क्सलियों के खिलाफ जारी अभियान में ऐतिहासिक सफलता मिली। 2.20 करोड़ रुपए के इनामी भाकपा माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को देर रात एक संयुक्त ऑपरेशन में दबोच लिया गया। केंद्रीय खुफिया एजेंसी (IB), राज्य पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर की रणनीति के तहत यह कार्रवाई धनबाद और गिरिडीह सीमा पर स्थित मनियाडीह इलाके से की गई। सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ टाटा मैजिक गाड़ी से जा रहा है। इस गिरफ्तारी के साथ ही देश को ‘लाल आतंक’ के टॉप लीडरशिप से बड़ी मुक्ति मिली है।
मिसिर बेसरा की ऐसे हुई गिरफ्तारी
नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में मंगलवार को सुरक्षा बलों को दो बड़ी कामयाबी मिली। दिन में जहां सारंडा में सक्रिय रहे 24 नक्सलियों ने जहां पुलिस के सामने सरेंडर किया, वहीं देर रात भाकपा माओवादियों के पोलित ब्यूरो सदस्य और 2.20 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार कर लिया। मिसिर बेसरा के साथ उसके दो सहयोगी मेहनत उर्फ मोछू और गौरव भी दबोचे गए। ये गिरफ्तारी धनबाद और गिरिडीह की सीमा पर स्थित मनियाडीह इलाके से हुई। मिसिर समेत अन्य माओवादियों को धनबाद-गिरिडीह सीमा पर एक टाटा मैजिक गाड़ी से पकड़ा गया। इसके अलावा दो अन्य को हिरासत में भी लिया गया।
दरअसल, सुरक्षाबलों को मिसिर बेसरा के अपने दो सहयोगियों के साथ गिरिडीह जाने की सूचना मिली थी। जिसके बाद राज्य पुलिस मुख्यालय ने तीनों को दबोचने के लिए गुप्त योजना बनाई। योजना के तहत देर रात कामयाबी मिली। पीरटांड निवासी मिसिर तकरीबन 40 सालों से माओवादी संगठन में सक्रिय था। धनबाद में कॉलेज में पढ़ाई के दिनों में महाजनी आंदोलन के जरिए वो नक्सली संगठन से जुड़ गया था।
बेसरा पर आईबी लगातार रख रही थी नजर
बताया जाता है कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी लगातार बेसरा पर नजर रख रही थी। आईबी की सूचना पर ही मंगलवार को राज्य पुलिस मुख्यालय, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर ने संयुक्त रणनीति बनाई।
मिसिर बेसरा कई माह से सुरक्षा बलों को चकमा दे रहा था। मई में झारखंड पुलिस के सामने बेसरा दस्ते के 27 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। मंगलवार को भी 24 नक्सलियों ने सरेंडर किया। सरेंडर करने वाले माओवादियों से भी सुरक्षाबलों को मिसिर बेसरा के गतिविधियों की जानकारी मिली थी।
2007 में गिरफ्तारी, 2009 में लखीसराय कोर्ट से फरार
मिसिर बेसरा पहली बार सितंबर 2007 में खूंटी से गिरफ्तार हुआ था, पर 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट में हमला कर माओवादियों ने छुड़ा लिया था। तब से बूढ़ा पहाड़, कोल्हान और सारंडा में रहा। 150 से अधिक केस हैं दर्ज बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में 150 से अधिक केस हैं। दो केस में एनआईए को भी तलाश थी। झारखंड में बेसरा पर एक करोड़, जबकि ओडिशा मे 1.20 करोड़ का इनाम घोषित है।
- पहली गिरफ्तारी: सितंबर 2007 में खूंटी जिले से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।
- कोर्ट परिसर से फरार: 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर नक्सलियों ने हमला करके उसे छुड़ा लिया था।
- बेसरा के ठिकाने: फरारी के बाद से वो बूढ़ा पहाड़, कोल्हान और सारंडा के जंगलों में छिपकर गतिविधियां चला रहा था।
- दर्ज मामले: झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में उस पर 150 से ज्यादा केस दर्ज हैं, जिनमें दो मामलों में एनआईए को भी उसकी तलाश थी।
- इनाम की राशि: उस पर झारखंड सरकार ने 1 करोड़ और ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था।
एक मात्र पोलित ब्यूरो सदस्य बचा था मिसिर
भाकपा माओवादियों का संगठन अब पूरी तरह खत्म हो गया है। देशभर में मिसिर बेसरा एक मात्र पोलित ब्यूरो सदस्य था। 22 फरवरी 2026 को पोलित ब्यूरो सदस्य और भाकपा माओवादियों के प्रमुख देव ने सरेंडर कर दिया था। वहीं इससे पूर्व नंबला केशव राजू उर्फ बसवा राजू को सुरक्षा बलों ने 21 मई 2025 को मार गिराया था। माओवादियों का सचिव रहा गणपति बीते आठ सालों से ट्रेसलेस है, खराब स्वास्थ्य के कारण कई बार उसकी मौत की अटकलें लगती रही हैं।








