ट्र सुधार पर

  1. आज वैश्विक जनसंख्या का बड़ा हिस्सा विकासशील देशों में है, फिर भी निर्णय लेने की सबसे महत्वपूर्ण संस्था — सुरक्षा परिषद — सीमित और असंतुलित बनी हुई है।

  2. यदि संयुक्त राष्ट्र को प्रासंगिक बनाए रखना है, तो सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार की सदस्यताओं का विस्तार अनिवार्य है।

  3. भारत मानता है कि “ग्लोबल साउथ” की आवाज़ यहाँ परिलक्षित होनी चाहिए।

  4. आज दुनिया “टैरिफ युद्धों” और असमान व्यापार दबावों का सामना कर रही है।
    इससे विकासशील देशों की प्रगति बाधित हो रही है और वैश्विक अस्थिरता बढ़ रही है।

  5. भारत का मानना है कि वैश्विक व्यापार को निष्पक्ष, पारदर्शी और समान अवसरों वाला होना चाहिए।
    विकासशील देशों को आत्मनिर्भरता और विविधीकरण (diversification) के लिए सक्षम बनाना होगा।

  6. वर्तमान वैश्विक तनावों — जिनमें सशस्त्र संघर्ष और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा शामिल है — ने यह दिखाया है कि बहुपक्षीय सहयोग अपरिहार्य है

  7. भारत सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास करता है और आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है।

  8. राष्ट्रीय हित और वैश्विक हित विरोधी नहीं हैं — बल्कि दोनों में संतुलन आवश्यक है।

  9. भारत ने हमेशा अपनी लोकतांत्रिक परंपरा, विविधता और विकास की उपलब्धियों को विश्व के साथ साझा किया है।

  10. हमने महामारी के समय वैक्सीन मित्रता (Vaccine Maitri), जलवायु कार्यवाही में “International Solar Alliance” और “One Sun, One World, One Grid” जैसी पहलें दी हैं।

  11. भारत आज भी यही संदेश दोहराता है — हमारे पास दुनिया के साथ साझा करने के लिए बहुत कुछ है।

  12. माननीय अध्यक्ष, आज का समय संयुक्त राष्ट्र के लिए आत्ममंथन का है।
    यदि हम वास्तव में 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करना चाहते हैं, तो हमें साहसिक सुधार करने होंगे।

  13. भारत इस महासभा के सभी देशों के साथ मिलकर एक अधिक न्यायपूर्ण, प्रतिनिधिक और शांतिपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के लिए काम करता रहेगा।

धन्यवाद।

“जरूरी है कि हम इस निराशा को दूर करें”

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता में कमी का मुख्य कारण सुधार का विरोध है। उन्होंने कहा, “अधिकांश सदस्य दृढ़ता से बदलाव चाहते हैं, लेकिन प्रक्रिया को ही परिणाम में बाधा बनाया जा रहा है। यह जरूरी है कि हम इस निराशा को दूर करें और सुधार एजेंडे पर सार्थक रूप से काम करें।”

पड़ोसियों की मदद में भारत की भूमिका

विदेश मंत्री ने संकट के समय में अपने पड़ोसियों की तत्काल जरूरतों पर भारत की त्वरित प्रतिक्रिया को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “…अशांत समय में यह जरूरी है कि हम संकट के क्षणों में आगे बढ़ें। भारत इस संबंध में खासकर अपने आस-पास के क्षेत्रों में हमेशा तत्पर रहा है। चाहे वह वित्त, भोजन, उर्वरक या ईंधन हो, हमने अपने पड़ोसियों की तत्काल जरूरतों को पूरा किया है।”

यूक्रेन और गाजा में चल रहे संघर्षों पर बोले

जयशंकर ने विशेष रूप से यूक्रेन और गाजा में चल रहे संघर्षों के परिणामों पर ध्यान आकर्षित किया, जिसका असर उन देशों पर भी महसूस किया जा रहा है जो सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा, “संघर्षों के मामले में विशेष रूप से यूक्रेन और गाजा में, जो सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, उन्होंने भी इसका प्रभाव महसूस किया है। ऐसे राष्ट्र जो सभी पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित कर सकते हैं, उन्हें समाधान खोजने के लिए आगे आना चाहिए। भारत शत्रुता समाप्त करने का आह्वान करता है और किसी भी पहल का समर्थन करेगा जो शांति बहाल करने में मदद करेगी।”

AI पर भारत का दृष्टिकोण

आखिर में विदेश मंत्री ने विकास की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, “…भारत विकास की अपनी यात्रा में अपने अनुभवों और उपकरणों को दूसरों के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की विकास के लिए व्यापक क्षमता को उजागर किया। जयशंकर ने बताया कि भारत का दृष्टिकोण AI का जिम्मेदारी से मानव कल्याण के लिए उपयोग करना है। उन्होंने घोषणा की कि समावेश और प्रभाव उन लक्ष्यों का आधार होंगे जिनके लिए भारत 2026 में एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

इतिहास द्वारा प्रेरित शक्तियों ने UN को आगे बढ़ाया-जयशंकर

एस. जयशंकर ने कहा, “.संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से इतिहास द्वारा प्रेरित शक्तियों ने इस संस्था को आगे बढ़ाया है। जैसे-जैसे उपनिवेशवाद का अंत हुआ, दुनिया अपनी प्राकृतिक विविधता की ओर लौटने लगी। संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता चौगुनी हो गई और संगठन की भूमिका और कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वैश्वीकरण के युग में, इसका एजेंडा और भी विकसित हुआ। विकास लक्ष्य केंद्र में रहे, जबकि जलवायु परिवर्तन एक साझा प्राथमिकता के रूप में उभरा। व्यापार को और अधिक प्रमुखता मिली, जबकि खाद्य और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच को वैश्विक कल्याण के लिए आवश्यक माना गया।”

आतंकवाद पर हमारी जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी

उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक साझा खतरा है UNGA में आतंकवाद पर गहन साझेदारी होनी चाहिए। जब राष्ट्र खुलेआम आतंकवाद को अपनी राजकीय नीति घोषित करते हैं, जब आतंकवादी अड्डे औद्योगिक पैमाने पर संचालित होते हैं, जब आतंकवादियों का सार्वजनिक रूप से महिमामंडन किया जाता है, तो ऐसी कार्रवाइयों की स्पष्ट रूप से निंदा की जानी चाहिए। जब आतंकवाद राष्ट्र की नीति बन जाए तो इसका निंदा होना चाहिए। जो देश आतंकवाद को प्रश्रय देते हैं उनके खिलाफर एक्शन लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर हमारी जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी है।

पाकिस्तान पर साधा निशाना

हमारे पड़ोस में एक मुल्क है जो वैश्विक आतंकवाद का केंद्र है। पिछले कुछ वर्षों में बड़े अंतराष्ट्रीय आतंकवादी हमले इस एक देश से हुए हैं। हाल का उदाहरण पहलगाम का है जहां निर्देष पर्यटकों को मारा गया।  भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपने लोगों की रक्षा करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया और इसके आयोजकों और अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया।

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