राजनीति की बात हो और ‘जयचंद’ का जिक्र न हो तो कहानी कुछ अधूरी लगती है. कई बार कुछ सियासी परिवार भी ऐसे ‘जयचंदों’ के जाल में फंसकर परेशानी महसूस करते हैं. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिवार में भी आजकल ‘जयचंद’ की चर्चा हो रही है. परिवार और पार्टी से बेदखल किए गए उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर तेजस्वी यादव को अर्जुन और खुद को कृष्ण बताते हुए ‘जयचंद’ का जिक्र किया है. जब से तेज प्रताप यादव ने ‘जयचंद’ का जिक्र किया है तब से ही सियासी गलियारे में चर्चा हो रही है कि आखिर यह ‘जयचंद’ कौन है जिसके बारे में तेज प्रताप यादव बताना चाहते हैं.
रविवार को तेज प्रताप यादव ने दो सोशल मीडिया में दो पोस्ट किया. तेजस्वी यादव को संबोधित करते हुए एक में लिखा, मेरे अर्जुन से मुझे अलग करने का सपना देखने वालों ,तुम कभी अपनी साजिशों में सफल नहीं हो सकोगे,कृष्ण की सेना तो तुम ले सकते हो लेकिन खुद कृष्ण को नहीं. हर साजिश को जल्द बेनकाब करूंगा. बस मेरे भाई भरोषा रखना मैं हर परिस्थिति में तुम्हारे साथ हूं,फिलहाल दूर हूं लेकिन मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ था और रहेगा. मेरे भाई मम्मी पापा का ख्याल रखना,जयचंद हर जगह है अंदर भी और बाहर भी.
इसके पहले तेज प्रताप यादव ने माता-पिता लालू यादव और राबड़ी देवी को इंगित करते हुए लिखा, मेरे प्यारे मम्मी पापा….मेरी सारी दुनिया बस आप दोनों में ही समाई है।भगवान से बढ़कर है आप और आपका दिया कोई भी आदेश।आप है तो सबकुछ है मेरे पास।मुझे सिर्फ आपका विश्वास और प्यार चाहिए ना कि कुछ और।पापा आप नही होते तो ना ये पार्टी होती और ना मेरे साथ राजनीति करने वाले कुछ जयचंद जैसे लालची लोग. बस मम्मी पापा आपदोनो स्वस्थ और खुश रहे हमेशा.
बात इतिहास की, चर्चा ताजा विवाद की
परिवार और पार्टी से बेदखल किए गए तेज प्रताप यादव ने दोनों ही पोस्ट में ‘जयचंद’ का जिक्र किया है. दरअसल, जयचंद को भारतीय इतिहास में विवादास्पद व्यक्ति के रूप में जाना जाता जिसको विश्वासघात के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. अब चलते हैं 2023 में जब तेज प्रताप यादव के एक बयान ने अपनी हत्या की साजिश का आरोप लगाते हुए हड़कंप मचा दिया था. उन्होंने मीडिया से बातचीत में 23 अगस्त 2023 को कहा था कि उनकी जान को खतरा है. उन्होंने तब भी एक संकेत दिया था और इस आरोप के बाद सियासी गलियारे में हलचल मच गई थी. इसके पहले 2022 में 25 अप्रैल को उन्होंने राजद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया था, तब भी उन्होंने बड़ा इशारा किया था. उनका सीधा संकेत उसे शख्स की ओर था जिससे बिहार के सियासी गलियारे में आज सभी जानते हैं.
दरअसल, राजद में तेज प्रताप यादव की तेजस्वी यादव के बेहद करीबी कहे जाने वाले राज्यसभा सांसद संजय यादव से कभी नहीं बनी. अब जब बार-बार ‘जयचंद’ का जिक्र आ रहा है तो कड़ियों की लड़ियां जुड़ती जा रही हैं और इस बात से की चर्चा सियासी गलियारों में काफी जोर पर है कि तेज प्रताप यादव जिस ओर इशारा कर रहे हैं क्या वह संजय यादव ही हैं? बिहार की राजनीति को जानने समझने वाले सभी इस बात से वाकिफ हैं कि राजद में तेज प्रताप यादव और संजय यादव से एक तरह की अदावत चलती है.
तेज प्रताप यादव को नहीं सुहाते संजय यादव
बता दें कि हरियाणा के रहने वाले संजय यादव तेजस्वी यादव के मित्र हैं और उनके राजनीतिक सलाहकार भी कहे जाते हैं. अब वह राज्यसभा के सांसद भी हैं और तेजस्वी यादव के करीबी तो हैं ही. लेकिन, यह भी सत्य है कि तेज प्रताप यादव को वह नहीं सुहाते हैं. वर्ष 2022 और 2023 की दोनों की घटना में जब तेज प्रताप यादव ने जान से मारने की साजिश के आरोप लगा और पार्टी जब से इस्तीफा देने का जब उन्होंने ऐलान किया था, तब भी उन्होंने संजय यादव की ओर इशारा किया था.







