77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ देशभक्ति के रंग में रंगा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराया तिरंगा, ली सलामी ……………….

आज भारत 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परेड की सलामी ली। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला लॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा इस गौरवशाली लम्हे के साक्षी बन रहे हैं। देश के राज्यों में भी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 26 जनवरी 2026, 06:28 AM 5 मिनट read
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77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ देशभक्ति के रंग में रंगा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराया तिरंगा, ली सलामी ……………….
Photo: UB India News Archive

आज भारत 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परेड की सलामी ली। यूरोपीय  संघ की अध्यक्ष उर्सुला लॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा इस गौरवशाली लम्हे के साक्षी बन रहे हैं। देश के राज्यों में भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया गया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने फहराया तिरंगा

राष्ट्रपति मुर्मू ने तिरंगा फहराया। इस दौरान गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर और सैंटोस कोस्टा भी मौजूद रहे। पीएम मोदी ने मेहमानों का स्वागत किया।

राष्ट्रपति ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कर्तव्य पथ पर ग्रुप कैप्टन शुभाशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया।

नारी शक्ति वंदन की मिसाल

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर भारत की ताकत, अनुशासन और एकता की झलक दिखाई दी। इस गौरवशाली मौके पर सीआरपीएफ की सहायक कमांडेंट सिमरन बाला का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। सिमरन बाला पहली महिला अधिकारी हैं, जिन्हें CRPF की पुरुष मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करने का अवसर मिला। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय सुरक्षा बलों में महिला नेतृत्व की मजबूत घोषणा है।

नारी शक्ति वंदन की मिसाल
सिमरन बाला सिर्फ एक अधिकारी नहीं, एक विचार हैं जो बताता है कि भारत बदल रहा है। गणतंत्र दिवस 2026 पर उनके कदमताल करने के साथ, देश की हर बेटी के भीतर यह विश्वास और मजबूत हुआ कि सुरक्षा बलों का नेतृत्व और कमान एक महिला कितने दमदार तरीके से निभा सकती हैं। आइए जानते हैं सिमरन बाला के बारे में।

कौन हैं सिमरन बाला? 

  • सिमरन बाला जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से ताल्लुक रखती हैं।
  • सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखे।
  • पढ़ाई में शुरू से ही मेहनती रहीं सिमरन ने राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
  • इसके बाद UPSC CAPF परीक्षा में सफलता हासिल कर सीआरपीएफ में सहायक कमांडेंट बनीं।

सिमरन की ऐतिहासिक उपलब्धि

  • गणतंत्र दिवस परेड में सिमरन बाला को 140 से अधिक पुरुष जवानों की टुकड़ी की कमान सौंपी गई है।
  • यह पहली बार है जब CRPF की किसी पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व कोई महिला अधिकारी करेगी।

प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता
CRPF अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान सिमरन बाला ने अनुशासन, नेतृत्व कौशल, शारीरिक क्षमता और आत्मविश्वास में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने यह साबित किया कि नेतृत्व लिंग से नहीं, क्षमता से तय होता है।

महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल

सिमरन बाला की यह उपलब्धि उस सोच को तोड़ती है जिसमें सुरक्षा बलों को केवल पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है। उनका नेतृत्व यह संदेश देता है कि

  • महिलाएं केवल भागीदारी नहीं, नेतृत्व भी कर सकती हैं
  • अवसर मिलने पर महिलाएं हर मोर्चे पर खुद को साबित कर सकती हैं
  • यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता आसान करेगा।

नई चुनौतियों के बीच, जीवंत स्वरूप के मूल्यांकन का समय

आज जब भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, तब यह अवसर सिर्फ संविधान को स्मरण करने का नहीं, बल्कि उसके जीवंत स्वरूप के मूल्यांकन का भी है। दुनिया भर के गणतंत्रों में जो स्थितियां बन रही हैं, उस संदर्भ में हमारा लोकतंत्र बाकियों की तुलना में अधिक मजबूत नजर आता है। जाहिर है कि हममें कोई तो शक्ति निहित है, जिसकी बदौलत न तो बाहरी दबाव और न ही आंतरिक चुनौतियां इसे विचलित कर पा रही हैं।

हमारे गणतंत्र की वास्तविक स्थिति समझनी हो, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे तथाकथित घोषित गणतंत्रों की ओर देखना ही पर्याप्त है, जहां लोकतांत्रिक संस्थाएं बार-बार सैन्य या राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार होती रही हैं। दूसरी तरफ, वेनेजुएला और यूक्रेन जैसे देश हैं, जहां चुनाव तो होते हैं, लेकिन वैश्विक शक्तियां अपने हितों के अनुसार उन्हें दबाए रखती हैं। इसके उलट, भारत में कुछ बात तो है कि उस पर कोई हाथ तक नहीं डाल पाता। यह ‘कुछ बात’ हमारी संस्थागत परिपक्वता, सांविधानिक निरंतरता और नागरिकों की लोकतांत्रिक चेतना का सम्मिलित परिणाम है।

हालांकि गणतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन की सुरक्षा और सम्मान से भी मापी जाती है। ग्रेटर नोएडा में हाल ही में युवा पेशेवर के साथ हुआ हादसा संविधान की भावना पर ही प्रश्नचिह्न लगाता है। इसी पृष्ठभूमि में हाल ही में सरकार ने पुराने श्रम कानूनों की जगह चार नई श्रम संहिताएं लागू करने की घोषणा की है, जिसे स्वतंत्रता के बाद श्रमिकों के लिए सबसे बड़े और प्रगतिशील सुधारों में से एक माना जा रहा है।

यह गणतंत्र दिवस हमें संघीय ढांचे की चुनौतियों पर सोचने के लिए भी बाध्य करता है। दक्षिण के राज्यों में राज्यपाल और निर्वाचित मुख्यमंत्रियों के बीच बढ़ते टकराव ने सांविधानिक मर्यादाओं पर बहस को और तेज कर दिया है। दोनों को ही समझना होगा कि हमारा गणतंत्र तभी मजबूत रहेगा, जब केंद्र और राज्य, दोनों एक-दूसरे के अधिकारों और सीमाओं का सम्मान करेंगे। गणतंत्र की मजबूती का एक और पैमाना हमारी वैश्विक भूमिका भी है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते को लेकर यूरोपीय देशों का संघ जिस तरह से उत्साहित है, वह वैश्विक पटल पर भारतीय बाजारों की ताकत को ही दर्शाता है। आज जब दुनिया भर के लोकतंत्रों पर अविश्वास बढ़ रहा है, चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं और संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं, हमारा गणतंत्र एक अपवाद की तरह दिखता है।

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