शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों में पुनर्नामांकन शुल्क लेने पर रोक लगा दी है। विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया।
आदेश में कहा गया है कि निजी विद्यालयों का संचालन एक व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि समाज सेवा का कार्य न लाभ, न हानि नहीं के सिद्धांत पर किया जाना है। ऐसे में इस प्रकार का शुल्क उचित नहीं। उन्होंने अन्य प्रतिबंधित शुल्कों पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगाई है। आदेश में यह भी कहा गया है कि निजी विद्यालयों को सभी प्रकार के शुल्कों का विवरण विद्यालय के सूचना पट्ट और वेबसाइट पर प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। स्कूल सामान्यतः शुल्क में वृद्धि नहीं करेंगे, ताकि अभिभावकों पर अध्यापन व्यय मद में अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़े।
यदि शुल्क वृद्धि अनिवार्य हो, तो सुसंगत प्राविधानों में निहित सीमा एवं विहित प्रक्रिया का अनुपालन कर ही करेंगे। आदेश में कहा गया है कि विद्यालय पाठ्यपुस्तक एवं यूनिफार्म का पैटर्न बार-बार नहीं बदलेंगे। जरूरत पड़ने पर विद्यालय स्तर पर गठित शिक्षक अभिभावक संघ से इसकी अनुमति प्राप्त कर ही करेंगे। विद्यालय यह सुनिश्चित करेगा कि अभिभावकों या विद्यार्थियों पर निर्धारित पाठ्यक्रम से अतिरिक्त अध्ययन सामग्री के लिए कोई दबाव न डाला जाए। किसी भी छात्र-छात्रा को शुल्क बकाया रहने की स्थिति में कक्षा, परीक्षा अथवा परिणाम से वंचित नहीं किया जाएगा। अभिभावक सुविधानुसार किसी भी दुकान अथवा विक्रेता से पुस्तकों एवं पठन-पाठन सामग्री तथा अन्य सामग्री खरीद सकते हैं। संबंधित विद्यालय द्वारा किसी दुकान-प्रतिष्ठान से पठन-पाठन समेत अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।








