बैठकों में मुख्य रूप से उन सीटों पर मंथन हो रहा है, जहां बीजेपी दूसरी पोजीशन पर रही थी. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) कई जगह मजबूत प्रदर्शन करने के बावजूद जीत से दूर रह गई. आंकड़ों के मुताबिक, कुल 243 विधानसभा सीटों में से लगभग 68 सीटों पर बीजेपी दूसरे स्थान पर रही. सबसे ज्यादा सीटें सीमांचल इलाके में थीं, जिसमें अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिले शामिल हैं. यह इलाका लंबे समय से महागठबंधन, खासकर आरजेडी और कांग्रेस का गढ़ रहा है. यहां बीजेपी ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन जीत नहीं हासिल कर सकी. दिलचस्प बात यह रही कि बीजेपी की कई हार बहुत ही छोटे अंतर से हुई.
- लगभग 68 सीटों पर एनडीए दूसरे स्थान पर रही
- पार्टी लगभग 5 सीटों पर 500 वोट से भी कम अंतर से हारी.
- 11 सीटों पर हार का अंतर 1000 वोट से कम रहा.
- करीब 40 से 45 सीटें ऐसी थीं जहां बीजेपी 5000 वोट से भी कम अंतर से हारी.
- इन करीबी हारों में नालंदा, गोपालगंज, भोजपुर, आरा, भागलपुर और पूर्णिया जैसे इलाके शामिल थे. कुछ प्रमुख सीटें जैसे हिलसा (नालंदा), बारबिघा (आरा), भोरे (गोपालगंज) और बछवाड़ा (बिहारशरीफ क्षेत्र) में हार का अंतर 1000 वोट से भी नीचे रहा
शाह की बैठकों में यह तय किया जा रहा है कि एंटी-इनकंबेंसी झेल रहे विधायकों के क्षेत्रों में लोगों को कैसे शांत किया जाए और नए मुद्दों के जरिए माहौल अपने पक्ष में कैसे बनाया जाए. साथ ही एनडीए के सहयोगी दलों के साथ तालमेल को और मजबूत करने पर भी चर्चा हो रही है. पार्टी चाहती है कि गठबंधन में किसी तरह की खटपट न दिखे और सभी दल मिलकर चुनाव लड़ें.क्यों अहम है यह दौरा?
2020 के चुनाव में बीजेपी ने काफी करीबी मुकाबलों में हार झेली थी. अगर वह इन छोटे-छोटे अंतर वाली सीटों पर जीत दर्ज कर लेती तो नतीजे काफी अलग होते. यही वजह है कि अमित शाह का यह दौरा पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. वह कार्यकर्ताओं को जोश दिलाने के साथ यह भी बता रहे हैं कि अगले चुनाव में जीत उन्हीं सीटों से तय होगी, जहां पिछली बार हार बहुत मामूली अंतर से हुई थी.







