क्या राहुल गांधी तो खुद अपने लिए खतरे खड़ा करते रहे हैं……………..

राहुल गांधी इस तरह की घोषणाएं करते हैं, जैसे अगली बार उनका पीएम बनना पक्का है. ऐसे वादे करते उनके 3 चुनाव तो बीत गए. 55 साल के हो चले हैं. सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों में वे होते तो अपने 60वें जन्मदिन पर यानी 5 साल बाद रिटायर हो जाते. राजनीति में रिटायरमेंट की मियाद तय […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 18 दिसंबर 2025, 08:00 AM 7 मिनट read
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क्या राहुल गांधी तो खुद अपने लिए खतरे खड़ा करते रहे हैं……………..
Photo: UB India News Archive
राहुल गांधी इस तरह की घोषणाएं करते हैं, जैसे अगली बार उनका पीएम बनना पक्का है. ऐसे वादे करते उनके 3 चुनाव तो बीत गए. 55 साल के हो चले हैं. सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों में वे होते तो अपने 60वें जन्मदिन पर यानी 5 साल बाद रिटायर हो जाते. राजनीति में रिटायरमेंट की मियाद तय नहीं. इसलिए वे रिटायर नहीं होंगे. हां, राजनीति में रिटायरमेंट का एक खतरा हाल के वर्षों में ट्रेंडिंग मोड में है. वैसे राहुल गांधी खुद भी खतरे खड़े रहते हैं. अगर जनता उन्हें 3 बार से खारिज कर रही है, तो इसकी वजह उनके खुद खड़े किए खतरे ही हैं. नकारात्मकता तो उनके स्वभाव में कूट-कूट कर भरी है. उन्हें सभी चोर ही नजर आते हैं. पीएम मोदी के लिए कभी उन्होंने चौकीदार चोर है कहा था, अब उनके लिए वोट चोर, गद्दी छोड़ का नारा लगा रहे हैं. उन्हें नरेंद्र मोद सरकार चोर ही नजर आती है. आइए, उनकी राह में खड़े खतरों पर नजर डालते हैं.
राहुल और गंगा सेतु
प्रसंगवश एक रोचक जानकारी. शायद यह सबको पता न हो. राहुल गांधी और बिहार में हाजीपुर और पटना के बीच गंगा पर बने ब्रिज का जन्म एक ही साथ हुआ था. देश के जाने माने पत्रकार और पद्मश्री से सम्मानित सुरेंद्र किशोर बताते हैं कि 1970 में जिस दिन महात्मा गांधी सेतु का शिलान्यास हुआ, राहुल गांधी का जन्म भी उसी दिन हुआ था. इंदिरा गांधी शिलान्यास के लिए 19 जून 1970 को पटना आई थीं. इंदिरा गांधी मंच पर थीं. राहुल गांधी के जन्म की सूचना अफसरों को मिली तो मंच तक उनके पास यह कैसे कम्युनिकेट की जाए, इसे लेकर नेता-अफसर परेशान हुए. आखिरकार पटना से तब प्रकाशित हो रहे आर्यावर्त के पत्रकार रामजी मिश्र मनोहर ने इस सूचना का एक चुटका इंदिरा जी को मंच पर ले जाकर दिया. राहुल गांधी की उम्र से महात्मा गांधी सेतु का यह रिश्ता सिर्फ जानकारी के लिए है. खतरे की आशंका से इसका कोई लेना-देना नहीं. खतरे तो दूसरे दिखते हैं.
मिलने लगे हैं रुझान
राहुल गांधी की राह में खतरों के संकेत मिलने भी लगे हैं. इसका इस बात से संकेत मिलता है कि अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बारे में कांग्रेस के ही एक पूर्व विधायक ने ऐसे तर्कों से अपनी बात रखी है कि उसे खारिज नहीं किया जा सकता. ऐसे ही बयान राहुल गांधी के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लाक के नेताओं की ओर से भी आने लगी है. नेशनल कांफ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सीधे-सीधे राहुल गांधी के वोट चोरी के मुद्दे को ही खारिज करने लगे हैं. वे कहते हैं कि वोट चोरी की बात बेमानी है. राहुल गांधी का यह मुद्दा ही ग़लत है.
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राहुल गांधी खुद ही अपने आगे खतरे खड़े कर रहे हैं.
कांग्रेस नेता का आरोप
ओडिशा में कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं मोहम्मद मोकीम. पार्टी ने उन्हें अब बाहर का रास्ता दिखा दिया है. उनका अपराध यही है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर ऐसी टिप्पणियां की हैं, जो राहुल गांधी के लिए भी एक नए खतरे का संकेत है. मोकीम ने कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा है. उसमें उन्होंने कहा है कि खड़गे की उम्र (83 वर्ष) ज्यादा हो गई है. इससे पार्टी को युवाओं से जोड़ने और प्रभावी नेतृत्व देने में दिक्कत हो रही है. वर्तमान नेतृत्व शैली में बदलाव की जरूरत है. युवा नेताओं को आगे लाना चाहिए. उनका यह भी कहना है कि राहुल गांधी भी पार्टी कार्यकर्ताओं और युवाओं से जुड़े नहीं हैं. आश्चर्य है कि कांग्रेस ने सच को स्वीकार कर उस पर चिंतन करने के बजाय आईना दिखाने वाले मोकीम को अनुशासनहीन बता कर पार्टी से मोकीम को पार्टी से निष्कासित कर दिया है.
कैसे होंगे जेन-जी लीडर!
मोकीम का इशारा समझें तो राहुल गांधी भी युवाओं से कनेक्ट नहीं कर पा रहे. युवाओं से उनकी दूरी दिनोंदिन बढ़ेगी ही. ऐसा कहने के पीछे आधार यह है कि लोकसभा का अगला चुनाव 2029 में होगा. तब राहुल गांधी 59 के हो जाएंगे. अपने को अब तक युवा साबित करने के लिए राहुल बांग्लादेश और नेपाल की तरह ही भारत में भी जेन-जी आंदोलन की वकालत करते हैं. माना जाता है कि 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग जेन जी (Generation Z) की श्रेणी में आते हैं. यह सामान्य समझ की बात है कि 13 से 28 साल के किशोर और युवाओं का नेतृत्व 59-60 साल का कोई आदमी कैसे करेगा! नेतृत्व के लिए उनके जैसा मानस और उम्र होना जरूरी होगा, जिसकी शर्तें राहुल गांधी पूरी नहीं कर पाएंगे. कांग्रेस नेतृत्व के युवाओं से कनेक्ट नहीं हो पाने की ओर पार्टी से निकाले गए नेता मोकीम ने भी इशारा किया है. राहुल हैं कि अब भी उन्हें किशोरों-युवाओं से ही अधिक उम्मीद है.
राहुल के सामने खतरे
लोकसभा से लेकर राज्यों के चुनावों में 2014 के बाद कांग्रेस जिस तरह हारती आ रही है, उसे देख कर आने वाले समय में उससे किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं की जा सकती. भाजपा की तरह ताकतवर एनडीए जैसा मजबूत और एकता वाला गठबंधन बनाने का कांग्रेस का प्रयास भी अब विफल होता नजर आ रहा है. ममता बनर्जी, लालू यादव-तेजस्वी यादव और उमर अब्दुल्ला के रुख को देखते हुए अब यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि राहुल गांधी के नेतृत्व पर कोई पार्टी भरोसा करेगी. ममता ने लोकसभा चुनाव के बाद ही इंडिया का नेतृत्व बदलने की बात कही थी. तब एनसीपी नेता शरद पवार, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और लालू यादव ने भी ममता की सलाह पर सहमति जताई थी.
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राहुल गांधी के नेतृत्व में 20 सालों में 95 चुनावी हारें दर्ज हो चुकी हैं.
कांग्रेस का अंदरूनी कलह
कांग्रेस का अंदरूनी कलह किसी से छिपा नहीं है. शशि थरूर की हरकतें ना काबिले बरदाश्त होने के बावजूद कांग्रेस उनका कुछ नहीं बिगाड़ पा रही. कांग्रेस ने भी कम से कम 2 मौकों पर ऐसा आचरण किया है, जिससे इंडिया ब्लाक की एका पर सवाल उठते रहे हैं. हरियाणा और दिल्ली में कांग्रेस ने अपनी ही घटक आम आदमी पार्टी से पंगा लिया. वोट चोरी को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की रैली की तो इंडिया ब्लाक के साथियों को पूछा तक नहीं. ये सब राहुल की राह में बाधा बनेंगे. इससे भी बड़ी बात यह कि राहुल गांधी की बढ़ती उम्र आने वाले दिनों में उनके लिए बड़ा खतरा बनेगी, क्योंकि उनकी विरोधी पार्टी भाजपा जहां युवाओं पर फोकस कर रही है, वहां कांग्रेस बूढ़ों की फौज बनती जा रही है. राहुल जवान बनने-दिखने की जितनी भी कोशिश करें, पर इससे मुंह नहीं छिपाया जा सकता कि 5 साल बाद वे भी उन्हीं बूढ़ों की कतार में शामिल हो जाएंगे, जिन्हें लेकर मोकीम ने सोनिया को लिखे अपने पत्र में इशारा किया है.
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