जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन BJP ने 146 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की. 31 अगस्त 2026 को जारी हुई लिस्ट ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी, क्योंकि पार्टी ने 8 मुस्लिम चेहरों को टिकट दिया है. ये कोई मामूली बात नहीं है. 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP ने राजस्थान में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा था. अब BJP ने न सिर्फ 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है, बल्कि 52 महिलाओं को भी मौका मिला है. आखिर BJP ने ये बड़ा बदलाव क्यों किया और इसके पीछे क्या राजनीतिक गणित है...
राजस्थान निकाय चुनाव उम्मीदवार सूची का क्या है पूरा मामला?
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 9 और 11 सितंबर 2026 को मतदान होगा. नतीजे 14 सितंबर को आएंगे और उसके एक हफ्ते बाद मेयर का चुनाव होगा. इसमें BJP ने जिन 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है, उनमें ये नाम शामिल हैं:
| वार्ड | उम्मीदवार |
| 19 | शहनवाज अंसारी |
| 109 | जाकिर खान कायमखानी |
| 113 | फरीदुद्दीन जैकी |
| 117 | शब्बो जहां |
| 128 | माजिद पठान |
| 136 | मिजाना मिर्जा |
| 137 | रईस मंसूरी |
| 146 | अफसाना |
इनमें शब्बो जहां वही उम्मीदवार हैं, जिन्हें 2020 में भी टिकट मिला था, लेकिन वो हार गई थीं. इस बार उन्हें फिर से मौका दिया गया है.
BJP ने 146 में से 52 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है. यानी करीब 35 फीसदी टिकट महिलाओं के पास गए हैं. इसमें कांग्रेस छोड़कर BJP में आई पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल भी शामिल हैं, जिन्हें वार्ड 110 से टिकट मिला है.
सिर्फ जयपुर ही नहीं, कोटा में भी BJP ने 100 उम्मीदवारों की लिस्ट में 5 मुस्लिम चेहरों को टिकट दिया है. कोटा में मुस्लिम उम्मीदवारों में मोहम्मद निजाम (वार्ड 6), मुस्तकीम (वार्ड 45), यूसुफ कक्कड़ (वार्ड 48), अदा खान भाटी (वार्ड 60) और अमरीन अंसारी (वार्ड 82) शामिल हैं.
2023-24 में कोई मुस्लिम नहीं था, लेकिन अब 8 क्यों?
2023 के विधानसभा चुनाव में BJP ने राजस्थान की 182 में से किसी भी सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा था. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यही रणनीति जारी रही. यहां तक कि पूर्व कैबिनेट मंत्री यूनुस खान को भी टिकट नहीं मिला था. यूनुस 2013 में BJP के टिकट पर चुने गए थे और पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे थे.
अब रणनीति बदलने की 3 बड़ी वजहें सामने आती हैं:
- मुस्लिम बहुल वार्डों में सेंध: जयपुर में कई ऐसे वार्ड हैं, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी है. BJP की कोशिश है कि वो कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाए. पार्टी का मानना है कि मुस्लिम वोटर विकास के मुद्दे पर वोट करेंगे, न कि सिर्फ पारंपरिक पहचान के आधार पर.
- 'सबका साथ' का संदेश: BJP के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने साफ कहा, 'बीजेपी सभी वर्गों और विचारों को साथ लेकर आगे बढ़ने वाली पार्टी है.' यानी पार्टी अपनी 'अल्पसंख्यक विरोधी' छवि को बदलने की कोशिश कर रही है.
- 2027 के विधानसभा चुनाव का संकेत: ये निकाय चुनाव 2027 के राजस्थान विधानसभा चुनाव का एक तरह का रिहर्सल माना जा रहा है. अगर ये मुस्लिम उम्मीदवार जीतते हैं या अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो BJP 2027 में बड़े पैमाने पर मुस्लिम उम्मीदवारों को उतार सकती है.
मुस्लिम उम्मीदवार खुद क्या कह रहे हैं?
BJP की मुस्लिम महिला उम्मीदवार शब्बो जहां कहती हैं, 'मुस्लिमों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई दिक्कत नहीं है.' वो कहती हैं कि उनका मुख्य मुद्दा वार्ड का बुनियादी ढांचा होगा. वहीं, माजिद पठान ने भी यही बात दोहराई, 'मुस्लिम उस पार्टी को वोट क्यों नहीं देंगे, जिसने उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना जैसी योजनाएं दी हैं?'
टिकट बंटवारे की अनोखी प्रक्रिया का मकसद क्या?
इस बार BJP और कांग्रेस दोनों ने टिकट बंटवारे का अनोखा तरीका अपनाया. किसी ने भी औपचारिक लिस्ट तब तक जारी नहीं की, जब तक कि 31 अगस्त नामांकन का आखिरी दिन नहीं आ गया. इसके बजाय, चुने गए उम्मीदवारों को फोन पर सूचित किया गया और नामांकन केंद्रों पर पहुंचने को कहा गया.
पार्टी नेताओं का कहना है कि इसका मकसद आंतरिक विवादों को रोकना और नाराज उम्मीदवारों को निर्दलीय चुनाव लड़ने से हतोत्साहित करना था. हालांकि, फिर भी विवाद नहीं रुके.
वार्ड 76 में तो हालात और भी बिगड़ गए. यहां पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट (जिन्हें RSS का समर्थन था) और कुलदीप मिश्रा (जो पूर्व CM वसुंधरा राजे के करीबी विधायक कालीचरण सराफ के समर्थक थे) के बीच टिकट की जंग छिड़ गई.
BJP ने आधिकारिक तौर पर कर्णावट को टिकट दिया, लेकिन सराफ ने मिश्रा को पार्टी का चुनाव चिह्न दे दिया. दोनों ने नामांकन दाखिल कर दिए. आखिरकार CM भजनलाल शर्मा को हस्तक्षेप करना पड़ा और चिह्न कर्णावट को आवंटित किया गया. हालांकि, मिश्रा ने अभी तक अपना नामांकन वापस नहीं लिया है.
क्या है इसका बड़ा सियासी मतलब?
एक्सपर्ट्स टिकट बंटवारे के 5 बड़े मायने निकाल रहे हैं:
- अल्पसंख्यक विरोधी छवि: BJP को लंबे समय से अल्पसंख्यक विरोधी पार्टी के रूप में देखा जाता रहा है. 2023-24 में शून्य मुस्लिम उम्मीदवार इस धारणा को और मजबूत करते थे. अब 8 मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर BJP ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वो 'सबका साथ' में यकीन करती है.
- सिर्फ चुनावी दांव: BJP के प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा, 'उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने से पहले मतदाताओं की संरचना पर विचार किया गया.' यानी, मुस्लिम बहुल वार्डों में मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर BJP कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है.
- महिलाओं को बड़ा मौका: 52 महिला उम्मीदवार BJP की 'महिला सशक्तिकरण' की बयानबाजी को हकीकत में बदलने की कोशिश है. 2027 के चुनावों से पहले महिला वोटर्स को लुभाने की ये एक साफ कोशिश है.
- विधानसभा चुनाव: ये निकाय चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव का एक तरह का टेस्टिंग ग्राउंड है. अगर ये मुस्लिम और महिला उम्मीदवार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो BJP 2027 में बड़े पैमाने पर इन समुदायों को टिकट दे सकती है.
- अंदरकलह की जंग: वार्ड 76 का विवाद दिखाता है कि RSS और वसुंधरा राजे गुट के बीच आंतरिक खींचतान जारी है. CM भजनलाल शर्मा का दखल दिखाता है कि पार्टी के भीतर मतभेद कितने गहरे हैं.
जयपुर नगर निगम चुनाव भले ही स्थानीय निकाय का चुनाव है , लेकिन BJP के टिकट वितरण ने इसके राजनीतिक मायने बढ़ा दिए हैं.








