बांकीपुर उपचुनाव को लेकर पार्टी में एकमत है कि हर हालत में बांकीपुर का चुनाव पूरी मजबूती से पूरी ताकत से लड़ना है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले 40 साल से वो एक पार्टी और एक ही परिवार का गढ़ बना हुआ है। और आज जो नितिन नवीन वहां से जीतते रहे हैं, वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। बीजेपी को कोई दल वहां परास्त नहीं कर सका है। लेकिन जन सुराज ने ये जिम्मेदारी ली है। और हम लोग ऐसा समझते हैं कि बांकीपुर में बीजेपी को हम लोग ही हरा सकते हैं।’ उपरोक्त दावा जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने किया है।
जन सुराज लड़ेगा चुनाव
ध्यान रहे कि बांकीपुर में उपचुनाव है। जन सुराज लगातार वहां अपने जनसंपर्क अभियान को तेज किए हुए हैं। इसी दौरान कार्यकर्ताओं के सवालों का जवाब देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं आज इतना आपके सामने घोषणा कर रहा हूं। जन सुराज अपनी पूरी ताकत लगाकर बीजेपी को बांकीपुर में हरायेगा। वहां पर पूरी ताकत से हम लोग लड़ेंगे। ध्यान रहे कि पिछले साल विधानसभा चुनावों में किशोर की पार्टी ने 243 सीटों में से 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली और उसे मात्र 3.4 प्रतिशत वोट मिले। अब पार्टी बांकीपुर उपचुनाव को लेकर तैयारी कर चुकी है।
क्यों जरूरी बांकीपुर सीट?
बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह एक हाई-प्रोफाइल सीट है और भाजपा का गढ़ मानी जाती है। पिछले साल नवीन ने यहां राष्ट्रीय जनता दल की रेखा कुमारी को 51,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराकर जीत हासिल की थी। नवीन के पिता, नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने भी कई बार यह सीट जीती थी। नितिन नवीन ने अपने पिता की मृत्यु के बाद 2006 के उपचुनाव में पहली बार यह सीट जीती थी और तब से वह लगातार यह सीट जीतते आ रहे हैं।
पीके के पूर्व का बयान
2025 की हार के बाद, जेएसपी ने पंचायत स्तर से ऊपर की अपनी सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया। पिछले नवंबर में, बिहार चुनाव परिणामों के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, किशोर ने चुनाव न लड़ने के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दिया। किशोर ने कहा था कि इमरान खान ने 25 साल पहले पाकिस्तान में अपनी पार्टी शुरू की, सात सीटों से चुनाव लड़ा और सभी में हार गए—इसलिए चुनाव लड़ना व्यक्तिपरक है। लोग इस बात पर बहस कर सकते हैं कि अगर मैंने चुनाव लड़ा होता तो क्या यह फायदेमंद होता या नहीं। पीके ने हमेशा यही कहा था कि उनकी पार्टी या तो अर्श पर होगी या फर्श पर—या तो 150 सीटें जीतेगी या एक भी सीट नहीं जीतेगी।







