बिहार की 20 घंटे की यात्रा में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह विधानसभा चुनाव-2025 जीतने के लिए राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) का रोड मैप तैयार कर गए। साथ ही यह साफ हो गया कि अब शाह ही बिहार राजग के मिशन-225 की बागडोर संभालेंगे। शनिवार की देर शाम पटना पहुंचने के बाद आधी रात तक भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष नेताओं की नब्ज टटोलना एवं इसके बाद चुनाव तैयारियों को लेकर मंत्रणा के दौरान दो टूक कहना कि 225 सीट बिहार में जीतना राजग का सर्वोपरि लक्ष्य है।
इसे साधने के लिए पार्टी के जनप्रतिनिधियों एवं प्रदेश पदाधिकारियों को सीधे एवं सरल भाषा में समझा दिया कि अब तैयारियां ऐसी होनी चाहिए मानो अगले महीने ही मतदान है और हर प्रत्याशी कमल निशान पर चुनाव लड़ रहा है। यही नहीं, अमित शाह ने शीर्ष रणनीतिकारों को गठबंधन के दलों की भी जीत सुनिश्चित करने का टास्क भी थमाया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सहयोगियों के साथ इस साल के अंत में प्रस्तावित राज्य विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा की। यह बैठक मुख्यमंत्री एवं जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख कुमार के आधिकारिक आवास एक अणे मार्ग पर हुई।
बिहार में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसे देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. बिहार में इस बार का चुनाव भी मुख्य तौर पर दो धड़ों के बीच है. एक तरफ सत्तारूढ़ NDA है तो दूसरी तरफ महागठबंधन. इन दोनों के बीच मुकाबला है. चुनावी तैयारियों को रफ्तार देने के लिए बीजेपी के दिग्गज नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन दिनों बिहार की यात्रा पर हैं. उन्होंने गोपालगंज में रैली को संबोधित करने के बाद पटना में NDA के घटक दलों के टॉप लीडर्स के साथ चुनावी रणनीति पर अहम बैठक की है. बैठक में मिशन 225 को हासिल करने पर चर्चा हुई. बता दें कि बिहार में विधानसभा की 243 सीटें हैं और NDA ने 225 सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य रखा है.
अमित शाह बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों को मुकम्मल रूप देने के लिए बिहार की यात्रा पर हैं. उन्होंने रैली को संबोधित करने के बाद पटना में बिहार एनडीए के घटक दलों के साथ अहम बैठक की है. इसमें एनडीए के सभी दिग्गज नेताओं ने शिरकत की. बिहार के आगामी चुनाव के लिए महत्वपूर्ण यह बैठक तकरीबन 20 मिनट तक चली. अमित शाह के साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, ललन सिंह, चिराग पासवान समेत अन्य सीनियर लीडर ने चुनावी रणनीति पर मंथन किया. बिहार में इसी साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में प्रदेश में राजनीतिक गतिविधयां बढ़ गई हैं. बता दें कि चुनाव में अभी भी छह से सात महीने का वक्त बाकी है.
मिशन 225
अमित शाह की अगुआई में हुई बैठक में बिहार एनडीए के लिए लक्ष्य भी तय कर दिया गया है. एनडीए के घटक दलों के बीच हुई बैठक में मिशन-225 को हासिल करने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी है. बता दें कि बिहार में विधानसभा की 243 सीटें हैं. इनमें से एनडीए ने 225 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. गौर करने वाली बात यह है कि बिहार में सामान्य बहुमत से सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों की जरूरत होती है, ऐसे में यदि बिहार में एनडीए 225 सीटें जीतने में सफल रहता है तो गठबंधन को दो तिहाई बहुमत हासिल हो जाएगा. लगभग 20 मिनट तक चली एनडीए की बैठक में सभी घटक दलों के बीच एकजुटता पर खासतौर पर चर्चा हुई. इसके साथ ही मजबूती के साथ एकजुट होकर विधानसभा चुनाव लड़ने पर भी सभी घटक दल सहमत हुए. चुनाव प्रचार में सभी सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने पर विचार-विमर्श के अलावा सरकार के कामों को मजबूती के साथ लोगों तक पहुंचाने पर भी चर्चा की गई.
अमित शाह के बाएं सीएम नीतीश तो दाएं कौन?
राजनीति में तस्वीरों का काफी महत्व होता है. तस्वीर के जरिये संबंधों की मजबूती के साथ ही निकटता का पता चलता है तो दूरी और कम होते महत्व का भी संकेत मिलता है. अमित शाह जब बिहार चुनाव के लिए रणनीति तय करने बिहार पहुंचे तो एनडीए के सहयोगी दलों के साथ उनकी अहम बैठक हुई. मीटिंग खत्म होने के बाद एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए एनडीए के सभी नेताओं ने साथ में फोटो शेसन भी कराया. स्वाभाविक तौर पर अमित शाह केंद्र में थे. उनकी बाईं ओर बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू चीफ नीतीश कुमार थे. वहीं, अमित शाह के दाएं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान थे. चिराग के साथ में एक अन्य केंद्रीय मंत्री ललन सिंह थे. तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू होना लाजिमी है.
एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार
नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार में राजग का ‘‘चेहरा’’ रहे हैं, लेकिन अटकलें हैं कि जेडीयू प्रमुख के कथित खराब स्वास्थ्य को देखते हुए भाजपा इस बार अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है। पहले, नीतीश कुमार कई बार अचानक राजग का साथ छोड़ चुके हैं। हालांकि, कुमार यह दोहराते रहे हैं कि वे हमेशा के लिए राजग में वापस आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने सभी दलों के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव को लेकर खास प्लानिंग पर विचार किया है। ये संकेत महागठबंधन के लिए ठीक नहीं है।
लालू यादव पर हमलावर क्यों?
दरअसल, भाजपा के रणनीतिकार और गृह मंत्री अमित शाह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर यूं ही नहीं हमलावर है। इस बार अमित शाह को लालू यादव का वो स्वरूप याद आ रहा है, जिन्होंने आरक्षण के रथ पर सवार हो कर भाजपा को आरक्षण विरोधी करार देकर उनके हाथों से जीत छीन ली थी। 2015 में लालू यादव को एक मुद्दा ‘आरक्षण’ मिला था। इस बार तो लालू यादव दो धारी तलवार भांज रहे हैं। लालू यादव वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को मुस्लिम विरोधी ठहराने लगे हैं और साथ ही 65 प्रतिशत आरक्षण को 9वीं अनुसूची में नहीं डालने को ‘आरक्षण चोर’ बताने लगे हैं।
बिहार चुनाव में जंगल राज क्यों?
आखिर ऐसा क्या है कि चुनावी जंग में राजद के विरुद्ध हो या महागठबंधन के विरुद्ध, एनडीए का पहला तीर ‘जंगल राज’ के नाम से क्यों छूटता रहा है? क्या वंशवाद, विकास और सुशासन जैसे मुद्दे पर भरोसा नहीं? अब तक के चुनावी जंग में हासिल मतों का किस्सा है कि जंगल राज के नाम पर लगभग 30 प्रतिशत वाली जाति वालों की गोलबंदी हो जाती है। इस नाम पर सवर्ण और वैश्य समेत ऐसी कई छोटी-छोटी जातियां जिनका जीवन व्यवसाय से चलता है, वे गोलबंद हो जाती है। तब भाजपा या एनडीए राजद के एमवाई यानी मुस्लिम और यादव के 32 प्रतिशत मत का जवाब बन कर सामने से लड़ती है। बाकी सुशासन, विकास और विकास के मुद्दे एनडीए के जीत का मार्ग प्रशस्त करती है। पिछले कुछ चुनाव में राजद के A टू Z का कमाल दिखा और सवर्ण मत में सेंधमारी भी राजद ने की। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के कई सवर्ण नेताओं को हार देखनी पड़ी। इनमें आरा से पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह, औरंगाबाद से पूर्व सांसद सुशील सिंह और बक्सर से मिथिलेश तिवारी को हार का सामना करना पड़ा। ये दीगर कि बेगूसराय से गिरिराज सिंह, मोतिहारी से राधामोहन सिंह, पटना साहिब से रवि शंकर प्रसाद और छपरा से राजीव प्रताप रूडी की जीत हुई थी।
नीतीश की जदयू रिलैक्स क्यों?
परिस्थितिवश, जनता दल (यू) कई कारणों से वर्ष 2020 में पिछड़ गई थी और विधान सभा में नंबर वन से नंबर तीन की पार्टी बन गई थी। लेकिन तब से रिकवर होते-होते लोकसभा चुनाव में मजबूत हो गई। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू का स्ट्राइक रेट भाजपा से कहीं ज्यादा था। अब तो जनता दल (यू) नीतीश कुमार के बीमारी की चर्चा के साथ निशांत कुमार का प्रोजेक्शन क्या हुआ, जदयू मजबूत होने लगी है। मिली जानकारी के अनुसार सरकार की एजेंसी की सर्वे रिपोर्ट है कि जनता दल (यू) वर्ष 2025 के विधान सभा चुनाव में 70 से 75 सीटें हासिल करेगी। ये स्थिति भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।








