पाकिस्तानी सेना ने पवित्र स्वर्ण मंदिर पर हमले की साजिश रची थी। पाकिस्तानी वायु सेना ने स्वर्ण मंदिर को टारगेट करके मिसाइल्स दागीं थीं और ड्रोन भेजे थे। इसके पीछे एक खतरनाक इरादा था, साजिश थी। स्वर्ण मंदिर को नुकसान पहुंचे और इसके बाद पाकिस्तान ये इल्जाम लगाए कि भारतीय फौज की मिसाइल्स ही स्वर्ण मंदिर पर गिरी। पाकिस्तान की ये नापाक कोशिश पूरी शिद्दत के साथ की गई। उसी रात पाकिस्तानी फौज के प्रवक्ता ने बयान दिया कि भारतीय सेना की 5 मिसाइल्स अमृतसर में गिरी हैं। इसके बाद पाकिस्तान की फौज ने उसी वक्त ये भी झूठा दावा किया कि भारतीय सेना ने गुरुद्वारा ननकाना साहिब पर मिसाइल्स से हमला किया है। लेकिन भारतीय फौज मुस्तैद थी। पाकिस्तान की कोई चाल कामयाब नहीं हो पाई क्योंकि न तो हमारी सेना ने ननकाना साहिब पर हमला किया था और न ही पाकिस्तान की एक भी मिसाइल को स्वर्ण मंदिर तक पहुंचने दिया। हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने अमृतसर की तरफ दागी गई हर मिसाइल को रास्ते में ही मार गिराया, दरबार साहब की रक्षा की।
एक बड़ी अच्छी बात ये हुई कि स्वर्ण मंदिर के मुख्य ग्रंथी ने हमें अपनी एंटी एयरक्राफ्ट गन्स को मंदिर परिसर के भीतर तैनात करने की इजाज़त दे दी। और शायद ये बहुत-बहुत सालों के बाद हुआ होगा कि स्वर्ण मंदिर की लाइटें स्विच ऑफ़ कर दीं गई, ताकि हम आते हुए ड्रोन्स को देख सकें। सेना की 15वीं इन्फैंट्री डिवीज़न के जनरल ऑफ़िसर कमांडिंग, मेजर जनरल कार्तिक सी. शेषाद्रि ने इस बात की पुष्टि की। सिखों को भड़काने की इस साजिश में पाकिस्तान ने खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू का इस्तेमाल किय़ा। पन्नू ने कुल चार वीडियो बनाकर सोशल मीडियो पर पोस्ट किए। उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय फौज के हमले में मारे गए पाकिस्तानी आतंकवादियों को 35-35 लाख रुपये की मदद देने का एलान किया। इसके बाद कहा कि अब पंजाब के सिख पाकिस्तानी फौज के साथ मिलकर भारत की फौज से लड़ेंगे और पंजाब को भारत से अलग करवा कर अलग देश बनाएंगे। पन्नू ने भी सिखों को भड़काने के लिए बार-बार इसी झूठ का सहारा लिया कि भारत की फौज ने ननकाना साहिब पर मिसाइल से हमला किया।
रिटायर्ड एयर कमोडोर AS बहल ने बड़ी बात कही। कमोडोर बहल ने कहा कि 16 अप्रैल को जनरल आसिम मुनीर ने हिंदुओं और मुसलमानों को दो अलग कौन बताया था। इसके बाद पहलगाम में हिन्दुओं की चुन-चुन कर हत्या की गई। इसके बाद स्वर्ण मंदिर पर हमले की कोशिश हुई। ये सब पाकिस्तान की चाल थी,जो हमारी फौज ने नाकाम कर दी। एयर कमोडोर बहल ने कहा कि पाकिस्तान शायद भूल गया है कि उन्नीसवीं सदी में महाराजा रणजीत सिंह ने भारत पर हमला करने वाले लश्करों को ख़ैबर दर्रे तक खदेड़ा थे। उसी तरह, हमारी सेना ने एक बार फिर पाकिस्तान को सबक सिखाया है। हमारे मेजर जनरल कार्तिक शेषाद्रि ने जो बताया, उससे सारी कहानी साफ हो गई। ये जनरल मुनीर की सोची समझी साज़िश थी। पाकिस्तान की वायु सेना स्वर्ण मंदिर पर मिसाइल चलाना चाहती थी, दरबार साहिब को नुकसान पहुंचाना चाहती थी और इसका ठीकरा भारत की सेना पर डालने की साजिश थी। हमारी सेना ने इस पूरी साजिश को नाकाम कर दिया। इस एक हमले से साफ है कि पाकिस्तानी फौज को चलाने वाले कितने मूर्ख हैं। न वो भारत को जानते हैं, न भारत के लोगों को। साजिश भी ऐसी करते हैं, जिनका कोई सिर-पैर नहीं होता।
जब भारत पाकिस्तान के एयरबेस को एक-एक करके तबाह कर रहा था, आतंकवाद के अड्डों को नेस्तनाबूद कर रहा था, पाकिस्तानी फौज और ISI का पूरा फोकस अफवाहें फैलाने में था। उस समय का सोशल मीडिया आप देखेंगे तो गुरपतवंत सिंह पन्नू और ISI के बाकी एजेंट उल्टी-सीधी बातें लिखकर सिखों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उनका दांव उल्टा पड़ा। जिस तरह से पहलगाम में मज़हब पूछकर गोली मारी थी और तब सोचा था कि इससे हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत और बढ़ जाएगी, उसी तरह से सिखों को भड़काने की कोशिश की। हर बार जनरल मुनीर की फौज गलत साबित हुई।








