पीएम मोदी सेशेल्स की यात्रा पर हैं जहा कभी राजीव गांधी सरकार ने ‘फ्लॉवर आर ब्लूमिंग’ अभियान चला तख्तापलट रोका था…………..

प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के तीन दिन के दौरे पर हैं. वे सेशेल्स की आजादी की 50 वीं वर्षगांठ पर मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा ले रहे हैं. पीएम ने वहां अनेक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. संसद को संबोधित किया. भारतीयों से भी मिले. इस देश से भारत का बेहद पुराना रिश्ता है. यहां […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 29 जून 2026, 08:23 AM 6 मिनट read
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पीएम मोदी सेशेल्स की यात्रा पर हैं जहा कभी राजीव गांधी सरकार ने ‘फ्लॉवर आर ब्लूमिंग’ अभियान चला तख्तापलट रोका था…………..
Photo: UB India News Archive

प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के तीन दिन के दौरे पर हैं. वे सेशेल्स की आजादी की 50 वीं वर्षगांठ पर मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा ले रहे हैं. पीएम ने वहां अनेक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. संसद को संबोधित किया. भारतीयों से भी मिले. इस देश से भारत का बेहद पुराना रिश्ता है. यहां कई बार तख्तापलट की कोशिशें हुईं. एक बार तो भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी को मदद के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा. आइए, पीएम मोदी की इस यात्रा के बहाने जानते हैं पूरी कहानी. आखिर कैसे भारत ने सेशेल्स को तख्तापलट होने से बचाया? उस ऑपरेशन का नाम क्या रखा गया था?

सेशेल्स एक छोटा द्वीप राष्ट्र है. यह हिंद महासागर में स्थित है. 29 जून 1976 में स्वतंत्र होने के बाद यहां राजनीतिक तनाव अक्सर होते रहे. साल 1977 में फ्रांस-अल्बर्ट रेने ने चोराचार के जरिए सत्ता संभाली. तब से देश कई साजिशों और तख्तापलट के प्रयासों का शिकार रहा. बड़ी शक्तियों की भी इसमें दिलचस्पी थी. शीत युद्ध के समय सेशेल्स की भौगोलिक भूमिका महत्त्वपूर्ण थी.

साल 1981 का माइक होअर का प्रयास

आजाद हुए अभी पांच साल ही हुए थे. तभी साल 1981 में एक बड़े तख्तापलट की कोशिश हुई. इसे ब्रिटिश-आईरिश पूर्व पैराट्रूपर माइक होअर ने नेतृत्व दिया. वे और उनके 44 साथी खुद को एक बीयर क्लब के रूप में छुपाकर सेशेल्स पहुंचे. उनके सामान में हथियार मिले. हवाई अड्डे पर गोलीबारी हुई. कई लोग घायल हुए. अंत में कुछ लोग एक विमान अपहरण कर जोहान्सबर्ग भाग गए. यह मामला वैश्विक ध्यान में आया. इस घटना ने सेशेल्स की सुरक्षा चिंता बढ़ा दी.

1986 में फिर रची गई एक नई साजिश

साल 1986 में फिर खतरे की खबर आई. इस बार खतरा भीतर से भी था. देश के रक्षा मंत्री ओगिल्वी बर्लोइस के नेतृत्व में कुछ सैनिक और स्थानिक सहयोगी सत्ता बदलने की साजिश रच रहे थे. सूचना मिली कि करीब 30 भाड़े के सैनिक और कुछ स्थानीय मिलकर विद्रोह करने वाले हैं. स्थिति गंभीर थी. रेने ने भारत से मदद की गुहार लगाई.

भारत से मदद की मांग और दिल्ली की सतर्कता

सेशेल्स ने नजदीकी बड़े देश भारत से संपर्क किया. भारत के पास इलाके में समुद्री क्षमता थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और विदेश नीतिकारों ने स्थिति पर विचार किया. खुफिया जानकारी और कूटनीतिक चैनलों से भी संकेत मिले कि तख्तापलट जल्द ही हो सकता है. तब भारत ने रहस्यमय और तेज कार्रवाई का निर्णय लिया. इस ऑपरेशन को बाद में फ्लावर्स आर ब्लूमिंग कहा गया. यह हमला नहीं, रोकथाम था. भारत ने अपनी नौसेना को तैनात किया. उस समय फ्रिगेट आईएनएस विंध्यगिरी सेशेल्स की ओर जा रही थी.

योजना थी कि जहाज बंदरगाह पर तकनीकी खराबी का बहाना करके रुकेगा. यह ठहराव जानबूझकर लम्बा किया गया. साथ में एक टीम भी भेजी गई जो इंजीनियर बनकर गई, पर वे हथियारों से प्रशिक्षित भी थे. जहाज की उपस्थिति सेशेल्स में शक्तिशाली संकेत भेजती थी. इसका उद्देश्य किसी भी साजिश को भयभीत करना था.

Rajiv Gandhi

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी.

IANS विंध्यगिरी की दिखावे की भूमिका

जब विंध्यगिरी पोर्ट विक्टोरिया पहुंचा, तो उसने इंजीनियरिंग खराबी बताकर रुकने की रिपोर्ट दी. जहाज पर हेलीकॉप्टर और अन्य संसाधन थे. यहां स्थानीय लोगों के लिए कुछ अभ्यास और प्रदर्शन भी किए गए. हेलीकॉप्टर से कमांडो की रस्सी से उतरने जैसी गतिविधियां दिखाई गईं. यह दिखाना था कि भारत की मौजूदगी वास्तविक है और तैयार है. इस तरह के संकेतों ने संभावित कट्टरपंथियों को हतोत्साहित किया. तब सेशेल्स में सुरक्षा बल सख्त रहे और कई षड्यंत्र विफल हुए.

राजीव गांधी की तत्काल हवाई मदद

कुछ महीनों बाद एक और कवायद उजागर हुई. इस बार राष्ट्रपति रेने किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जिम्बाब्वे गए हुए थे. जैसे ही नई साजिश की खबर आई, भारत ने तत्काल प्रतिक्रिया दी. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपना सरकारी हवाई जहाज राष्ट्रपति रेने को वापसी के लिए उधार दिया. उनका समय पर लौटना और भारतीय अधिकारियों का साथ, साजिश करने वालों को पकड़ने में मददगार रहा. कहा जाता है कि कुछ कट्टर साजिशकर्ता प्रास्लिन द्वीप पर पकड़े गए और ओगिल्वी बर्लोइस को किनारे कर दिया गया.

इस तरह साजिश हुई असफल

भारत की त्वरित और चतुर प्रतिक्रिया ने तख्तापलट रोक दिया. रेने की सरकार बनी रही. बर्लोइस और कुछ अन्य अधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ा या निष्कासित कर दिया गया. सेशेल्स-भारत रिश्ते मजबूत हुए. यह घटना हिंद महासागर में भारत की भूमिका को दर्शाती है. भारत ने दिखाया कि वह अपने आस-पास के छोटे देशों के लिए सुरक्षा गारंटर बन सकता है. इसके बाद सेशेल्स और भारत ने रक्षा सहयोग और सामुदायिक सहायता बढ़ाई.

क्या यह घुसपैठ थी?

कुछ विशेषज्ञों ने सोचा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप था. पर सेशेल्स की सरकार ने मदद मांगी थी. छोटे देशों को अक्सर बाहरी मदद की आवश्यकता रहती है. भारत ने सीधा सैनिक कब्जा नहीं किया. इसकी नीति में नाटकीय सैन्य आक्रमण नहीं था. भारत ने शक्ति का प्रदर्शन और कूटनीति दोनों का मेल किया. इसने क्षेत्रीय स्थिरता बरकरार रखी. साथ ही, यह संदेश गया कि हिंद महासागर में भारत की भूमिका महत्त्वपूर्ण है.

Pm Narendra Modi Receives Guardian Of The Blue Horizon

सेशेल्स पहुंचे पीएम मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया है. फोटो: PTI

सबक और दीर्घकालिक असर

यह घटना सिखाती है कि छोटे देशों की सुरक्षा में दोस्ती और भरोसा अहम है. सैनिक ताकत दिखाना ही पर्याप्त नहीं है. त्वरित कूटनीति, समय पर जानकारी साझा करना और सूक्ष्म सैन्य उपस्थिति से संकट टाला जा सकता है. भारत के लिए यह एक मॉडल बन गया. बाद के वर्षों में भारत ने अन्य द्वीपीय देशों के साथ रक्षा और सर्विलांस सहयोग बढ़ाया. सेशेल्स के साथ समुद्री निगरानी और जहाजों का हस्तांतरण भी इसी संदर्भ में आया.

साल 1986 का यह घटनाक्रम यह बताता है कि कैसे सोच-समझकर की गई कार्रवाई ने छोटे देश में तख्तापलट रोका. भारत ने नौसेना की चालाकी, कूटनीति और समय पर हवाई सहायता से स्थिति नियंत्रित की. यह ऑपरेशन फ्लावर्स आर ब्लूमिंग के नाम से जाना गया. इसने हिंद महासागर में भारत की गंभीरता और मित्र देशों के प्रति उसकी जिम्मेदारी दिखा दी.

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