वक्फ संशोधन बिल से बिहार की सियासत में भूचाल …………

वक्फ संशोधन बिल ने बिहार की सियासत में भूचाल ला दिया है. खासकर नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में भगदड़ मच गई है. वक्फ बिल पर जदयू के स्टैंड से पार्टी के भीतर भयंकर नाराजगी है. एक के बाद एक कई नेता जदयू छोड़ रहे हैं. चुनाव से ठीक पहले बिहार में जदयू को ताबड़तोड़ […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 5 अप्रैल 2025, 07:29 AM 8 मिनट read
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वक्फ संशोधन बिल से बिहार की सियासत में भूचाल …………
Photo: UB India News Archive

वक्फ संशोधन बिल ने बिहार की सियासत में भूचाल ला दिया है. खासकर नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में भगदड़ मच गई है. वक्फ बिल पर जदयू के स्टैंड से पार्टी के भीतर भयंकर नाराजगी है. एक के बाद एक कई नेता जदयू छोड़ रहे हैं. चुनाव से ठीक पहले बिहार में जदयू को ताबड़तोड़ झटके लग रहे हैं. वक्फ बिल की वजह से जदयू के अब तक कम से कम 6-7 नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है. सबका कारण एक ही है. जदयू का वक्फ बिल पर संसद में मोदी सरकार का साथ देना. बिहार चुनाव से ठीक पहले इन घटनाक्रमों ने नई खलबली मचा दी है. जदयू में भी इस्तीफों की वजह से बेचैनी बढ़ गई है. जदयू में ललन सिंह को विलेन बनाया जा रहा है. हालांकि, नीतीश कुमार की चुप्पी ने भी सस्पेंस बढ़ा रखा है. मुसलमानों को उम्मीद थी कि खुद को सेकुलर पार्टी कहने वाली नीतीश कुमार की जदयू का स्टैंड वक्फ बिल के खिलाफ होगा. मगर ऐसा नहीं हुआ. ऐसे में मुस्लिम नेता जदयू में खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.

अब सवाल है कि नीतीश कुमार के स्टैंड से मुसलमान कितने नाराज हैं? क्या इस नाराजगी को भूनाने की तेजस्वी कोशिश करेंगे, क्या तेजस्वी के पास इस बार मुस्लिम वोट पूरी तरह से हासिल करने का पूरा मौका है? क्या बिहार में मुसलमान इस बार नीतीश को जरा भी वोट नहीं करेंगे? आज इन सभी सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे. बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव है. बिहार मुस्लिमों की आबादी करीब 18%-20% है. ऐसे में संसद में वक्फ संशोधन बिल पर नीतीश कुमार की जदयू का समर्थन करना चुनाव में NDA के लिए एक चुनौती बन सकता है. चलिए समझते हैं कि बिहार में वक्फ बिल पर क्यों खलबली मची है.

1. वक्फ संशोधन बिल पर जदयू के स्टैंड से बिहार के मुसलमानों में भारी नाराजगी है. इसका असर जदयू के नेताओं के इस्तीफे से साफ दिख रहा है. अब तक जदयू के 6-7 मुस्लिम नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है. उनका आरोप है कि उनके साथ धोखा हुआ है. उन्हें उनकी पार्टी से इस स्टैंड की उम्मीद नहीं थी. उनके इस्तीफे से ग्राउंड जीरो पर एक अलग मैसेजिंग हो रही है. परसेप्शन बन रहा है कि वक्फ बिल पर समर्थन देकर नीतीश कुमार की जदयू ने मुस्लिमों के साथ धोखा किया है. कारण कि जदयू खुद को सेकुलर छवि वाली पार्टी कहती रही है.

2. नीतीश कुमार अब तक वक्फ बिल पर कुछ बोले नहीं हैं. उनकी चुप्पी ने और भी सस्पेंस बढ़ा दिया है. अक्सर इन मुद्दों पर मुखर तरीके से नीतीश कुमार बोलते रहे हैं. पर वक्फ बिल पर अब तक उनका बयान सामने नहीं आया है. अव्वल तो ललल सिंह जदयू छोड़ने वाले नेताओं को छोटा नेता बता रहे हैं.

3. बिहार चुनाव में इसका असर खूब दिख सकता है. तेजस्वी की राजद इसे मौके के रूप में लेगी. बिहार के मुसलमानों को बताएगी कि संसद में जदयू का वक्फ बिल पर क्या स्टैंड रहा है. बिहार में मुस्लिम आबादी करीब 18 से 20 फीसदी है.ज्यादातर अबादी सीमांचल क्षेत्र में है. जदयू के समर्थन से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ेगी. ऐसी अटकलें लगाई जा रही है कि यह वोट राजद-कांग्रेस गठबंधन की ओर जा सकता है.

4. जदयू में अब वक्फ बिल पर दरार पड़ने लगी है. जदयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के चार नेताओं ने इस्तीफा दे दिया, और एमएलसी गुलाम गौस जैसे वरिष्ठ नेताओं ने विरोध जताया. इससे नीतीश की पकड़ कमजोर हो सकती है. जदयू को मुस्लिम वोटर जो वोट करते थे, वह खिसक सकते हैं. इसका डर अब खुद जदयू नेताओं को भीतर ही भीतर सताने लगा है.

5. इसमें कोई शक नहीं कि वक्फ बिल पर जदयू के स्टैंड ने तेजस्वी यादव को हथियार की तरह सियासी इस्तेमाल करने का मौका दिया है. राजद और तेजस्वी यादव इसे मुस्लिम विरोधी बताकर जदयू के खिलाफ आक्रामक रुख अपना सकते हैं. सीमांचल और कोसी जैसे क्षेत्रों में इसका असर साफ दिख सकता है.

6. बिहार में राजद का मुख्य वोट बैंक माई रहा है. मुसलमान और यादव. हालांकि, यह भी सच है कि पिछले कुछ चुनावों से मुसलमान पूरी तरह से लालू यादव की राजद को वोट नहीं करते. अब इस वक्फ बिल से तेजस्वी के पास पूरा मुस्लिम वोट बैंक अपने पाले में खींचने का मौका है. चुनाव में राजद और कांग्रेस इसे सेक्युलरिज्म का मुद्दा बनाकर जदयू को घेरने की कोशिश कर सकते हैं.

7. अभी जो हलचल दिख रही है, उससे साफ लग रहा है कि जदयू का वक्फ बिल समर्थन एक जोखिम भरा दांव हो सकात है. नीतीश कुमार की छवि और मुस्लिम वोट बैंक पर इसका असर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है. अगर जदयू इस नुकसान को संभाल नहीं पाई, तो बिहार में सत्ता की कुर्सी पर उसकी पकड़ कमजोर हो सकती है.

8. हालांकि, जदयू अभी से डैमेज कंट्रोल में जुट गई है. माना जा रहा है कि वक्फ बिल के फायदे बताने के लिए जदयू एक अभियान चलाएगी. जदयू नेता घर-घर जाएंगे और मुसलमानों को वक्फ बिल के फायदे बताएंगे. जदयू नेता मुस्लिमों की नाराजगी को दूर करने की कोशिश करेंगे. हालांकि, यह चुनाव बाद तय हो जाएगा कि इस बार बिहार के मुसलमान किसका कल्याण करेंगे.

5 नेताओं के छोड़ने से नीतीश की पार्टी में बढ़ी बेचैनी

बिहार में JDU को झटके पर झटके लग रहे हैं। पार्टी के तीन और मुस्लिम कार्यकर्ताओं/नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने संसद में वक्फ बिल को JDU के समर्थन के कारण इस्तीफा दिया। अब तक कुल पांच कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया है। बिहार में इस साल चुनाव होने वाले हैं। राज्य में मुस्लिम आबादी 18% है। ऐसे में वक्फ बिल पर JDU का समर्थन NDA के लिए एक चुनौती बन सकता है। हालांकि, पूरे मामले पर नीतीश कुमार की ओर से कोई बयान नहीं आया है, मगर पार्टी के दूसरे नेता लगातार बोल रहे हैं।

अब तक JDU के 5 नेताओं का इस्तीफा

JDU ने BJP के साथ गठबंधन में बिल का समर्थन किया। इससे मुस्लिम समुदाय में कथित नाराजगी है। पहले भी JDU ने नागरिकता संशोधन बिल (CAB) का समर्थन किया था। तीन तलाक बिल पर भी JDU ने खुलकर विरोध नहीं किया था। इस बार मुस्लिम समुदाय नाराज दिख रहा है। शुक्रवार को इस्तीफा देने वालों में शाह नवाज मलिक, नदीम अख्तर और राजू नैय्यर शामिल हैं। मलिक JDU अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य सचिव हैं। अख्तर JDU के जिला उपाध्यक्ष हैं और नैय्यर राज्य सचिव हैं। तबरेज सिद्दीकी और कासिम अंसारी ने गुरुवार को इस्तीफा दिया था। वे जिला स्तर के कार्यकर्ता थे।

2020 में एक भी मुस्लिम जेडीयू कैंडिडेट नहीं जीता था

विश्लेषकों का मानना है कि मुसलमानों ने JDU को पूरी तरह से समर्थन नहीं दिया है। 2020 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में यह देखने को मिला था। नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में एकमात्र मुस्लिम प्रतिनिधि जमा खान हैं। वे अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं। जमा खान BSP के टिकट पर जीते थे, लेकिन बाद में JDU में शामिल हो गए।

जेडीयू को अपने कल्याणकारी योजनाओं पर भरोसा

इन मुश्किलों के बावजूद, JDU को उम्मीद है कि वक्फ बिल का समर्थन उसके चुनावी संभावनाओं पर असर नहीं डालेगा। पार्टी को अल्पसंख्यक समुदाय के लिए किए गए कार्यों पर भरोसा है। JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, ‘हमने बिहार में बहुत पहले वक्फ विकास बोर्ड की स्थापना की थी। इसके तहत अल्पसंख्यक छात्रों के लिए छात्रावास सहित बहुउद्देशीय भवनों के लिए 110 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। हमने कब्रिस्तानों की घेराबंदी भी सुनिश्चित की। इसके अतिरिक्त, हमने राज्य में शराबबंदी लागू की।’

मुस्लिमों को वक्फ बिल के फायदे बताएगी जेडीयू

पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे हर घर जाकर लोगों को बताएंगे कि JDU ने उनके लिए क्या किया है। वे लोगों को समझाएंगे कि वक्फ बिल उनके फायदे के लिए है। JDU को उम्मीद है कि लोग उनकी बात समझेंगे और उन्हें वोट देंगे। लेकिन, मुस्लिम कार्यकर्ताओं के इस्तीफे से पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। देखना होगा कि चुनाव में इसका क्या असर होता है।

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