बिहार विधानमंडल में 20-21 जनवरी को अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस बार बिहार को दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी मिली है। 43 वर्षों बाद पटना में यह आयोजन होने जा रहा है। कार्यक्रम विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में होगा। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे। कार्यक्रम में अध्यक्ष के रूप में भाषण लोकसभा स्पीकर ओम बिरला देंगे। बता दें कि यह सम्मेलन 1982 के बाद बिहार में हो रहा है। तब कांग्रेस के राधा नंदन झा विधानसभा अध्यक्ष थे। इस सम्मेलन में पूरे देश के पीठासीन पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा 28 राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष, 6 विधानसभा परिषद के सभापति और केंद्र शासित प्रदेशों के स्पीकर समेत करीब 300 अतिथि शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश भी मौजूद रहेंगे।
इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, बिहार सरकार के संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव, बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव; राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारी, बिहार सरकार के मंत्री, बिहार विधानमंडल के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।
विधानसभा में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के चैंबर में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के बैठने की व्यवस्था की गई है। वहीं, राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश के लिए संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी के चैंबर में व्यवस्था की गई है।
लोकसभा के महासचिव डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के चैंबर में बैठेंगे तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के चैंबर में राज्यसभा के महासचिव के बैठने की व्यवस्था की गई है। सम्मेलन में संसद और विधायिका (चुने हुए प्रतिनिधियों का समूह) की भूमिका पर विस्तार से चर्चा होगी।
पटना के पर्यटन स्थल भी देखेंगे गेस्ट
सम्मेलन में शामिल होने वाले सभी अतिथि 19 जनवरी यानी रविवार की शाम से ही पटना पहुंच चुके हैं। सम्मेलन का समापन सत्र 21 जनवरी को सेंट्रल हॉल में होगा और इसके बाद सभी गेस्ट पटना के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे हरि मंदिर साहिब गुरुद्वारा, बापू टावर, सभ्यता द्वार और बिहार संग्रहालय जाएंगे।
1982 के बाद हो रहा सम्मेलन
अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन, भारत के विधायी निकायों की सर्वोच्च संस्था है। सम्मेलन के आयोजक लोकसभा सचिवालय होते है। पटना में यह सम्मेलन इससे पहले 1982 में हुआ था। तब बिहार विधानसभा के अध्यक्ष कांग्रेस नेता राधानंदन झा थे। अभी देश के 22 राज्यों और 3 केन्द्र शासित प्रदेशों में विधानसभा हैं। जबकि 6 राज्यों में विधानसभा और विधान परिषद दोनों हैं। सम्मेलन में लोकसभा और राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी भी शामिल होते हैं।
संसद और राज्य विधायी निकायों के योगदान पर चर्चा
बिहार में तीसरी बार आयोजित हो रहे दो दिवसीय सम्मेलन का विषय ‘संविधान की 75वीं वर्षगांठ संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में संसद और राज्य विधायी निकायों का योगदान’ है।
21 जनवरी 2025 को समापन सत्र को बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संबोधित करेंगे। समापन सत्र में राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव, बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, बिहार विधान परिषद के उपसभापति प्रो. (डॉ.) रामवचन राय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारी, बिहार सरकार के मंत्री, बिहार विधानमंडल के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।
संसद की कार्यप्रणाली एवं प्रक्रिया के 8 वें संस्करण का करेंगे विमोचन
सम्मेलन के दौरान ओम बिरला ‘संसद की कार्यप्रणाली एवं प्रक्रिया’ के 8वें संस्करण का विमोचन करेंगे। ओम बिरला 21 जनवरी, 2025 को बिहार विधानमंडल परिसर में नेवा सेवा केंद्र का भी उद्घाटन करेंगे।
बिहार में तीसरी बार पीठासीन पदाधिकारियों का सम्मेलन
बिहार में इससे पहले 1982 में पीठासीन पदाधिकारियों का सम्मेलन हुआ था। यह बिहार में तीसरा सम्मेलन होगा। इससे पहले 6 और 7 जनवरी 1964 को पीठासीन अधिकारियों का बिहार में पहली बार सम्मेलन हुआ था। उस समय लक्ष्मण नारायण सुधांशु विधानसभा के अध्यक्ष थे। पीठासीन अधिकारियों के इस सम्मेलन के आयोजन का इतिहास काफी पुराना है। यह पहली दफा यह सन 1921 को शिमला में हुआ था।








