सीमांचल-अंग-तिरहुत की 61 सीटों पर वोटिंग 11 नवंबर को ………

बिहार विधानसभा चुनाव में सेकेंड फेज की 122 सीटों पर 11 नवंबर को वोटिंग होनी है। इस दौरान सीमांचल, अंग और तिरहुत की कुल 61 सीटों पर वोटिंग होगी। सीमांचल कांग्रेस-RJD का गढ़ माना जाता है, हालांकि रुझानों में सीटों की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। तिरहुत में NDA का […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 4 नवंबर 2025, 10:19 AM 10 मिनट read
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सीमांचल-अंग-तिरहुत की 61 सीटों पर वोटिंग 11 नवंबर को ………
Photo: UB India News Archive

बिहार विधानसभा चुनाव में सेकेंड फेज की 122 सीटों पर 11 नवंबर को वोटिंग होनी है। इस दौरान सीमांचल, अंग और तिरहुत की कुल 61 सीटों पर वोटिंग होगी। सीमांचल कांग्रेस-RJD का गढ़ माना जाता है, हालांकि रुझानों में सीटों की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। तिरहुत में NDA का दबदबा कायम रहेगा, ऐसे रुझान हैं।

इन 61 सीटों में AIMIM की इकलौती सीट अमौर भी शामिल है। इसके अलावा धमदाहा से नीतीश सरकार में मंत्री लेसी सिंह, बलरामपुर से अपनी सादगी के लिए फेमस CPI-ML के कैंडिडेट महबूब आलम और चनपटिया से विवादित यूट्यूबर मनीष कश्यप जन सुराज के टिकट से मैदान में हैं। सिकंदरा, कहलगांव और सुल्तानगंज तीन ऐसी सीटें हैं, जहां RJD और कांग्रेस के कैंडिडेट आमने-सामने हैं।

रुझानों की खास बातें

1. सीमांचल, अंग और तिरहुत की 61 सीटों में NDA लीड लेता नजर आ रहा है। 2020 के चुनाव में भी NDA ही मजबूत था। उसने 41 सीटें जीती थीं। इस बार NDA 44 पर आगे नजर आ रहा है।

2. महागठबंधन अब भी सीमांचल में मजबूत है। 2020 में महागठबंधन ने यहां 14 सीटें जीती थीं। इस बार 15 सीटों पर आगे है।

3. असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने 2020 में 5 सीटें जीती थीं। इस बार पार्टी सिर्फ एक सीट पर आगे नजर आ रही है। उसकी बाकी 4 सीटों पर RJD और कांग्रेस आगे हैं।

दूसरे फेज की 122 सीटों के रुझानों की खास बातें

1. इस फेज में NDA फायदे में नजर आ रहा है। 2020 के चुनाव में NDA ने इन 122 सीटों में से 66 सीटें जीती थीं, इस बार NDA 77-82 सीटों पर आगे नजर आ रहा है।

2. खास बात ये है कि BJP ने 2020 में यहां 42 सीटें जीती थीं, इस बार वो 40-41 पर आगे है। उधर, JDU को फायदा हो रहा है। JDU ने 2020 में 20 सीटें जीती थीं। इस बार पार्टी 28-33 सीटों पर आगे है। चिराग की LJP-R भी 3 सीटों पर आगे है।

3. महागठबंधन को इस फेज में 7 से 14 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। 2020 में उसके पास 49 सीटें थीं, लेकिन इस बार महागठबंधन की पार्टियां 35-42 सीटों पर ही आगे नजर आ रही हैं।

4. RJD को 7 से 12 सीटों का नुकसान हो सकता है। 2020 में उसने यहां 33 सीटें जीती थीं, लेकिन अब 21-27 सीटों पर आगे है। कांग्रेस अपनी 11 सीटें बचाती नजर आ रही है। हालांकि CPI-ML की सीटें 5 से घटकर 2-3 होती नजर आ रही हैं।

5. 2020 में सीमांचल में 5 सीटें जीतने वाली AIMIM सिर्फ एक सीट पर आगे है। 2 सीटें ऐसी हैं जिन पर जन सुराज के कैंडिडेट भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

रुझानों पर क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स

1. सीमांचल में कांग्रेस-RJD मजबूत, लेकिन NDA को बढ़त

‘नॉर्थ बिहार में बिहार की 70% मुस्लिम आबादी रहती है। इसी में सीमांचल आता है। यहां चुनाव के आखिर में मुद्दे, जाति पीछे छूट जाते हैं। सिर्फ हिंदू-मुस्लिम इलेक्शन रह जाता है। महागठबंधन में RJD और कांग्रेस को यहां फायदा मिलेगा।’

‘छपरा बेल्ट में BJP फंसी हुई है। चंपारण में 2015 में BJP का पत्ता साफ हुआ था, लेकिन यहां BJP अब भी मजबूत है। सुपौल-सहरसा में JDU को बढ़त है। सीमांचल-मधेपुरा में 50-50% बैटल होने की संभावना है। साउथ बिहार में NDA को हल्की बढ़त है। पूरे नॉर्थ बिहार की बात करें तो वहां NDA को बढ़त मिल सकती है।’

‘कांग्रेस डबल डिजिट से भी नीचे आकर 9 सीटों पर सिमट सकती है। उसे खराब टिकट डिस्ट्रीब्यूशन भारी पड़ने वाला है।’ ‘कांग्रेस ने शुरू से ही महागठबंधन में CM का चेहरा घोषित नहीं किया, इससे असमंजस की स्थिति बनी। हालत ये है कि 8 जगह फ्रेंडली फाइट है। इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना होगा।’

‘चिराग पासवान के आने से NDA को फायदा होगा, लेकिन मुकेश सहनी के महागठबंधन में आने के बावजूद उनका वोट बैंक वापस नहीं आ पा रहा है। चिराग के आने से पासवान वोट बैंक संगठित होकर NDA को वोट करेगा। उधर मुकेश सहनी का वोट बहुत हद तक पहले से ही NDA में शिफ्ट हो चुका है।’

‘वोटर अधिकार यात्रा, बिहार में 14 दिनों की थी। राहुल गांधी करीब 1300 किलोमीटर चले। वे 24-25 जिलों में गए। इस यात्रा ने कांग्रेस को थोड़ी ताकत दी है।’

3. JDU की वापसी के पीछे महिला वोट और स्कीम्स

 ग्राउंड पर महिलाएं अब भी नीतीश के साथ हैं। वे कहते हैं, ‘जमीन पर नीतीश कुमार का असर है। BJP का संगठन उसकी ताकत है। महिला वोट NDA के साथ हैं।’

‘नीतीश कुमार काफी लोकप्रिय हैं, खासकर महिलाओं के बीच। पुरुष वोटर्स में कुछ शिकायतें हैं कि नीतीश कुमार की सेहत ठीक नहीं है, लेकिन महिलाएं उन्हें बहुत पसंद करती हैं। उन्होंने नीतीश की स्कीम को 10 हजारिया नाम दिया है, जो महिलाओं में काफी चर्चित है।’

‘10 हजार रुपए सीधे अकाउंट में जा रहे हैं। फ्री बिजली का असर भी लोगों को दिख रहा है। इसमें दो राय नहीं कि इससे कहीं न कहीं वोटर प्रभावित हुए हैं। उनके मन में एक डर भी है कि नीतीश सरकार या NDA नहीं आएगी, तो 10 हजार रुपए मिलना बंद हो जाएंगे।’

4. नीतीश के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी नहीं

‘तेजस्वी के लिए सबसे बड़ी मुश्किल है कि 20 साल बाद भी नीतीश के खिलाफ कोई एंटी-इनकम्बेंसी नहीं है।

‘नरेंद्र मोदी अब भी बिहार में सबसे लोकप्रिय नेता हैं। उनका मजबूत छवि का नैरेटिव चल रहा है, जो किसी खास जाति से नहीं जुड़ा है। NDA को इसका भी फायदा होने वाला है।’

‘वोटिंग बिहेवियर की भविष्यवाणी करना मुश्किल है, लेकिन BJP की लहर, नीतीश कुमार का चेहरा और गठबंधन की ताकत NDA को आगे रख रही है। फिलहाल BJP की एक लहर है और फिर नीतीश का बिहार में चेहरा बोलता है। ऐसे में एज तो NDA की तरफ ही है।’

बड़ी सीटों का रुझान

1. सिर्फ अमौर में आगे चल रही AIMIM

2020 के चुनावों में 5 सीटें जीतने वाली असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM इस बार सिर्फ अमौर सीट पर ही आगे नजर आ रही है। यहां सिटिंग विधायक अख्तरुल ईमान आगे चल रहे हैं। अख्तरुल का मुकाबला JDU के सबा जफर से है।

वजह 1. इस सीट पर 70% मुस्लिम वोट हैं। अख्तरुल ईमान खुद सुरजापुरी मुसलमान हैं और इस कम्युनिटी की इस सीट पर सबसे ज्यादा आबादी है। ये अख्तरुल का वोट बैंक माना जाता है।

2. अख्तरुल की इमेज अच्छी है और उन्होंने इलाके में काफी काम किया है। लोगों के बीच काफी सक्रिय भी रहते हैं।

3. JDU उम्मीदवार सबा जफर कुल्हैया मुस्लिम हैं। इनकी इस सीट पर करीब 20% आबादी है। इन्हें हिंदू वोट भी संगठित होकर मिलेगा। यादव-दलित वोट इनके साथ गया, तो कड़ी टक्कर दे सकते हैं।

पिछला हिसाब-किताब

अमौर का राजनीतिक इतिहास बताता है कि इस सीट पर लोगों की पसंद लगातार बदलती रही है। यहां से सबसे ज्यादा 8 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। इसके बाद 4 बार निर्दलीय, 2 बार प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, 1-1 बार जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, BJP और AIMIM ने जीत दर्ज की है।

अमौर का चुनावी गणित पूरी तरह से इसके सामाजिक ताने-बाने पर निर्भर करता है। यहां मुस्लिम मतदाता करीब 2,19,122 यानी 69.8% हैं। अनुसूचित जाति (SC) मतदाता 12,871 (4.1%) और अन्य 26.1% हैं।

2. धमदाहा पर JDU की लेसी सिंह को बढ़त

पूर्णिया जिले की धमदाहा सीट से बिहार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री और JDU नेता लेसी सिंह मैदान में हैं। ये सीट हाई-प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बन गई है क्योंकि लेसी सिंह के पूर्व सहयोगी और पूर्णिया के पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा RJD के टिकट पर उन्हें चुनौती दे रहे हैं। हालांकि फिलहाल यहां से लेसी सिंह ही आगे हैं।

वजह 1. लेसी सिंह राजपूत हैं, राजपूत इस सीट पर उनका स्थायी वोट बैंक माने जाते हैं। इस पर कुशवाहा, कोइरी और कुर्मी जाति का 40% वोट हैं, जो JDU कैंडिडेट होने से इन्हें मिलता है।

2. लेसी सिंह ने पूर्णिया एयरपोर्ट, सड़क, बिजली जैसे विकास कार्य कराए हैं, जिससे इलाके में छवि अच्छी है। 5 बार से विधायक हैं। वंदे भारत ट्रेन चलवाने का श्रेय भी मिल रहा है।

3. संतोष की जीत MY समीकरण का साथ मिलने और लेसी के समर्थकों को तोड़ने पर निर्भर करती है।

3. बलरामपुर में इस बार भी लाल सलाम

कटिहार जिले की बलरामपुर सीट को वामपंथी पार्टी CPI-ML का गढ़ माना जाता है। यहां से इस बार भी CPI-ML के उम्मीदवार महबूब आलम आगे चल रहे हैं। उनके सामने LJP-R की संगीता देवी हैं।

वजह 1. महबूब आलम की जीत में जातीय समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह क्षेत्र मुस्लिम और यादव बहुल है और लेफ्ट को यहां सभी वर्गों का समर्थन मिलता है।

2. NDA की तरफ से इस सीट पर LJP-R की संगीता देवी मजबूत उम्मीदवार हैं, लेकिन VIP के कैंडिडेट रहे वरुण झा के निर्दलीय खड़े होने से उनको नुकसान होगा।

3. AIMIM के आने से महबूब आलम को नुकसान हो सकता है, लेकिन इलाके में उनकी इमेज एक बेहद ईमानदार नेता की है। इसका उन्हें फायदा होगा।

पिछला हिसाब-किताब

बलरामपुर सीट 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद अस्तित्व में आई थी। यह सीट कटिहार लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। बलरामपुर सीट पर पहला चुनाव 2010 में हुआ था। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार दुलाल चंद्र गोस्वामी ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने CPI-ML के महबूब आलम को हराया था। 2015 और 2020 में यहां से महबूब आलम ने जीत दर्ज की।

4. जन सुराज के उम्मीदवार स्टार यूट्यूबर मनीष कश्यप पीछे

पश्चिमी चंपारण की चनपटिया सीट बीते 20 साल से BJP का गढ़ है, लेकिन इस बार यहां सबकी निगाहें जन सुराज के कैंडिडेट फेमस यूट्यूबर मनीष कश्यप पर टिकी हैं। हालांकि रुझानों में इस बार भी BJP उम्मीदवार उमाकांत सिंह ही आगे चल रहे हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के उम्मीदवार अभिषेक रंजन हैं।

वजह 1. चनपटिया विधानसभा सीट पर ब्राह्मण-भूमिहार और यादव वोटरों का दबदबा है। मुस्लिम वोटरों की भी अच्छी संख्या हैं। भूमिहार और कोइरी भी निर्णायक भूमिका में हैं। NDA का कास्ट इक्वेशन सबसे मजबूत है।

2. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना, 125 यूनिट फ्री बिजली योजना और जीविका के 10 हजार मिलने का काफी असर इलाके में NDA के पक्ष में है।

3. मनीष कश्यप पॉपुलर हैं, लेकिन उनके BJP से जन सुराज में आने से उनके समर्थकों में नाराजगी है।

पिछला हिसाब-किताब

चनपटिया सीट पहले बेतिया लोकसभा का हिस्सा थी, लेकिन 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिश के बाद ये पश्चिमी चंपारण में शामिल की गई। 1990 से पहले तक इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा था, बाद में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यहां से 1980, 1985 और 1995 में जीतने में कामयाब रही। साल 2000 के बाद से BJP यहां 6 बार चुनाव जीत चुकी है।

 

 

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