ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: विकास के नाम पर विनाश या देश के लिए गेमचेंजर?

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत सरकार का एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है. यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार पर बनाया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 72,000 से 92,000 करोड़ रुपये है. इसमें बड़ा अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, इंटरनेशनल एयरपोर्ट, टाउनशिप और पावर प्लांट […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 3 मई 2026, 02:50 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: विकास के नाम पर विनाश या देश के लिए गेमचेंजर?
Photo: UB India News Archive

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत सरकार का एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है. यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार पर बनाया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 72,000 से 92,000 करोड़ रुपये है. इसमें बड़ा अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, इंटरनेशनल एयरपोर्ट, टाउनशिप और पावर प्लांट शामिल हैं.

यह प्रोजेक्ट भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत बनाने के लिए बनाया गया है. लेकिन इस पर काफी विवाद भी हो रहा है. कुछ लोग इसे पर्यावरण और आदिवासी संस्कृति के लिए खतरा बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी बता रही है.

प्रोजेक्ट क्या है और इसमें क्या-क्या बनेगा?

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में 2025 से 2035 तक काम होगा.इसमें गलाथिया बे में एक बड़ा पोर्ट बनेगा, जिसकी क्षमता शुरू में 4.4 मिलियन TEU और बाद में 16 मिलियन TEU होगी. यह पोर्ट इतना गहरा होगा कि बड़ी-बड़ी जहाजें आसानी से आ-जा सकें.

इसके अलावा एक नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनेगा, जो सिविल और डिफेंस दोनों कामों के लिए इस्तेमाल होगा. 450 MVA का गैस और सोलर आधारित पावर प्लांट बनेगा, ताकि बिजली की समस्या न हो. एक नई टाउनशिप भी विकसित की जाएगी, जिसमें घर, दुकानें और अन्य सुविधाएं होंगी.

कुल मिलाकर 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकास होगा, जो पूरे अंडमान-निकोबार के बहुत छोटे हिस्से के बराबर है. यह प्रोजेक्ट भारत के सागरमाला कार्यक्रम का हिस्सा है. सरकार का कहना है कि यह द्वीप को पर्यटन, व्यापार और सुरक्षा का हब बना देगा.

क्यों हो रहा है इतना विवाद?

इस प्रोजेक्ट पर सबसे ज्यादा विवाद पर्यावरण को लेकर है. राहुल गांधी समेत कई लोग कह रहे हैं कि इससे 160 वर्ग किलोमीटर जंगल कटेगा, लाखों पेड़ों को नुकसान पहुंचेगा और समुद्री जीव-जंतु प्रभावित होंगे. वे इसे देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ अपराध बता रहे हैं.

कुछ लोग कहते हैं कि इससे शोम्पेन और निकोबरी जनजातियों की संस्कृति खतरे में पड़ जाएगी. लेकिन सरकार इन आरोपों को खारिज करती है. सरकार के अनुसार कुल जंगल क्षेत्र का सिर्फ 1.82% प्रभावित होगा. 18.65 लाख पेड़ों में से ज्यादा से ज्यादा 7.11 लाख पेड़ काटे जाएंगे और वह भी अलग-अलग फेज में.

बाकी 65.99 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को हरा-भरा रखा जाएगा. पर्यावरण मंजूरी के लिए बहुत सारे अध्ययन किए गए, जिसमें वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों की रिपोर्ट शामिल हैं. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है.

राजीव गांधी सरकार से क्या संबंध?

इस प्रोजेक्ट का सीधा संबंध राजीव गांधी सरकार से नहीं है. यह नरेंद्र मोदी सरकार का प्रोजेक्ट है, जिसकी शुरुआत NITI आयोग ने 2021 में की. लेकिन इतिहास देखें तो 1985 में राजीव गांधी ने अंडमान-निकोबार को सिंगापुर या हांगकांग जैसा ट्रेड हब बनाने का विचार रखा था. कांग्रेस शासन में भी द्वीपों पर विकास की योजनाएं चली थीं. इसलिए विपक्ष पर पलटवार करते हुए सरकार के समर्थक कहते हैं कि पहले कांग्रेस भी विकास चाहती थी, अब विरोध क्यों कर रही है?

भारत को क्या फायदे होंगे?

यह प्रोजेक्ट भारत के लिए बहुत बड़ा रणनीतिक फायदा देगा. ग्रेट निकोबार मलक्का स्ट्रेट के काफी करीब है, जहां से दुनिया का 30% व्यापार गुजरता है. यहां पोर्ट बनने से भारत को विदेशी पोर्ट्स (जैसे कोलंबो, सिंगापुर) पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे भारत का पैसा बचेगा और राजस्व बढ़ेगा. अनुमान है कि 2040 तक सालाना 30,000 करोड़ रुपये का फायदा हो सकता है.

रक्षा के लिहाज से यह प्रोजेक्ट भारत को अंडमान सागर में मजबूत बनाएगा. चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति का मुकाबला करने में मदद मिलेगी. भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना की मौजूदगी बढ़ेगी. समुद्री रास्तों की निगरानी आसान होगी. अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट मिलेगा – 40 से 50 हजार नौकरियां, पर्यटन बढ़ेगा, शिप रिपेयर और लॉजिस्टिक्स का नया हब बनेगा. द्वीपों पर बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी.

पर्यावरण की सुरक्षा कैसे होगी?

सरकार का दावा है कि पर्यावरण को पूरा ध्यान दिया गया है. EIA (एनवायरनमेंट इंपैक्ट असेसमेंट) और CRZ नियमों के तहत मंजूरी ली गई. कोरल ट्रांसलोकेशन, वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान और लगातार मॉनिटरिंग की व्यवस्था है. 3 अलग-अलग कमेटियां बनाई गई हैं- प्रदूषण, जैव विविधता और आदिवासियों की देखभाल के लिए.

काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए हरियाणा और मध्य प्रदेश में हजारों हेक्टेयर पर पेड़ लगाए जाएंगे. द्वीप पर 75% से ज्यादा जंगल पहले से है, इसलिए स्थानीय स्तर पर CA (कॉम्पेंसेटरी अफॉरेस्टेशन) की जरूरत नहीं पड़ी.

आदिवासी समुदायों का क्या होगा?

सरकार स्पष्ट कहती है कि कोई आदिवासी विस्थापन नहीं होगा. शोम्पेन और निकोबरी जनजातियों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी. ट्राइबल रिजर्व क्षेत्र में नेट बढ़ोतरी होगी. पुरानी पॉलिसी (जारावा पॉलिसी 2004 और शोम्पेन पॉलिसी 2015) का पालन किया जाएगा. मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स से NOC लिया गया है.

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है. यह भारत को हिंद महासागर में मजबूत बनाएगा, लेकिन विवाद इसलिए है क्योंकि कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट इको-सेंसिटिव जगह पर चुनौतियां लाता है. सरकार कहती है कि सभी मंजूरियां ली गई हैं. न्यायिक जांच हो चुकी है. निगरानी की पूरी व्यवस्था है. यह प्रोजेक्ट सफल हुआ तो भारत की रक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय ताकत बढ़ेगी. लेकिन इसके लिए पारदर्शिता, सख्त निगरानी और जनता की भागीदारी जरूरी है.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत: एक संबोधन से आगे, भारत की पहचान और वैश्विक विमर्श की बड़ी परीक्षा……………..
राष्ट्रीय

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत: एक संबोधन से आगे, भारत की पहचान और वैश्विक विमर्श की बड़ी परीक्षा……………..

न्यूयॉर्क की धरती पर जब किसी भारतीय नेता या विचारक की आवाज गूंजती है, तो वह केवल एक शहर के सभागार तक सीमित नहीं रहती। न्यूयॉर्क दुनिया की आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक राजधानी जैसा महत्व रखने वाला शहर है। यहां कही गई बात भारत में भी सुनी जाती है और दुनिया के अनेक हिस्सों में […]

UB India News29 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान के बयान के बाद किराना हिल्स क्यों चर्चा में है…………
खास खबर

पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान के बयान के बाद किराना हिल्स क्यों चर्चा में है…………

पूर्व सीडीएस जनरल अनिल जौहान के एक बयान के बाद पाकिस्तान के किराना हिल्स की चर्चा जोरों पर है. भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उस किराना हिल्स पर कोई हमला नहीं किया गया. बल्कि भारत ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के सरगोधा इलाके में तैनात […]

UB India News26 अग॰
‘दिमागी नक्सल’ से इतने आहत क्यों है कांग्रेस के नेता ……………….
खास खबर

‘दिमागी नक्सल’ से इतने आहत क्यों है कांग्रेस के नेता ……………….

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजनीति को ऐसे-ऐसे शब्द दिए हैं, जो उनके समर्थकों को जितना पसंद आते हैं, उससे कहीं ज्यादा उनके विरोधियों को बेधते हैं। शब्द की पहुंच और सफलता को इन दोनों ही परिस्थितियों से समझा जा सकता है। दिल्ली के 2020 के विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने पहली बार आंदोलनजीवी शब्द का […]

UB India News24 अग॰
भाजपा की रणनीति को कितनी धार देगी नितिन की नई टीम…………..
राष्ट्रीय

भाजपा की रणनीति को कितनी धार देगी नितिन की नई टीम…………..

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश समेत अगले वर्ष विधानसभा चुनावों वाले राज्यों को जिस तरह प्रतिनिधित्व दिया गया है, उससे साफ है कि भाजपा ने संगठनात्मक पुनर्संरचना के बहाने आने वाले चुनावों की राजनीतिक बिसात भी बिछानी शुरू कर दी है। दरअसल, भाजपा की […]

UB India News19 अग॰
जनगणना 2027: आंकड़ों की लड़ाई या सत्ता के नए समीकरण को लेकर क्यों मचा है घमासान………………….
राष्ट्रीय

जनगणना 2027: आंकड़ों की लड़ाई या सत्ता के नए समीकरण को लेकर क्यों मचा है घमासान………………….

जनगणना को लेकर इस समय जो सियासी घमासान है, उसकी जड़ सिर्फ जनसंख्या की गिनती नहीं, बल्कि जातिगत आंकड़े, आरक्षण, सामाजिक न्याय और भविष्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जनगणना 2027 में पहली बार स्वतंत्र भारत में व्यापक जाति-गणना शामिल की जा रही है। केंद्र सरकार ने 30 […]

UB India News19 अग॰
नितिन नवीन की नई टीम का एलान, 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ महामंत्री बनाए गए…………
राष्ट्रीय

नितिन नवीन की नई टीम का एलान, 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ महामंत्री बनाए गए…………

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को पार्टी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों के नामों का एलान कर दिया। पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, नई टीम में कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री […]

UB India News17 अग॰
वंदे मातरम् पर सियासी घमासान: राष्ट्रगीत से राजनीति तक
राष्ट्रीय

वंदे मातरम् पर सियासी घमासान: राष्ट्रगीत से राजनीति तक

भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ का अवसर देश के लिए गौरव, स्मरण और आत्ममंथन का दिन होना चाहिए था। लेकिन इस बार स्वतंत्रता दिवस के आसपास राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। जिस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान करोड़ों भारतीयों […]

UB India News16 अग॰
79 साल की लोकतांत्रिक यात्रा में भारत ने काफी दूरी तय की है…..
राष्ट्रीय

79 साल की लोकतांत्रिक यात्रा में भारत ने काफी दूरी तय की है…..

आजादी सिर्फ सत्ता या व्यवस्था से मुक्ति का नाम नहीं, बल्कि हर नागरिक के अपने हिस्से की स्वतंत्रता, सम्मान और बेहतर जीवन की तलाश है. 79 साल की लोकतांत्रिक यात्रा में भारत ने भूख, गरीबी, अशिक्षा और अभावों से काफी दूरी तय की है, लेकिन नई पीढ़ी के लिए आजादी के मायने अब बदल गए […]

UB India News15 अग॰