बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन मामले में चुनाव आयोग की तरफ से लोगों को बड़ी राहत मिली है. अब कागजात के बगैर भी गणना प्रपत्र जमा करा सकते हैं. विपक्ष लगातार चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन के मामले का विरोध कर रहा था. इसी बीच इलेक्शन कमीशन ने यूटर्न लेते हुए फैसला लिया है कि अब गणना पत्र बिना दस्तावेजों के भी भरा जा सकेगा. जिसके बाद निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी यानी बीएलओ स्थानीय जांच या अन्य साक्ष्य के आधार पर फैसला करेंगे. ऐसे में विपक्ष के 9 जुलाई को बिहार बंद के ऐलान पर सवाल उठ रहा है.
मतदाता तत्काल केवल गणना फॉर्म भरेंगे
बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) विनोद सिंह गुंजियाल ने कहा कि मतदाता तत्काल केवल गणना फॉर्म ही भरकर बीएलओ के पास जमा करा दें, उनका नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल हो जाएगा. 2003 के बाद मतदाता बनने वाले गणना फॉर्म को सही-सही भरकर, अपनी तस्वीर चिपका कर और अपना हस्ताक्षर कर बीएलओ
के पास तय समय में जमा करवा दें.
4.96 करोड़ वोटर सत्यापित
गणना फॉर्म प्राप्त कर बीएलओ तत्काल उसे ऑनलाइन अपलोड कराएंगे. उन्होंने बताया कि राज्य के 2003 के मतदाता सूची में अंकित कुल 7.90 करोड़ मतदाताओं में 4.96 करोड़ को पहले से ही कोई भी दस्तावेज देने की बाध्यता नहीं है. शेष करीब तीन करोड़ मतदाताओं से ही दावा-आपत्ति के दौरान विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाकर दस्तावेज लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.







