बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। राज्यस्तरीय बनी समन्वय समिति की तर्ज पर ही जिला से लेकर प्रखंड और बूथ स्तर पर समन्वय समिति बनाई जाएगी। राज्य में चल रहे मतदाता सूची का विशेष गहन परीक्षण में एक भी मतदाता न छूटे, घटक दलों के नेता यह सुनिश्चित करेंगे।
सोमवार को इंडिया गठबंधन समन्वय समिति के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने घटक दलों के सभी जिलास्तरीय अध्यक्षों से ऑनलाइन मीटिंग की। दोपहर 12 बजे शुरू हुई यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली। नेता प्रतिपक्ष ने गठबंधन के सभी छह दलों के जिलाध्यक्षों को कहा कि जिस तरह राज्यस्तर पर समन्वय समिति बनी हुई है, उसी तरह प्रखंड और बूथ स्तर पर समन्वय समिति बनाएं, ताकि चुनाव में सभी दलों के नेता और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर सामंजस्य कायम रहे। मतदाता सूची पुनरीक्षण का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने कहा कि 2020 के चुनाव में 35 सीटों पर जीत-हार का अंतर 3000 से कम था। इसलिए एक भी मतदाता का नाम न कटे, यह सुनिश्चित करें।
वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य में बैठे लोगों की साजिश है कि वंचित तबके का नाम कट जाए, इसलिए अनिवार्य रूप से दलित, पिछड़ा, अतिपिछड़ा, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का फॉर्म जमा कराएं। राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, सांसद संजय यादव, पूर्व मंत्री आलोक मेहता ने भी विचार रखे।
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कांग्रेस अभी और आक्रामक होगी। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस नेताओं को इसके खिलाफ सड़कों पर उतरने के निर्देश दिए हैं। पार्टी ने साफ कहा है कि बिहार में वोट की चोरी नहीं होने देंगे।
खरगे की अध्यक्षता में हुई बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में पुनरीक्षण और गठबंधन में सीट बंटवारे और चुनाव रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। वर्ष 2020 में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था। ऐसे में पार्टी इस बार कम से कम 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
बैठक में कृष्णा अल्लावारू, राजेश राम, तारिक अनवर, अखिलेश प्रसाद सिंह, शकील अहमद खान, मदन मोहन झा, कन्हैया कुमार,पप्पू यादव, रंजीत रंजन, मनोज कुमार, मो. जावेद आदि थे।







