तारीख- 27 सितंबर 2025 को कोसी और सीमांचल से चुन-चुन कर घुसपैठियों को खदेड़ना है। इसके लिए बिहार में फिर NDA की सरकार बनना जरूरी है। हमें 160 सीटों पर जीत दिलानी है। यह बातें अमित शाह ने अररिया में कही। मतलब कल तक जो NDA विधानसभा चुनाव में 225 सीट जीतने का टारगेट लेकर चल रहा था, उसे अब घटाकर 160 सीट कर दिया गया।
चुनाव से करीब महीने भर पहले अमित शाह ने क्यों NDA के टारगेट को घटाया? इसका क्या असर पड़ेगा? महागठबंधन की अब क्या रणनीति होगी?
गृह मंत्री अमित शाह ने 160 से ज्यादा सीटें जीतने की बातें कब और कहां कही?
27 सितंबर को अररिया के फारबिसगंज में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘इस बार आप सबको चार दिवाली मनानी है।
पहली- प्रभु श्रीराम के अयोध्या में लौटने की खुशी में।
दूसरी- जीविका दीदियों के खाते में 10,000 रुपए आने की खुशी में।
तीसरी- 395 से अधिक सामान पर GST में आई कमी की खुशी में।
चौथी- दीपावली बिहार में NDA को 160 सीट पर जिताने की खुशी में मनानी है।’
जबकि, इससे एक दिन पहले 26 सितंबर को पटना के भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में नेताओं से शाह ने कहा था, ‘2025 में हमारा लक्ष्य 225 सीटों पर जीत हासिल करना है। ऐसे में प्रत्येक सीट पर कम से कम 225 बार जनसंपर्क करें।’
225 का टारगेट कब तय हुआ था…
- 28 अक्टूबर 2024 को CM आवास में नीतीश कुमार की अध्यक्षता में NDA नेताओं की बैठक हुई थी। इसमें सभी बड़े लीडर थे।
- बैठक के बाद पत्रकारों से JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि 220 से ज्यादा सीटों को जीतने का लक्ष्य रखा गया है। तब JDU ने ‘2025 में 225 और फिर से नीतीश’ का नारा दिया।
- एक महीने बाद 25 नवंबर 2024 को JDU ऑफिस में NDA में शामिल पांचों पार्टियों (JDU, BJP, LJP(R), HAM और RLM) के प्रदेश अध्यक्षों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
- प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने 225 सीट जीतने पर जोर दिया। तब से विधानसभा स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के हर कार्यक्रम में 225 सीटों की बातें कही गई।
अमित शाह ने टारगेट 225 से घटाकर 160 सीटें क्यों कर दी?
इसकी 3 बड़ी वजहें हैं…
1. शाह ने हवाई नहीं, जमीनी टारगेट रखा
अमित शाह कोई भी टारेगट काफी रिसर्च और सोच-समझकर तय करते हैं। वह जो तय करते हैं, वहां तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। बिहार चुनाव में भी उन्होंने काफी सोच-समझकर 160 से ज्यादा सीटों का टारगेट फिक्स किया है। जो काफी हद तक व्यावहारिक है। मतलब जमीनी टारगेट है।’
क्योंकि…
- 2010 में NDA ने अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था। 243 में से 206 सीटें जीती थी। तब विपक्ष बिखरा हुआ था। लेफ्ट अलग, कांग्रेस अलग और लालू अलग।
- अभी विपक्ष एकजुट है। उनके साथ मल्लाह के तौर पर मुकेश सहनी, कांग्रेस और लेफ्ट की तीनों पार्टियां हैं। सबका थोड़ा-थोड़ा आधार है।
- 2020 में चिराग पासवान NDA से बाहर थे। तब कुछ सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई हुई थी। अभी चिराग NDA में हैं, लेकिन प्रशांत किशोर एक फैक्टर बनाते दिख रहे हैं।
- इस बार भी बिहार में चुनाव 2020 की तरह ही होता दिख रहा है। उस वक्त दोनों गठबंधनों के बीच सिर्फ 11,150 वोटों का अंतर रह गया था।
- चुनाव में शाह जमीनी हकीकत के करीब रहना चाहते हैं। ताकि कार्यकर्ता जमीन पर मजबूती से काम करें।

2. सर्वे रिपोर्ट में कांटे की टक्कर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शाह ने टारगेट में कटौती ग्राउंड से मिले फीडबैक और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर की है। भाजपा के अपने सर्वे, फीडबैक और संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि 225 का दावा जमीन पर काम नहीं करेगा। भाजपा के अंदर कॉन्फिडेंस की कमी है। लगातार बैठक करने के बाद शाह को लग गया है कि 225 सीटों की बातें यथार्थ से बहुत दूर है।’
- पार्टी के पास अंदरूनी रिपोर्ट है कि प्रशांत किशोर NDA को नुकसान कर रहे हैं। नुकसान की भरपाई के लिए ही नीतीश कुमार ने लोगों के लिए खजाना खोल दिया है। कर्ज लेकर 125 यूनिट फ्री बिजली और महिलाओं को 10 हजार रुपए दे रहे हैं।’
- 14 सिंतबर को जारी सर्वे एजेंसी वोट वाइब की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल में बिहार में NDA और महागठबंधन में कांटे की टक्कर है। NDA सिर्फ 0.4% वोट शेयर से ही आगे है। NDA को 36.2%, महागठबंधन को 35.8% और प्रशांत किशोर को 8.7% वोट मिल सकता है।
3. लोकसभा चुनाव जैसा हाल न हो
2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 400 पार का नारा दिया था। विपक्ष ने इसे संविधान बदलने से जोड़कर प्रचारित किया, जिससे बीजेपी को नुकसान हुआ। इससे सीख लेकर अमित शाह ने रणनीति बदली है।’
- ‘243 में 225 सीटें जीतने का लक्ष्य भी लोगों के मन में डर फैला सकता है। लोग ये सोच सकते थे कि पता नहीं भाजपा क्या करना चाहती है?’
- ‘नीतीश कुमार के समर्थक भी असमंजस में रहते। उनको लगता कि कहीं भाजपा अपना मुख्यमंत्री तो नहीं बनाना चाहती। इस सबसे बचने के लिए 160 से अधिक सीटों की बातें कही गई है।’
- ‘खास बात याद रखिए, शाह ने दो तिहाई बहुमत यानी 162 सीट से नीचे का फीगर दिया। मतलब साफ है कि वह सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं के मन में कोई कंफ्यूजन नहीं रखना चाहते।’

शाह ने 160 सीटों का टारगेट को पब्लिकली क्यों बताया है?
पॉलिटिकल एनालिस्ट कहते हैं, ‘शाह के ऐसा कहने पर NDA कार्यकर्ता जागेंगे और मेहनत करेंगे। टारगेट 225 रहने से संभावना थी कि कार्यकर्ता रिलेक्स हो जाते। घरों में सो जाते। जैसा-लोकसभा चुनाव में 400 पार के नारे के बाद हुआ था। बिहार चुनाव में ऐसा कतई नहीं चाहते हैं। इसलिए वह टारगेट कम कर अपने लोगों को सचेत कर रहे हैं।’‘फिलहाल भाजपा में बाहर से आए नेताओं का बोलबाला बढ़ा है। पहले के खांटी भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं में मायूसी है। उनको जगाने के लिए शाह ने ऐसा किया है। मायूस कार्यकर्ता भी नहीं चाहेगा कि सत्ता हाथ से चली जाए।’
पिछले चुनाव मने 2020 में NDA ने क्या टारगेट रखा था और कितना हासिल हुआ?
NDA ने 243 में से 200 सीटें जीतने का टारगेट रखा था। मतलब दो तिहाई बहुमत से अधिक, लेकिन चुनाव में 125 सीटें ही जीत पाया। बहुमत से सिर्फ 3 सीट अधिक।
टारगेट क्या था…
- 2020 में विधानसभा चुनाव से 8 महीने पहले 22 फरवरी 2020 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने JDU की बैठक में कहा था कि इस बार चुनाव में NDA 200 से ज्यादा सीटें जीतेगा। आप वोट की चिंता मत कीजिए। बिहार की जनता सही और गलत की पहचान रखती है।
- इसके बाद भाजपा और JDU नेताओं ने कई रैलियों में दावा किया था कि जनता के समर्थन से 200+ सीटें जीतकर सरकार बनाई जाएगी।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों ने अपने भाषणों में बार-बार कहा था कि NDA आराम से बहुमत पार करेगा।
रिजल्ट कैसा रहा…
NDA को 125 सीटें मिलीं। इसमें भाजपा 74, JDU 43, HAM 4 और VIP को 4 सीटें मिली थी।
शाह के बयान का NDA पर क्या असर होगा?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि शाह के इस बयान से NDA का अंदरुनी झगड़ा खत्म हो सकता है। पॉलिटिकल एनालिस्ट कहते हैं, ‘NDA में अभी सीटों का पेच फंसा हुआ है। अगले हफ्ते तक सीटों के बंटवारा होने की उम्मीद है। ऐसे में शाह के टारगेट कम करने के ऐलान के बाद BJP की सहयोगी पार्टियां JDU, चिराग, जीतन राम मांझी को मैसेज जाएगा कि स्थिति कंफर्टेबल नहीं है। जल्दी से सीटों पर समझौता हो। कड़ी टक्कर में भाजपा के संसाधन की ज्यादा जरूरत होगी है।’
‘भाजपा इसके माध्यम से सहयोगी दलों को संकेत भी दे सकती है कि लड़ाई कांटे की है, इसलिए रणनीति के तहत सबको सीटों पर समझौता करना होगा। हमारा मकसद आपको दबाना नहीं, बल्कि गठबंधन को संतुलित रखना है।’
‘हर चुनाव की तरह इस बार JDU कॉन्फिडेंस में नहीं दिख रही है। वह चुनाव लड़ती हुई भी नहीं दिख रही है। भाजपा ज्यादा आक्रामक नजर आ रही है। ऐसे में शाह ने इशारों में सबको सचेत किया है कि सत्ता में रहना है तो एकजुट हो जाइए।’
शाह के बयान का महागठबंधन पर क्या असर होगा?
‘महागठबंधन यह प्रचार कर सकता है कि BJP को अपनी हार का डर है, इसलिए अब टारगेट घटा रही है। यह विपक्ष के लिए मनोबल बढ़ाने वाला मुद्दा बन सकता है।’ वह कहते हैं, ‘जनता यह भी सोच सकती है कि BJP को जीत का भरोसा पहले जैसा नहीं है। इससे वोटरों के बीच लहर वाली छवि थोड़ी धुंधली पड़ सकती है।’







