“इंसान को सबसे बड़ी संतुष्टि और खुशी उस अमूल्य पुरस्कार से मिलती है जो तब मिलता है जब किसान, जिनका जीवन आपके प्रयासों पर निर्भर करता है, उनके लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हैं।” भले ही यह शब्द भारत में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन के हों, परन्तु इसे आत्मसात कर बिहार डेयरी उद्योग को बुलंदी पर पहुंचाने वाले डॉ. जगजीत सिंह पुंजराथ ने अक्षरश: धरातल पर उतारा है।
भारत में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन हैं, तो बिहार में इसे धरातल पर उतारने वाले डॉ. जगजीत सिंह पुंजराथ हैं। आज बिहार मिल्क फेडरेशन जिस मुकाम पर है, उसकी नींव की हर एक ईंट में जगजीत पुंजराथ के कठोर परिश्रम, दूरदृष्टि और सम्पूर्ण समर्पण भाव के प्रभाव दिखते हैं। जिस जमाने में फैक्ट्री से दूध लेने या फैक्ट्री को दूध देने में समस्याएं किसी हिमालय पर्वत से कम न थीं, उस कालखंड में पटना डेयरी प्रोजेक्ट के प्रबंध निदेशक के रूप में 8 वर्षों तक अथक परिश्रम कर बिहार डेयरी उद्योग को एक नई पहचान दी।
वर्तमान कालखँड में जल्द ही 86वें ( 23 मार्च ) वसंत को अस्पर्शित करने वाले बेबाक वक्ता, ज्ञान का समंदर अपने अंदर समेटे, मन से जितने निर्मल तन से उतने ही स्वस्थ डॉ. जगजीत सिंह पुंजराथ किसी चमत्कार और वरदान से कम नहीं है। जिस उम्र में लोग अपनी ज़िन्दगी से हार मान कर ख़ुद को मरणासन्न के करीब डाल लेते उंस उम्र में पूर्ण रूप से तंदरुस्त हाल में पंजाब से पटना आकर लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड प्राप्त कर वाकई में नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

डॉ. जगजीत सिंह पुंजराथ को डेयरी उद्योग में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता है। उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत के ऑपरेशन फ्लड में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई इसके साथ सहकारी डेयरी मॉडल को मज़बूत करने और किसानों के जीवन को बेहतर बनाने में अतुलनीय योगदान दिये है। भारत और श्रीलंका में संघर्षरत परियोजनाओं के लिए उनकी बदलाव की रणनीतियों को IRMA और IIM अहमदाबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अपने यहाँ केस स्टडी के रूप में मान्यता दे चुके हैं।
हाल ही में पटना के अशोका कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय 51वें डेयरी उद्योग कॉन्फ्रेंस 2025 में पटना पहुँचे जगजीत पुंजरथ से विस्तृत बातचीत हमारे बिहार संपादक से हुई। जिसमें उन्होंने अपने प्रारंभिक जीवन से लेकर डेयरी उद्योग के भविष्य तक कि विस्तार से की। इस दौरान उन्होंने पटना डेयरी प्रोजेक्ट को स्थापित करने में होने वाली दुष्वारियों से लेकर चुनौतीओ तक कि चर्चा की, इस दौरान उन्होंने अपने साथ कार्य करने वाले सहयोगीयों के योगदान को भी प्रखरता से रखते हुए कहा कि सुधीर कुमार सिंह, धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव सहित 6 युवा डेयरी इंजीनियरों ने अगर साथ नहीं दिया होता तो वह मुकाम हाशिल न होता। बिहार में डेयरी उद्योग की वर्तमान स्थिति को देखकर संतोष व्यक्त करते हुए कुछ सुझाव भी दिए …

आइए जानते है उनसे हमारे बिहार संपादक से हुई बातचीत
सवाल-1- आपका डेयरी उद्योग में कैसे आना हुआ
जबाब- मैं 1959 में खड़कपुर से बीएससी इंजीनियरिंग किया , जब मैं पढ़ने गया तो मुझे प्रतिदिन 2 किलो दूध पीने की आदत थी परंतु बंगाल में उस वक्त दूध उस मात्रा में उपलब्ध नहीं रहता था या आसानी से उपलब्ध नहीं हो पता था , जिसके कारण हमने घर पत्र लिखा कि मैं वापस आ रहा हूँ । घर वापस आने के बाद पिताजी के समझाने पर मैं वापस खड़गपुर गया और अपनी पढ़ाई पूरी की इसके बाद हम वापस पंजाब आ गए । मेरा दूध के क्षेत्र में लगाव् बचपन से ही था परंतु बंगाल में रहने के उपरान्त कुछ ज्यादा ही हो गया ।
खड़गपुर से वापस आने के बाद एनडीआरआई करनाल में मेरा एडमिशन हो गया 1964 में मैं वहाँ 2 साल पढ़ाई किया उसके उपरांत स्कॉलरशिप मिली तो मैं 1964 में अमेरिका चला गया। वहाँ मैंने डेयरी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। वहाँ से वापिस आने पर पहला जॉब राजस्थान में किया जहाँ डेयरी का नाम भी लोग नहीं जानते थे, अथक परिश्रम से वहाँ मैंने सेंटर स्थापित कर सफलता पूर्वक संचलान करवाया।
सवाल-2- बिहार कैसे आना हुआ?
जबाब-बिहार में मै सीधा नहीं आया बल्कि बंगाल के रास्ते आया। राजस्थान के बाद मुझे बंगाल में कार्य करने का मौका मिला। वहाँ डेयरी उद्योग की स्थिति बहुत दयनीय थी। मैं वहाँ एक चैलेंज के रूप में लिया और पैकेजिंग शुरू करवाया, पहली दूध की टैंकर गुजरात से कोलकाता के लिए शुरू करवाया। धीरे-धीरे वहाँ स्थिति पटरी पर आनी शुरू हो चुकी थी। इसी दरम्यान मुझे ख़बर दी गई कि आपको बिहार जाना है, वहाँ डेयरी उधोग को संभालना है, उंस वक़्त सिर्फ़ पटना में डेयरी था। बिहार के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। तब मैं यह सोच कर आया कि 15 दिन तक देखूंगा फिर तय करूँगा की यहाँ कार्य करना है या नही।
पटना पहुँचा तो देखा कि यहाँ 3000 लीटर दूध पर 368 कर्मचारी कार्य कर रहे थे, इसके अलावा कई अन्य ज़रूरियात चीजे थी जिसमे बदलाव किये बगैर सम्भव न था सुचारू रूप से संचालन करना और इसे करने के लिए मेरे हाथ खुले होने चाहिए। उंस वक़्त की तत्कालीन सरकार भी चाहती थी की हर हाल में डेयरी उद्योग मज़बूत हो। इस विषय पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में मुझे पूरी तरह से समर्थन प्राप्त हुआ और 1-10-1981 को मैं प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यभार सम्भाला तथा अगले 7 वर्षो तक 1-7-1987 को यहाँ से सेवानिवृत्त होकर चला गया।
सवाल-3- आपको आपके कार्यकाल में किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
जबाब-हँसते हुए, चुनौतियाँ तो ट्रक के भाव से थी, जिधर देखो उधर ही समस्या, शुरू कहाँ से करें ये सबसे बड़ी समस्या थी। खैर मैं तय किया और सरकार को बोला मुझे मात्र 68 कर्मचारी चाहिए बाक़ी को आप कही और नियुक्त करिये, सरकार तैयार हो गई और क्रमवद्ध तरीके से उन्हें अन्य विभागों में पदस्थापित कर दिया गया। इसके बाद मैं करनाल से मेरे छात्र रहे बिहार के 6 लड़कों को अपने यहाँ रखा, सभी के सभी अत्यंत कर्मठ और समर्पित थे। जिनमें एक सुधीर कुमार सिंह पटना डेयरी के प्रबंध निदेशक रहे और एक धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव मिथिला डेयरी के प्रबंध निदेशक से सेवानिवृत्त हुए। हम सभी ने मिलकर प्रण लिया कि चाहे जो करना पड़े परन्तु डेयरी को उच्च स्तर पर लेकर जाएगे।

आपको कुछ वाकया सुनता हूँ।
दूध के कलेक्शन से लेकर सप्लाई का था। दुध के लिए किसानों को तैयार करना, फिर उसे डेयरी तक लाना और बाज़ार को भेजना, यह किसी पहाड़ तोड़ने से कम नहीं था। मैं सबसे पहले अपने अधिकारियों को बोला आप लोग के शरीर से गोबर की सुंगध मुझे चाहिए, इसके लिए आप लोगों को एक रात किसानों के साथ गुजारनी होगी। पहले तो मुश्किल हुई पर बाद में यह रूटीन बन गया। जिसका परिणाम हुआ कि दूध का कलेक्शन बढ़ने लगा।
कई बार समस्या ऐसी आती थी जिसका अनुमान नहीं रहता था। एक बार बिहार में एक मशहूर त्यौहार था, हमलोग तैयारी कर रहे थे अचानक प्लांट के स्टाफ एक साथ सामुहिक अवकाश का दरख्वास्त दे दिए। किसी को समझ नहीं आ रहा था अब आगे कैसे करें। मैं अपने 6 लोगों को बुलवाया और पूछा क्या तुंम लोग भी अवकाश पर जा रहे या मेरे साथ रहोगे ? उन्होंने बोला सर हम सब आपके साथ है। तब मैंने बोला फिर तैयार हो जाओ सारा कार्य अब हमलोगों को करना है। दूध पैकेजिंग से लेकर सप्लाई तक का, तुमलोग कर पाओगे? सुधीर और श्रीवास्तव सबसे आगे आये और बोले सर हम सब कर लेंगे। इसके बाद मैं सारे कर्मचारियों का अवकाश स्वीकार कर लिया। स्वीकार करते प्लांट में हड़कंप मच गया, सारे भागे-भागे आये बोले सर हम लोग नहीं जा रहे है। मैं उन्हें बोला आप लोग पर्व मना कर आइए आप सबका अवकाश स्वीकार हो चुका है और इन अवकाश की तनख्वाह न मिलेगी। एक रात हम 7 लोग मिल कर प्लांट चलाये। सुधीर पैकिंग पर थे, श्रीवास्तव सहित बाक़ी सारे डिस्पेच से लेकर अन्य कार्य किये।
दूसरे दिन कुछ कर्मचारी मेरे दफ्तर के दरवाजे पर खड़े थे कि सर माफ़ करिये हम अब कार्य करेंगे और कुछ राजनेताओं के सहायता से सरकार तक पहुँच गए। मुझे बुलाया गया, मैं बोला प्लांट में जब तक हुँ तबतक मेरी मर्जी चलेगी, इनको तीन दिन का तनख्वाह नहीं मिलेगा। प्लांट मुझे चलाना है चलाने दीजिये। अंततः सरकार ने मेरे बात को मान ली। उसके बाद सभी दफ्तर पहुँचे
मैं उन सबसे लिखित लिया कि आज के बाद भविष्य में कभी ऐसी गलती न करोगे। सबने लिखित दिया उसके बाद से फिर कभी ऐसे हलात से सामना न हुआ।
इसके अलावा पहली बार मैं कम्प्यूटर को डेयरी में प्रयोग किया, एकाउंट की बहुत समस्या थी, उसे सुलझाया और इस स्तर तक ले गया जिससे सरकार को पहली बार किसी संस्थान को A++ रेटिंग देनी पड़ी।
ऐसे सैकड़ो किस्से है जिनसे जूझना पड़ा। कर्मचारियों के आन बान शान के लिए कई बार ऐसे-ऐसे लोगों से सामना करना पड़ा जिसकी कल्पना आज कोई न कर सकता।
सवाल-4-आज आप बिहार में दूध के क्षेत्र में हुए विकास को कैसे देखते है और भविष्य में क्या उमीद रखते है ?
जबाब-आज मैं 86 वर्ष का हो चुका हूँ, बहुत सारी यादें धूमिल हो चुकी है या विस्मृत हो रही है परन्तु आज बिहार में डेयरी का विकास देख कर मन खुश है। मैं तमाम कर्मचारियों अधिकारियों और सरकार को बधाई देता हूँ। डेयरी का भविष्य उज्ज्वल है। इसमे अभी बहुत कुछ करने की गुंजाइश है। इसे और अधिक ऊँचाई पर जाना है। किसानों के पेमेट सिस्टम में बहुत सुधार हुआ है परंतु और करने की आवश्यकता है। डेयरी उद्योग में महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ाने की आवश्यकता है। किसान और उसका परिवार समृद्ध होगा तो डेयरी उद्योग आसमान की बुलंदियों पर रहेगा।
मेरी सभी को शुभकामनाएँ, कठोर परिश्रम करिये और बिहार के डेयरी उद्योग को देश में सर्वश्रेष्ठ बनाने में कोई कसर न छोड़िए।
धन्यवाद
डॉ. जगजीत सिंह पुंजराथ से हमारे बिहार संपादक की वार्ता का यह पहला अंक है जो बिहार दिवस पर प्रकाशित किया जा रहा है। अगले अंक में उनकी राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त हुई उपलब्धियों के साथ उनके देश व्यापी कार्यो अनुसंधानों को शामिल करेगे।
साक्षात्कार–केशव , फोटोग्राफी–रविन्द्र कुमार







