बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला आतंक नहीं संदेश है……..

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 11 मार्च को जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर पाकिस्तान को एक संदेश दिया है। इसे महज एक आतंकवादी हमला समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए। इसने बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सेना के कंट्रोल के दावे को तोड़ दिया है। इसने पाकिस्तानी सेना के छद्म जाल को तोड़ डाला है। बीएलए […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 18 मार्च 2025, 06:29 AM 8 मिनट read
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बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला आतंक नहीं संदेश है……..
Photo: UB India News Archive

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 11 मार्च को जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर पाकिस्तान को एक संदेश दिया है। इसे महज एक आतंकवादी हमला समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए। इसने बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सेना के कंट्रोल के दावे को तोड़ दिया है। इसने पाकिस्तानी सेना के छद्म जाल को तोड़ डाला है। बीएलए को पहले कमजोर कमजोर समझा जाता था। लेकिन अब उसने दावा किया है कि उसने एक ऑपरेशन में 214 से ज्यादा बंधकों को मार डाला। इससे पाकिस्तान और उसकी सेना को बहुत शर्मिंदगी हुई है। मामला यहीं नहीं रुका। इसके ठीक चार दिन बाद, BLA के विद्रोहियों ने नोशकी में एक और आत्मघाती हमला किया। जिसमें उसने 90 पाकिस्तानी सेना के जवानों को मारने का दावा किया। पाकिस्तान सरकार इस संख्या को कम बता रही है।

बलूचों का ये विद्रोह एक संकेत है कि बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई को और उसके इंसाफ की मांग को अब दबाकर नहीं रखा जा सकता है। BLA अब एक ऐसी ताकत बन गई है, जिसकी मांग को आतंकवादी हमला बताकर खारिज नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तान ने 1948 में बलूचिस्तान पर जबरदस्ती कब्जा किया और उसके बाद से बलूचिस्तान, पाकिस्तान के लिए नासूर बना हुआ है। 1948-50, 1958-60, 1962-63, 1973-77 में यहां विद्रोह की आग लगी और सबसे ताजा विद्रोह 2000 के बाद शुरू हुआ, जिसमें पूरा पाकिस्तान जल रहा है। पाकिस्तान की सेना जितनी ताकत से बलूचों के विद्रोह को कुचलती है, उनका प्रतिरोध उससे भी ज्यादा खतरनाक होता है।

बलूचों के विद्रोह को अब दबाना नामुमकिन
पाकिस्तान हमेशा भारत पर आरोप लगाता है। लेकिन उसके पास कोई सबूत नहीं है। ऐसा करके वो सिर्फ असल समस्य से ध्यान भटकाने की कोशिश करता है। दरअसल असली समस्या पाकिस्तान की क्रूर नीतियां हैं। जाफर एक्सप्रेस में हुए हमले में कितने लोगों की मौत हुई है इसको लेकर पाकिस्तान झूठ बोल रहा है। BLA का कहना है कि 214 बंधकों को मार दिया गया। पाकिस्तानी सेना के दावों पर सबूत भारी पड़ रहे हैं।

  1. पाकिस्तानी सेना ने 33 विद्रोहियों के मारे जाने की बात कही है, लेकिन क्या कोई सोच सकता है कि सिर्फ 33 विद्रोही 9 डिब्बों वाली ट्रेन को हाईजैक कर लें? जबकि उस ट्रेन में पाकिस्तानी सेना के ही 200 से ज्यादा जवान थे। तो क्या 33 विद्रोहियों के लिए 40 घंटे तक ट्रेन को हाईजैक रखना संभव था? ऐसा सिर्फ फिल्मों में या किसी चमत्कार की कहानियों में ही संभव है।
  2. ताबूत झूठ नहीं बोलते:बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने 100 से ज्यादा ताबूतों को हमले वाली जगह जाते हुए देखा। बीबीसी ने इसका वीडियो भी दिखाया है जो एक ठोस सबूत है। दूसरे सोशल मीडिया चैनलों ने भी ऐसा ही दावा किया है। लिहाजा हमें किस पर विश्वास करना चाहिए?
  3. चश्मदीदों ने क्या बताया:ट्रेन से जिन लोगों को छोड़ दिया गया या जो लोग बच गये, उन्होंने बताया कि उन्होंने 130-140 लाशें देखीं हैं। उनकी बातें सोशल मीडिया पर फैल गईं। वे पाकिस्तान की सेना के दावों को गलत साबित कर रही हैं। उनके बयान सच्चे थे और उन्हें चुप कराना मुश्किल है।
  4. सेना की ताकत या फिल्मी कहानी?:एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह नामुमकिन है कि सिर्फ कुछ विद्रोही एक ट्रेन को अगवा कर लें। वे इसे एक दूर जगह पर ले जाएं, जहां सुरंगें हों जिनके बारे में उन्हें पता हो। वे 24 घंटे से ज्यादा समय तक ट्रेन को हाईजैक रखें। वे बंधकों को ढाल की तरह इस्तेमाल करें। उनके पास आत्मघाती हमलावर भी हों। फिर भी वे कुछ न कर पाएं और पाकिस्तानी सेना आसानी से उनके ऑपरेशन को फेल कर दे। ऐसा सिर्फ फिल्मों में ही संभव है।

लिहाजा सबूत सिर्फ ये बताते हैं कि पाकिस्तान की सेना, जो हमेशा अपने नुकसान को छिपाती है, जो कारगिल में अपने सैनिकों के शवों को छोड़कर भाग जाती है, उसने इस बार भी मौतों के असली आंकड़े को छिपाया है। कारगिल में पाकिस्तान के 2000 से ज्यादा सैनिक मारे गए। लेकिन पाकिस्तान ने 12 साल तक इस बात को छिपाए रखा। सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों को भारत ने अपने हिस्से में दफनाया।

इसके अलावा 5 मार्च 2025 को भी बन्नू में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने दावा किया कि उसने चार आत्मघाती हमलावर भेजे थे। उन्होंने उनके नाम भी बताए। लेकिन पाकिस्तानी सेना ने कहा कि उसने 16 विद्रोही मारे हैं। ऐसा करके उसने अपने 13 सैनिकों की मौत को छिपा लिया। पाकिस्तान की सेना हमेशा मरने वालों की संख्या को बदलकर बताती है। वे या तो दुश्मन की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं या अपनी मौत को कम करके दिखाते हैं। ये पाकिस्तान की सेना शर्मिंदगी से बचने के लिए करती है। जाफर एक्सप्रेस की संख्या भी इसी चाल का हिस्सा है। दुनिया को सच्चाई जाननी चाहिए। लेकिन पाकिस्तान कभी भी सच्चाई नहीं बताएगा।

बलूचिस्तान अब पाकिस्तान के हाथ से बाहर!
बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। यह खनिज संपदाओं से भरा हुआ क्षेत्र है। इससे पूरे देश को फायदा हो सकता है। लेकिन 70 सालों से पाकिस्तान ने सिर्फ और सिर्फ बलूचिस्तान को लूटा है। बलूचिस्तान में ना अच्छी सड़कें हैं ना अस्पताल हैं और ना ही अच्छे स्कूल हैं। पाकिस्तान ने 2006 में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या कर यह संदेश देने की कोशिश की कि विरोधियों के मुकद्दर में मौत लिखी है। चीन के साथ मिलकर फिर पाकिस्तान ने ढोल नगाड़ों के साथ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की शुरूआत की, जिसे बलूचों ने सिरे से खारिज कर दिया। चीन ने CPEC में 50 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर दिए।

पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के 30 हजार से ज्यादा लोगों को जबरदस्ती गायब कर दिया गया, जिनमें छात्र, विचारक, बुजुर्ग शामिल हैं। पिछले 10 सालों में पाकिस्तानी सेना ने आधिकारिक तौर पर 1800 बलूचों का खून कर दिया। असली आंकड़ें कहीं ज्यादा भयावह हैं। ये एक नरसंहार है। बलूचिस्तान इसलिए जल रहा है क्योंकि पाकिस्तान की नीति लूटने की रही है। जैसा उसने बांग्लादेश में किया था। लिहाजा BLA की ताकत को आतंकवाद मानने की भूल नहीं की जानी चाहिए। आप उनके दर्द को अनदेखा नहीं कर सकते हैं। उनके गुस्से को आप कम करके नहीं आंक सकते हैं, क्योंकि अगर आप ऐसा करेंगे तो गुस्से की आग ज्वालामुखी बनेगी और पूरे पाकिस्तान को जला देगी।

पाकिस्तान ने कैसे खुद लगाई है ये आग?
पाकिस्तानी सैनिकों ने बांग्लादेश में भी महिलाओं से बलात्कार किया था, हजारों बंगालियों को मौत के घाट उतार दिया था और पाकिस्तान बलूचिस्तान में भी यही कर रहा है। लेकिन अब बलूचों को काबू में करना संभव नहीं है। पाकिस्तान ने इस आतंकवाद के राक्षस को खुद जन्म दिया है। खैबर पख्तूनख्वा में TTP तबाही मचा रहा है और BLA बलूचिस्तान को जला रहा है। पाकिस्तान एक वक्त दुनियाभर में आतंकवादियों की सप्लाई करता था। उसने अल-कायदा को मदद दी, उसने ISIS जैसे आतंकवादी संगठनों के निर्माण में जी-तोड़ मेहनत की। लेकिन अब वो खुद इसकी आग में जल रहा है। पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को अपने ही हाथों बर्बाद कर चुका है और अगर उसने एक बार और भारत से लड़ने की जुर्रत की तो वो फिर से टूट जाएगा।

पाकिस्तान कितना अभागा है ये समझिए। इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (ISKP), उसके जरिए ISI भारत में अशांति फैलाना चाहता है। यानि वो अभी भी सुधरने के लिए तैयार नहीं है। लिहाजा अब पूरी दुनिया को सख्ती के साथ पाकिस्तान को रोकना चाहिए। क्योंकि पाकिस्तान वो सांप बन चुका है जो मरकर भी अपने जहर से दूसरों को मार सकता है। पाकिस्तान के खिलाफ अब कार्रवाई करना अत्यंत जरूरी है, नहीं तो इसके नतीजे पूरी दुनिया के लिए खतरनाक होंगे। जाफर एक्सप्रेस पर हमला और नोशकी में बम धमाके सिर्फ मामूली घटनाएं नहीं हैं, बल्कि वे पाकिस्तान के विनाश की चेतावनी हैं। इमरान खान के समर्थक पहले से ही फटने के इंतजार में हैं। लोगों में अपनी गरीबी और बेकारी को लेकर पहले से ही गुस्सा है। लिहाजा पाकिस्तान एक ज्वालामुखी पर बैठा है और BLA और TTP गुस्से से भरी जनता को और भड़ता रहे हैं। लिहाजा अगर पाकिस्तान को रोका नहीं गया, तो वो खुद को खाक होगा ही, इसके साथ ही वो पूरे क्षेत्र को खतरे में डाल देगा।

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