केंद्रीय जीतन राम मांझी ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा है। मांझी ने राहुल गांधी के संविधान सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने पर सवाल उठाए। साथ ही, तेजस्वी यादव को राजद की कमान मिलने पर भी अपनी राय रखी। जीतन राम मांझी ने राहुल गांधी के संविधान सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘उनको संविधान सुरक्षा के संबंध में बोलने का कोई हक नहीं है।’ मांझी ने आगे कहा, ‘संविधान के बारे में उनका क्या मालूम है?’ मांझी ने कहा कि जो संविधान के महत्व को नहीं बता सकता, वह संविधान दिवस नहीं मना सकता।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव पर तीखे प्रहार किए हैं। जीतनराम मांझी ने राहुल गांधी के संविधान सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने पर सवाल उठाते हुए उनकी भूमिका और समझदारी पर गंभीर टिप्पणी की। साथ ही, तेजस्वी यादव को राजद की कमान सौंपे जाने पर भी उन्होंने अपनी राय स्पष्ट करते हुए महागठबंधन में दरार पड़ने की ओर इशारा किया। साथ ही बिहार चुनाव 2025 में महागठबंधन की हार की भविष्यवाणी की।
तेजस्वी यादव ने भारतीय संंस्कृति को नजरअंदाज किया: मांझी
राजद नेता तेजस्वी यादव को पार्टी की कमान सौंपे जाने पर मांझी ने इसे भारतीय संस्कृति के विपरीत बताया। उन्होंने कहा, ‘भारतीय संस्कृति में पिता और पुत्र के संबंधों का महत्व है, जिसे तेजस्वी यादव ने नजरअंदाज कर दिया है।’ उन्होंने कहा कि पिता के साथ पुत्र का क्या सलूक होना चाहिए? यह हमारी भारतीय संस्कृति में है। उस संस्कृति को भूलाकर तेजस्वी ने जो किया है, हम समझते हैं कि तेजस्वी का यह कदम बिहार की जनता के सामने उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
महागठबंधन में पड़ गई दरार: मांझी
राहुल गांधी के ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार बनाने के दावे पर मांझी ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘वह सरकार कैसे बनाएंगे?’ उन्होंने नीतीश कुमार द्वारा कराए गए जाति सर्वेक्षण और आरक्षण के मुद्दे का जिक्र किया और कहा कि पहले तेजस्वी यादव और कांग्रेस इसकी तारीफ कर रहे थे, लेकिन अब राहुल गांधी इसे गलत ठहरा रहे हैं। मांझी ने कहा कि महागठबंधन में अंदरूनी मतभेद हो गया है। महागठबंधन में दरार पड़ गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव में महागठबंधन का प्रदर्शन निराशाजनक रहेगा।
हम NDA के साथी हैं: मांझी
दिल्ली चुनाव में अपनी पार्टी को सीट न मिलने पर मांझी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी NDA के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘हम NDA के साथी हैं और जहां भी आवश्यकता होगी, हम अपने सहयोगियों का समर्थन करेंगे।’ मांझी ने खुद को एक अनुशासित दल का नेता बताते हुए NDA के सभी फैसलों के साथ खड़े रहने की बात कही।








