बिहार की राजनीति का दर्द अब उपेंद्र कुशवाहा के जिम्मे आया है। वो खुद तो राज्यसभा चुनाव में निर्विरोध सांसद बन गए। लेकिन अब उनके बेटे दीपक प्रकाश विधानपार्षद नहीं बनने जा रहे हैं। NBT को NDA सूत्रों ने बताया है कि 8वीं सीट, जिस पर निर्विरोध चुनाव होना है, वो लोजपा रामविलास के खाते में चला गया है। इस पर लोजपा रामविलास सुप्रीमो चिराग पासवान ने अपने भरोसेमंद नेता अशरफ अंसारी को भेजने की सहमति दे दी है। लोजपा रामविलास ने उनके नाम का ऐलान भी कर दिया है।
दीपक प्रकाश नहीं बनेंगे MLC: सूत्र
NBT संवाददाता ने जब NDA के अपने विश्वस्त सूत्र से बात की तो उन्होंने हमें बताया कि ‘जहां तक हमारी जानकारी है, दीपक प्रकाश निर्विरोध वाली सीट से MLC चुनाव में नहीं जा पाएंगे। इसके पीछे वजह उपेंद्र कुशवाहा का बीजेपी को विलय के नाम पर टरकाना है। माना जा रहा है कि बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को अपनी बात से पलटने की एक तरह से सजा दी है। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को 10वीं सीट के लिए चुनाव लड़ना पड़ सकता है।’
दीपक प्रकाश कैसे नहीं बनेंगे MLC, समझिए
हमारे NDA सूत्र की बातों में भी दम नजर आ रहा है। लोजपा रामविलास ने जैसे ही अपने कैंडिडेट अशरफ अंसारी के नाम का ऐलान किया तो ये तय हो गया कि MLC के निर्विरोध निर्वाचन यानी वोटों के गणित से तय आखिरी सीट उनके खाते में चली गई है। ऐसे में अब 10वीं सीट बच रही है, जिसके लिए NDA के पास सिर्फ 2 वोट बाकी हैं। जबकि महागठबंधन के पास AIMIM को छोड़कर भी 36 वोट हैं। इसमें अगर राज्यसभा चुनाव की तरह राजद के एक और कांग्रेस के 3 विधायक वोट नहीं भी करेंगे तो तेजस्वी यादव के पास महागठबंधन विधायकों के 32 वोट होंगे, जो कि जरूरी 25 वोटों से 7 वोट ज्यादा ही हैं।
उपेंद्र कुशवाहा को सजा कैसे? ये भी समझिए
सूत्रों ने बताया कि उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा सदस्य के लिए निर्विरोध सीट पर भेजने से पहले उनसे पार्टी का बीजेपी में विलय करने को कहा गया था। लेकिन तब उपेंद्र कुशवाहा ने आगे की बात कहकर इसे टाल दिया था। ठीक यही बात सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार के वक्त भी हुई। चर्चा है कि बीजेपी उपेंद्र कुशवाहा की वादाखिलाफी से नाराज है, इसलिए उसने दीपक प्रकाश का नाम निर्विरोध चुने जा सकने वाले MLC उम्मीदवारों की सूची में नहीं रखा।
- लोजपा रामविलास ने कर दिया निर्विरोध MLC सीट के लिए उम्मीदवार का ऐलान
- अब उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के MLC बनने का रास्ता करीब-करीब बंद
- 8 महीने बाद दीपक प्रकाश को फिर से मिल सकता है MLC बनने का मौका
उपेंद्र कुशवाहा से कुछ दिन पहले बीजेपी की टॉप लीडरशिप ने बात की थी। चर्चा है कि ये बातचीत 10 से 15 दिन पहले हुई। इसमें भी उपेंद्र कुशवाहा के सामने उनकी पार्टी RLM का BJP में विलय करने की बात याद दिलाई गई। कहा जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा ने तब भी कोई साफ रुख नहीं दिखाया।
लेकिन दीपक प्रकाश के लिए अभी भी उम्मीद
ऐसा नहीं है कि दीपक प्रकाश के लिए अभी भी उम्मीद नहीं है। चर्चा है कि अगर उपेंद्र कुशवाहा बीजेपी में विलय की बात मान जाते हैं तो उनके बेटे को MLC बनाकर मंत्री पद बचाया या फिर से दिया जा सकता है। लेकिन इसके लिए उन्हें मार्च 2027 तक इंतजार करना होगा। क्योंकि मार्च में राज्यपाल के मनोनयन के जरिए 12 और लोग MLC बनेंगे। तब दीपक प्रकाश को उसके जरिए विधान परिषद में भेजा जा सकता है।







