मुस्लिम संगठनों के विरोध का असर क्यों नहीं हुआ नीतीश कुमार पर ?

”हमें इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि यह गरीबों को न्याय दिलाने और आधी आबादी को सशक्त बनाने के बारे में है. यह एक मिथक है कि यह एक धर्म के खिलाफ है. यह मुस्लिम विरोधी नहीं है, क्योंकि यह धर्म के किसी भी पहलू को नहीं बदलता है. लेकिन यह वक्फ के रूप […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 2 अप्रैल 2025, 06:05 AM 7 मिनट read
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मुस्लिम संगठनों के विरोध का असर क्यों नहीं हुआ नीतीश कुमार पर ?
Photo: UB India News Archive

”हमें इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि यह गरीबों को न्याय दिलाने और आधी आबादी को सशक्त बनाने के बारे में है. यह एक मिथक है कि यह एक धर्म के खिलाफ है. यह मुस्लिम विरोधी नहीं है, क्योंकि यह धर्म के किसी भी पहलू को नहीं बदलता है. लेकिन यह वक्फ के रूप में दी गई ऐसी जमीनों की पारदर्शिता और जवाबदेही के बारे में है.” सूत्रों के हवाले से खबर है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सांसदों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वक्फ संशोधन बिल पर जेडीयू के सभी सांसद केंद्र सरकार के समर्थन में रहें. बता दें कि जनता दल यूनाइटेड ने मंगलवार को ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वह इस बिल के समर्थन में रहेगा. हालांकि, साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जेडीयू के सुझावों को भी मान लिया है. लेकिन, सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए यह फैसला इतना आसान था कि मुस्लिम संगठनों की आपत्तियों के बावजूद उन्होंने वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करने का खुला ऐलान कर दिया? राजनीति के जानकार इसको अलग दृष्टि से देखते हैं.

दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि ऐसे राजनेता की रही है जो आम लोगों के कल्याण और बिहार के विकास के विजन को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले लेते रहे हैं. उनकी राजनीति भी इसी अंदाज में आगे बढ़ती रही है. उन्होंने कई मौकों पर अपनी स्वयं की क्रेडिबिलिटी को भी दांव पर लगा दिया और पाला बदली भी की, लेकिन उनके ध्यान में यह बात हमेशा रही है कि बिहार का विकास हो और जो भी तबके विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं और जिनको इसकी जरूरत हो उन तक सरकार की योजनाओं का लाभ अवश्य पहुंचे. मुस्लिम समुदाय से जुड़ा वक्फ बिल का यह मामला भी कुछ ऐसा ही कहा जा रहा है.

CM नीतीश के चेहरे पर शिकन नहीं दिखी, पर क्यों?
नीतीश कुमार की दावत ए इफ्तार का जब कुछ मुस्लिम संगठनों की ओर से बॉयकाट किया गया तब भी उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं देखी गई. दरअसल, बहिष्कार के बाद भी बड़ी संख्या में मुस्लिम इदारों और प्रगतिशील कहे जाने वाली शख्सियतों ने उनकी इस दावत में शिरकत की. राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान जैसे प्रगतिशील और राष्ट्रवादी चेहरे का साथ होना सीएम नीतीश कुमार के लिए सुकून भरा रहा. इसके साथ ही साथ मुस्लिम संगठनों के बॉयकाट के दावे में भी फर्क दिखा. वहां भी दो गुट बनते दिखाई दिए और एक गुट ने जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का समर्थन किया तो दूसरे गुट ने के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया गया. लेकिन, फिर भी सवाल यही है कि क्या नीतीश कुमार इन सब चीजों से प्रभावित होते रहे हैं? उनके फैसलों से यह बात बिल्कुल ही नहीं झलकती है.

नीतीश कुमार के विजन में बिहार का विकास
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक विजनरी नेता कह जाते हैं और यह भी एक तथ्य है कि वह राजनीति में हैं तो हर तरह की राजनीति का असर भी उनपर होगा. लेकिन, इसके साथ ही यह भी बड़ा सत्य है कि वह साथ में अपना एक विशेष दृष्टिकोण लेकर राजनीति करते हैं, जिससे समाज के हर तबके का विकास हो और बिहार भी प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़े. ताजा वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करते हुए जेडीयू की ओर से कहा गया है कि 44 संशोधनों में 14 सुझाव माने गए हैं और यह भी आधी आबादी यानी महिलाओं को सशक्त बनाने और वक्फ की संपत्तियों को लेकर अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए है, जिससे इस वर्ग के सभी तबकों का कल्याण हो सके.

अल्पसंख्यक समुदाय का कल्याण नीतीश का इरादा

जदयू के प्रवक्ता ने कहा कि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किस तरह से अल्पसंख्यकों के लिए काम करते आए हैं वह बीते वर्षों में जमीन पर भी दिखा है. न्याय के साथ विकास के नारे के साथ उन्होंने बिहार का बजट 3 लाख 14 हजार करोड़ तक पहुंचाया है तो इसमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट भी 2004-05 के 3 करोड़ 53 लाख रुपए के मुकाबले 2025-26 में 1004 करोड़ 22 लख रुपए तक बढ़ा दिया है. मुस्लिम महिलाओं के लिए जहां अल्पसंख्यक मुस्लिम परित्यक्ता तलाकशुदा महिला सहायता योजना के तहत कुल 21 करोड़ 87 लख रुपए विकृत वितरित किए गए हैं, वहीं मुसलमानों के विकास के लिए हर क्षेत्र में काम काम किया गया है.

नीतीश की मुस्लिमों की योजनाओं की फेहरिस्त
जेडीयू का दावा है कि मुस्लिमों के लिए हर क्षेत्र और हर तबके के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया है. छात्रों के लिए प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना, अल्पसंख्यक छात्रावास निर्माण योजना, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, उर्दू की शिक्षा पर जोर, बिहार राज्य अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय योजना, मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कल्याण छात्रावास योजना, बिहार राज्य मदरसा सुदृढ़ीकरण योजना, अल्पसंख्यक छात्रावास कल्याण खाद्यान्न योजना, राज्य कोचिंग योजना और अत्यंत पिछड़ा वर्ग सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना जैसे कई काम किये गए हैं. वहीं, मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री हुनर एवं औजार योजना, अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक रोजगार ऋण योजना, बुनकारों की समस्याओं का निदान के लिए राशि और बिजली पर सब्सिडी की योजना, बिहार राज्य वक्फ विकास योजना, प्रशासनिक सुधार योजना, मुख्यमंत्री श्रम शक्ति योजना लागू करने के साथ ही हज यात्रियों की सुविधा के लिए हज भवन का निर्माण कराया गया.

इन मुद्दों पर नीतीश ने केंद्र सरकार का दिया साथ
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मन में अगर यह आ जाए कि जो वह फैसला लेने जा रहे हैं, वही उचित है तो वह उस काम को करके छोड़ते हैं. वक्फ संशोधन बिल तो अभी की बात है, और इसमें जेडीयू के सुझावों को केंद्र सरकार ने सुना भी और शामिल भी किया है, लेकिन तीन तलाक के मुद्दे पर क्या हुआ, सीएए के मसले पर क्या हुआ, इसमें भी उन्होंने केंद्र सरकार का साथ दिया था. एनआरसी वाले मुद्दे पर थोड़े मतभेद जरूर हैं, लेकिन मोटे तौर पर उन्होंने इसका भी समर्थन किया है.

नीतीश कुमार ने इस सोच के साथ किया बिल का समर्थन
अशोक कुमार शर्मा कहते हैं, जाहिर तौर पर जो अल्पसंख्यकों के विकास के साथ ही राष्ट्र के हित में जो फैसले होते हैं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उस पर आगे बढ़ते रहे हैं. वक्फ संशोधन बिल का मामला भी ऐसा है, क्योंकि यहां भ्रष्टाचार चरम पर है और अवैध कब्जादारों का बोलबाला है. ऐसे में अब सरकार की नजर में आएगा और इससे जो आय अर्जित होगी वह अल्पसंख्यकों के कल्याण पर खर्च किये जा सकेंगे. इसके साथ ही मुस्लिम महिलाओं को भी सशक्त करने में इसका अहम योगदान होगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संभवत: इसी इरादे के साथ इस बिल का समर्थन किया है.

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