बिहार के सरकारी स्कूलों में संचालित पाठ्यक्रम में चंपारण सत्याग्रह के सूत्रधार पंडित राजकुमार शुक्ल के संघर्ष और जीवनी को शामिल किया जाएगा। स्कूली छात्र अब चंपारण आंदोलन, चंपारण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यात्रा, नील की खेती के खिलाफ आंदोलन में पंडित राजकुमार शुक्ल के कामों के बारे में पढ़ेंगे।
इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बिहार विधान परिषद के एनेक्सी हॉल में आयोजित पं. शुक्ल की 151वीं जयंती समारोह में की। वहीं, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने पं. राजकुमार शुक्ल के नाम पर एक संग्रहालय (म्यूजियम) बनाने का ऐलान किया। समारोह में विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह सहित कई मंत्री शामिल थे। कार्यक्रम में ‘शुक्ल शौर्य स्मारिका’ का विमोचन भी किया गया।
भारत रत्न देने की मांग
इधर, पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान के अध्यक्ष राजेश भट्ट ने एक बार फिर राजकुमार शुक्ल को भारत रत्न देने की मांग की। उन्होंने सरकार से 2017 में पंडित राजकुमार शुक्ल को भारत रत्न देने की मांग की थी। सरकार के तात्कालिक सचिव उपेंद्र नाथ पांडेय ने गृह मंत्रालय के आर्थिक सलाहाकार सतपाल चौहान ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के साथ ही पंडित राजकुमार शुक्ल को भारत रत्न देने की अनुशंसा की थी। इसके बाद राजेश भट्ट ने एक बार फिर से केंद्र और राज्य सरकार को पंडित राजकुमार शुक्ल को भारत रत्न देने की मांग करते हुए पत्र लिखा है।








