असम के दीमा हसाओ जिले के उमरंगसो में 300 फीट गहरी कोयला खदान में सोमवार को अचानक पानी भर गया था, जिससे 15 मजदूर अंदर फंस गए। अब इन मजदूरों के रेस्क्यू में सेना को लगाया गया है। NDRF और SDRF की टीम भी मदद कर रही है। असम के माइनिंग मिनिस्टर कौशिक राय घटनास्थल पर मौजूद हैं।
भारतीय सेना ने असम के दीमा हसाओ जिले के उमरांगशु इलाके में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए एक रिलीफ टास्क फोर्स की तैनाती की है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने फंसे हुए मजदूरों को बचाने के लिए सेना से सहायता मांगी थी. एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, ” भारतीय सेना ने असम के दीमा हसाओ जिले के सुदूर औद्योगिक शहर उमरंगशु में फंसे खनिकों को बचाने के लिए एक राहत कार्य बल तैनात किया है.”

टास्क फोर्स गोताखोरों, सैपर्स और अन्य आवश्यक चीजों से लैस है. अधिकारी ने कहा, “राहत टास्क फोर्स में गोताखोरों, सैपर्स और अन्य संबंधित कर्मियों जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनके पास आवश्यक उपकरण हैं. भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी फंसे हुए माइनर्स को जल्दी से जल्दी बचाने के लिए नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय करने के लिए घटनास्थल पर पहुंचेंगे.”
फंसे मजदूरों में एक नेपाली नागरिक

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि उमरंगशु इलाके में कोयला खदान में फंसे नौ मजदूरों की पहचान कर ली गई है. राज्य प्रशासन और पुलिस ने खदान में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए अभियान शुरू कर दिया है. पुलिस के अनुसार, कोयला खदान में फंसे नौ मजदूरों में से एक नेपाल का नागरिक है, एक पश्चिम बंगाल का है और बाकी असम के अलग-अलग इलाकों से हैं. इनकी पहचान गंगा बहादुर श्रेठ, हुसैन अली, जाकिर हुसैन, सर्पा बर्मन, मुस्तफा शेख, खुशी मोहन राय, संजीत सरकार, लिजान मगर और शरत गोयरी के रूप में हुई है.
रेस्क्यू ऑपरेशन की 3 तस्वीरें…



प्रत्यक्षदर्शी बोले- अचानक पानी आया, निकलने का मौका नहीं मिला
दीमा हसाओ जिले के एसपी मयंक झा ने बताया कि खदान में कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के मुताबिक अचानक पानी आया, जिसके कारण मजदूर खदान से बाहर नहीं निकल पाए। इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम, लोकल अधिकारियों और माइनिंग एक्सपर्ट की टीमों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। खदान में फंसे मजदूरों का पता लगाया जा रहा है।
रैट होल माइनिंग क्या है?
रैट का मतलब है चूहा, होल का मतलब है छेद और माइनिंग मतलब खुदाई। साफ है कि छेद में घुसकर चूहे की तरह खुदाई करना। इसमें पतले से छेद से पहाड़ के किनारे से खुदाई शुरू की जाती है और पोल बनाकर धीरे-धीरे छोटी हैंड ड्रिलिंग मशीन से ड्रिल किया जाता है। हाथ से ही मलबे को बाहर निकाला जाता है।
रैट होल माइनिंग नाम की प्रोसेस का इस्तेमाल आम तौर पर कोयले की माइनिंग में होता रहा है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर पूर्व में रैट होल माइनिंग होती है, लेकिन रैट होल माइनिंग काफी खतरनाक काम है, इसलिए इसे कई बार बैन भी किया जा चुका है।
रैट माइनिंग पर 2014 में NGT ने लगाया था बैन
रैट माइनिंग कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों ने ईजाद की थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, यानी NGT ने 2014 में इस पर बैन लगा दिया था। एक्सपर्ट्स ने इसे अवैज्ञानिक तरीका बताया था। हालांकि विशेष परिस्थितियों, यानी रेस्क्यू ऑपरेशन में रैट माइनिंग पर प्रतिबंध नहीं है।








