तेजस्वी यादव और संजय यादव की दोस्ती ने हिला दी लालू परिवार की ‘जमीन’!

तेजस्वी यादव के राजनीतिक रणनीतिकार और सलाहकार संजय यादव को लेकर लालू परिवार में विवाद गहराता दिख रहा है. तेज प्रताप यादव तो पहले से संजय यादव की भूमिका पर सवाल खड़े करते रहे हैं, लेकिन अब राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी बिना नाम लेते हुए […]

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शनिवार, 20 सितंबर 2025, 09:45 AM 5 मिनट read
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तेजस्वी यादव और संजय यादव की दोस्ती ने हिला दी लालू परिवार की ‘जमीन’!
Photo: UB India News Archive
तेजस्वी यादव के राजनीतिक रणनीतिकार और सलाहकार संजय यादव को लेकर लालू परिवार में विवाद गहराता दिख रहा है. तेज प्रताप यादव तो पहले से संजय यादव की भूमिका पर सवाल खड़े करते रहे हैं, लेकिन अब राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी बिना नाम लेते हुए संजय यादव की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं. लेकिन, सवाल यह है कि तेजस्वी यादव आखिर संजय यादव से कितना जुड़े हुए हैं, कब से इनका साथ है, कैसे इनकी दोस्ती इतनी गहरी हो गई है जो लालू परिवार में दरार की वजह बनती दिख रही है. आखिर संजय यादव की तेजस्वी यादव के जीवन में कैसी भूमिका है? संजय यादव और तेजस्वी यादव का साथ कितना पुराना, कितना गहरा और कितना विवादित रहा है?

संजय यादव का तेजस्वी यादव से कैसे हुआ जुड़ाव

बता दें कि संजय यादव राज्यसभा सांसद हैं और राजद (RJD) के तेजस्वी यादव के सलाहकार‑रणनीतिकार के रूप में चर्चित रहे हैं. उनकी दोस्ती और साझेदारी की शुरुआत उस समय मानी जाती है जब लालू प्रसाद यादव को जेल हुई थी (चारा घोटाला मामले में) और पार्टी की बागडोर तेजस्वी यादव को संभालनी पड़ी थी. उस समय तेजस्वी के साथ काम करने के लिए संजय यादव पटना आए थे और धीरे‑धीरे उनकी भूमिका तेजस्वी के ‘आंख‑नाक‑कान’ जैसी मानी जाने लगी. लेकिन, संजय यादव की यही स्थिति लालू परिवार के भीतर विवाद का कारण बन गई है.

तेजस्वी यादव के लिए संजय यादव रही रणनीतिक भूमिका

राजनीति के जानकारों के अनुसार, संजय यादव ने रुझान बदलने की कोशिश में तेजस्वी यादव को ‘युवा, आधुनिक नेता’ के रूप में स्थापित करने में मदद की है. पार्टी की छवि को लालू‑परंपरा से जुड़ी पुरानी शैली से जोड़ने के बजाय सामाजिक‑आर्थिक न्याय, युवा, पिछड़ा वर्ग जैसे मुद्दों पर जोर देने में उनकी भूमिका देखी जाती रही है. संजय यादव की अगुवाई में बनाई गई यह रणनीति तेजस्वी यादव को पार्टी नेतृत्व में मजबूत स्थिति दिलाने का माधय्म बनी है.

तेज प्रताप से शुरू हुआ असंतोष और विवादों का सिलसिला

हालांकि, संजय यादव की भूमिका बढ़ी तो तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने संजय यादव की भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों पर संजय यादव की इशारा करते हुए ‘जयचंद’ जैसे शब्दों से संबोधित किया है.तेज प्रताप यादव ने कभी उनका नाम नहीं लिया लेकिन, इशारों में संजय के प्रभाव और लड़ाई के अंदाज को आलोचनात्मक नजरिए से हमेशा दिखाने की कोशिश की. दरअसल, जानकार बताते हैं कि परिवार के अंदर ऐसी भावनाएं उभरना इस बात की चेतावनी है कि संजय यादव के बढ़ते प्रभाव से कुछ सदस्यों को लगता है कि नेतृत्व का परंपरागत कब्जा कहीं बदल तो नहीं रहा है!

रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया और नया राजनीतिक विवाद

हाल ही में ‘बिहार अधिकार यात्रा’ के दौरान एक फोटो वायरल हुआ जिसमें संजय यादव प्रचार बस की उस फ्रंट सीट पर बैठे दिखे, जहां परंपरागत रूप से नेता (तेजस्वी यादव) बैठते हैं. इस फोटो को एक सोशल मीडिया यूजर ने देखा और लिखा कि ‘फ्रंट सीट सदैव शीर्ष नेता के लिए होती है… अगर कोई खुद को उससे ऊपर समझे तो क्या कहा जाए!’ इसे रोहिणी आचार्य ने अपने फेसबुक पर शेयर किया और बिना किसी टिप्पणी के ही राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी. यह माना गया कि वह संजय यादव की भूमिका से असंतुष्ट हैं. हालांकि, बाद में राजद की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी दिखाई दी और दो दलित नेताओं को इसी सीट पर बिठाकर कहानी की दिशा मोड़ने की कवायद भी हुई, लेकिन तब तक तो राजनीति की कहानी में अलग ही ट्विस्ट आ चुका था.

बिहार चुनाव को लेकर संगठन और परिवार पर प्रभाव

दरअसल, राजद और लालू परिवार के बीच यह विवाद तब आया है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां चरम पर हैं. इस बीच राजद के अंदर एकता और नेतृत्व की स्पष्टता जनता के लिए एक मुद्दा हो सकता है. वहीं, राजद में यह साफ दिख रहा है कि अगर संजय यादव की भूमिका एक रणनीतिकार से ज्यादा हो जाएगी तो पारिवारिक शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है. लेकिन, यह बड़ा तथ्य और सत्य है कि संजय यादव की भूमिका बढ़ी है और यह सिर्फ राजनीतिक सलाह देने तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व की उपस्थिति, कार्यक्रमों में नजर आने, सार्वजनिक रूप से पद और सम्मान से जुड़ी सीमा से आगे बढ़ती हुई दिख रही है और इस कारण ही यह विवाद का विषय बना है.

संजय यादव की भूमिका और लालू परिवार की चुनौती?

बहरहाल, यह वास्तविकता है कि राजद के अंदरूनी समीकरणों में संजय यादव की बढ़ी हुई भूमिका चुनावी रणनीति, पार्टी छवि और नेतृत्व समर्थन में स्पष्ट है. लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद संजय यादव ने तेजस्वी यादव की राजनीतिक छवि बनाने और संगठन को मजबूत करने के लिए बहुत काम किये हैं. लेकिन, परिवार के वरिष्ठ सदस्यों में असमंजस और नाराज़गी भी पनप रही है यह भी बड़ी हकीकत है. तेज प्रताप यादव और मीसा भारती पहले ही बयान दे चुके हैं. रोहिणी आचार्य का हालिया पोस्ट और फोटो ने संकेत दिया कि राजद के भीतर नेतृत्व, सम्मान और रणनीतिक सलाह देने वालों की भूमिका पर संतुलन को लेकर टकराव अब खुलकर सामने आ गया है.जाहिर है बिहार चुनाव को देखते हुए यह विवाद राजद की एकता और नेतृत्व की विश्वसनीयता के लिए बड़ी चुनौती भी है.
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