अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. अमेरिका ने रविवार को ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यहां मौजूद ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि ईरान इनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए कर सकता था.
अमेरिका का दावा है कि ईरान की इस गतिविधि का मकसद होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करना था. हालांकि, कुछ सैन्य विशेषज्ञों को अमेरिका का यह दावा पूरी तरह भरोसेमंद नहीं लगता. उनका कहना है कि रॉकेट से समुद्री खदानें बिछाना सामान्य तरीका नहीं है. अमेरिका लगता ईरान के खात्मे का दावा कर रहा है. अमेरिका कहना है कि ईरान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. वहीं अब अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिए हैं.
अमेरिका को किस बात का डर था?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है. ऐसे में अगर इस इलाके में बड़ी संख्या में समुद्री खदानें बिछा दी जाएं, तो जहाजों की आवाजाही बेहद मुश्किल हो सकती है. अमेरिकी सेना के मुताबिक, उसे जानकारी मिली थी कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) समुद्री खदानों को रॉकेट के जरिए लॉन्च करने की तैयारी कर रही थी. इसी खतरे को रोकने के लिए अमेरिका ने लारक द्वीप पर मौजूद रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया.
क्या ईरान पहले भी ऐसा कर चुका है?
यही बात अमेरिका के दावे को कुछ हद तक दिलचस्प बनाती है. ईरान ने जनवरी 2025 में एक सैन्य अभ्यास के दौरान ऐसी तकनीक का प्रदर्शन किया था, जिसमें ऐसा दिखाई दिया कि फजर-5 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम की मदद से समुद्र में बारूदी सुरंगें बिखेरी जा रही हैं. फजर-5 मूल रूप से जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर रॉकेट हमला करने के लिए बनाया गया है. लेकिन ईरान ने इसे अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करने की कोशिश की. यही ईरान की सैन्य रणनीति की खासियत मानी जाती है, वह हमेशा महंगे और पारंपरिक हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय मौजूदा हथियारों को नए तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश करता है.
रॉकेट से खदानें कैसे बिछाई जा सकती हैं?
सैद्धांतिक रूप से रॉकेट के अंदर पारंपरिक विस्फोटक वारहेड की जगह छोटी समुद्री खदानें रखी जा सकती हैं. रॉकेट तय इलाके तक पहुंचने के बाद इन खदानों को हवा में छोड़ सकता है. खदानों की गिरने की गति कम करने के लिए पैराशूट या दूसरी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बाद ये खदानें समुद्र में गिरकर पानी के अंदर अपनी जगह बना सकती हैं. इस तरह एक रॉकेट के जरिए एक साथ बड़ी संख्या में खदानें फैलाने की कोशिश की जा सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यह तरीका आसान या पूरी तरह साबित तकनीक है. अमेरिकी नौसेना के कुछ पूर्व अधिकारियों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि तेज गति से पानी में गिरने वाला रॉकेट खदानों को नुकसान पहुंचा सकता है.
ईरान के लिए होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा कारोबार के लिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है. अगर यहां समुद्री खदानें बिछाई जाती हैं, तो उनका असर सिर्फ सैन्य जहाजों पर नहीं बल्कि तेल टैंकरों और दूसरे व्यापारिक जहाजों पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि अमेरिका के लिए इस इलाके में किसी भी तरह की माइनिंग गतिविधि गंभीर खतरा मानी जा रही है.
समुद्री खदानों को हटाना भी आसान नहीं
समुद्र में खदानें बिछाने के बाद उन्हें हटाना काफी मुश्किल और धीमा काम होता है. अमेरिकी नौसेना इसके लिए विशेष माइन-काउंटरमेजर जहाजों और दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल करती है. पहले खदान का पता लगाया जाता है और फिर उसे नियंत्रित तरीके से नष्ट किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है. इस दौरान जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है. यानी ईरान के लिए समुद्री खदानों का इस्तेमाल केवल हमला करने का तरीका नहीं, बल्कि समुद्री रास्ते को लंबे समय तक बाधित करने की रणनीति भी हो सकती है.
क्या अमेरिका खुद भी हवाई या दूर से खदानें बिछा सकता है?
हां, अमेरिका के पास भी समुद्र में दूर से खदानें तैनात करने की क्षमता है. अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ऐसे हथियारों का इस्तेमाल कर सकती हैं जिन्हें विमान से समुद्र में गिराया जाता है. इनमें गाइडेंस सिस्टम भी लगाए जा सकते हैं, जिससे उन्हें ज्यादा सटीक तरीके से निर्धारित इलाके में पहुंचाया जा सके. यानी समुद्री माइनिंग सिर्फ ईरान की रणनीति नहीं है. आधुनिक युद्ध में कई देश दूर से समुद्री खदानें तैनात करने की तकनीक विकसित कर रहे हैं.
असली चिंता क्या है?
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान पारंपरिक हथियारों को अलग तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश करता रहा है. फजर-5 जैसे रॉकेट मूल रूप से समुद्री खदानें बिछाने के लिए नहीं बनाए गए थे. लेकिन अगर इन्हें इस काम के लिए बदला जाता है, तो ईरान कम लागत में समुद्र के बड़े इलाके को खतरे में डालने की कोशिश कर सकता है. यही वजह है कि अमेरिका ने लारक द्वीप पर मौजूद रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया.
हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि ईरान वास्तव में मौजूदा तनाव के दौरान रॉकेटों से समुद्री खदानें बिछा रहा था या नहीं. अमेरिका के दावे और सैन्य विशेषज्ञों की राय में इस मुद्दे पर मतभेद हैं. लेकिन इतना जरूर है कि होर्मुज में समुद्री खदानों का खतरा अमेरिका के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि यहां छोटी-सी रुकावट भी वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार पर बड़ा असर डाल सकती है.








