कल बिहार एक और हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबले के लिए तैयार , क्या यहीं से निकलेगा सत्ता का रास्ता ! ………………………

बिहार एक और हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबले के लिए तैयार है। 6 नवंबर 2025 को होने वाले पहले चरण के मतदान में कुल 121 सीटों पर वोटिंग होगी, लेकिन सभी की निगाहें VVIP सीटों पर टिकी हैं, जहां उम्मीदवार बड़ा है, तो मुकाबला कड़ा है। वैशाली के राघोपुर में यादव वंश की विरासत दांव पर है। […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 5 नवंबर 2025, 06:01 AM 11 मिनट read
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कल बिहार एक और हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबले के लिए तैयार , क्या यहीं से निकलेगा सत्ता का रास्ता ! ………………………
Photo: UB India News Archive

बिहार एक और हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबले के लिए तैयार है। 6 नवंबर 2025 को होने वाले पहले चरण के मतदान में कुल 121 सीटों पर वोटिंग होगी, लेकिन सभी की निगाहें VVIP सीटों पर टिकी हैं, जहां उम्मीदवार बड़ा है, तो मुकाबला कड़ा है। वैशाली के राघोपुर में यादव वंश की विरासत दांव पर है। वहीं, तारापुर एक रणनीतिक रणक्षेत्र बन चुका है। लखीसराय में विजय सिन्हा चुनौती दे रहे हैं। इसके अलावा, अलीनगर का संगीतमय आकर्षण और मोकामा में बाहुबल की टक्कर इस चुनावी चरण को रोमांचक बनाती है। तेजस्वी यादव, सम्राट चौधरी और तेज प्रताप यादव जैसे दिग्गजों के मैदान में होने से वर्चस्व की ये लड़ाई पूरे राज्य का ध्यान खींच रही है और हर वोट निर्णायक साबित होगा।

कल कुल 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान होगा और 3 करोड़ 75 लाख से अधिक मतदाता 1314 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे. इनमें 122 महिला प्रत्याशी भी मैदान में हैं. इस चरण की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि नीतीश मंत्रिपरिषद में शामिल करीब आधे मंत्रियों के परफॉर्मेंस की परीक्षा इसी फेज में होनी है. पहले फेज का चुनाव राज्य के दोनों प्रमुख गठबंधनों के लिए ‘सियासी दिशा तय करने वाला चरण’ माना जा रहा है, क्योंकि एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन का सीधा टकराव का सियासी सीन बनता दिख रहा है.

राघोपुर: ‘यादव गढ़’ में दांव पर तेजस्वी की प्रतिष्ठा

वैशाली जिले की ये सीट लालू प्रसाद यादव परिवार का पारंपरिक गढ़ रही है। लालू यादव ने खुद 1995 और 2000 में और राबड़ी देवी तीन बार यहां से जीत हासिल कर चुकी हैं। वर्तमान में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (उपमुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता रह चुके) 2015 से यहां के विधायक हैं। हालांकि, 2010 में बीजेपी के सतीश कुमार यादव ने राबड़ी देवी को हराकर एक बार गढ़ ढहाया था। इस बार ये सीट तेजस्वी यादव (RJD), सतीश कुमार यादव (BJP) और जन सुराज पार्टी के चंचल सिंह के बीच त्रिकोणीय मुकाबले का मैदान है।

महुआ: तेज प्रताप की ‘जनशक्ति’ की परीक्षा

यादव, अनुसूचित जाति (21.17%) और मुस्लिम (15.10%) मतदाताओं के मजबूत आधार वाली वैशाली की इस सीट पर इस बार लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने आरजेडी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका है। 2015 में तेज प्रताप ने ये सीट जीती थी, लेकिन 2020 में वो हसनपुर (समस्तीपुर) चले गए थे। आरजेडी से बाहर किए गए तेज प्रताप अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ के टिकट पर महागठबंधन के ही वर्तमान विधायक मुकेश कुमार रौशन (RJD) के खिलाफ मैदान में हैं। संजय सिंह (LJP, NDA) की मौजूदगी ने इस मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय बना दिया है।

तारापुर: जेडीयू के किले में बीजेपी की रणनीति

मुंगेर जिले की तारापुर पारंपरिक रूप से जेडीयू का मजबूत गढ़ रहा है। लेकिन इस बार बीजेपी ने अपनी रणनीति बदलते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आरजेडी के अरुण कुमार के खिलाफ मैदान में उतारा है। कुशवाहा, यादव, मुस्लिम और अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी वाली ये सीट एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लड़ाई का केंद्र है। 2020 में यहां से जेडीयू के मेवा लाल चौधरी ने 63,463 वोटों से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार सम्राट चौधरी के मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है।

लखीसराय: चुनावी गठजोड़ से निपटने की चुनौती

लखीसराय सीट से उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा चौथी बार चुनावी मैदान में हैं। इससे पहले वो यहां से जीत हैट्रिक लगा चुके हैं। इस बार उनका मुकाबला महागठबंधन में कांग्रेस प्रत्याशी अमरेश कुमार अनीश से है। 2020 में भी लखीसराय सीट पर विजय सिन्हा और अमरेश कुमार अनीश आमने सामने थे। तब कांग्रेस प्रत्याशी अमरेश कुमार अनीश को 10,483 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। 2020 में विजय कुमार सिन्हा को कुल 74,212 वोट मिले थे। अमरेश कुमार अनीश को 63,729 वोट प्राप्त हुए थे। 2020 में पूर्व विधायक फुलैना सिंह और सुजित कुमार भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे, तब फुलैना सिंह को 10,938 और सुजित कुमार 11,570 वोट मिले थे। अबकी बार फुलैना सिंह और सुजित कुमार ने कांग्रेस प्रत्याशी अमरेश कुमार अनीश का समर्थन किया है।

अलीनगर: गायिका मैथिली ठाकुर की राजनीतिक पारी

दरभंगा जिले की अलीनगर सीट पर इस बार बीजेपी ने शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित और लोकप्रिय गायिका मैथिली ठाकुर को टिकट दिया है। उनका मुकाबला आरजेडी के विनोद मिश्रा से है। 2020 में वीआईपी के मिश्री लाल यादव ने यहां जीत हासिल की थी, लेकिन इससे पहले ये सीट आरजेडी का मजबूत आधार रही है। मैथिली ठाकुर की लोकप्रियता और आरजेडी की पुरानी पकड़ के बीच ये सीट दिलचस्प बन गई है।

हसनपुर: तेज प्रताप की पिछली जीत का वारिस

समस्तीपुर की हसनपुर सीट 2020 में तेज प्रताप यादव के यहां से जीतने के कारण सुर्खियों में आई थी, जिन्होंने निवर्तमान मंत्री राज कुमार राय (JDU) को 21,139 वोटों के अंतर से हराया था। इस बार, ये सीट आरजेडी की माला पुष्पम और राज कुमार राय (JDU) के बीच सीधी टक्कर का गवाह बनेगी। तेज प्रताप के यहां से बाहर जाने के बाद दोनों पार्टियों के लिए ये सीट प्रतिष्ठा का विषय बन चुकी है।

मोकामा: बाहुबल के साथ हाई-प्रोफाइल टक्कर

पटना से करीब 100 किलोमीटर दूर मोकामा सीट पर चुनावी लड़ाई सबसे ज्यादा घमासान है। जेडीयू के बाहुबली नेता अनंत सिंह और आरजेडी उम्मीदवार वीणा देवी (सूरजभान सिंह की पत्नी) आमने-सामने हैं। अनंत सिंह दो दशकों से इस इलाके में राज कर रहे हैं, लेकिन हाल ही में दुलारचंद यादव की हत्या के आरोप में उनकी गिरफ्तारी ने माहौल को और गरमा दिया है। इस सीट पर भूमिहार, धानुक, राजपूत, कुर्मी, दलित और मुस्लिम वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी की एंट्री ने इस मुकाबले को त्रिकोणीय और दिलचस्प बना दिया है, जिससे ये विधानसभा चुनाव 2025 की सबसे गर्म और हाई-प्रोफाइल लड़ाइयों में से एक बन गई है।

पहले चरण में सियासी समीकरण

महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) की ओर से आरजेडी 72 सीटों पर, कांग्रेस 24 सीटों पर और लेफ्ट दल 14 सीटों पर मैदान में हैं. वहीं एनडीए (BJP-JDU गठबंधन) की तरफ से जेडीयू 57 सीटों पर, बीजेपी 48 सीटों पर, एलजेपी (रामविलास) 13 सीटों पर और आरएलएम (उपेंद्र कुशवाहा) ने 2 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. इसके अतिरिक्त हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) 1 सीट पर चुनाव लड़ रही है.

फर्स्ट फेज में तीसरी ताकतों का भी जलवा

मुख्य मुकाबले से अलग तीसरी सियासी धुरी भी तेजी से उभर रही है. असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम इस बार पहले चरण में 8 सीटों पर लड़ रही है, जबकि चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी और स्वामी प्रसाद मौर्य की संगठन पार्टी ने भी अपने प्रत्याशी उतारे हैं. इसके अलावा प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी इस फेज में 119 सीटों पर मैदान में है-यानी लगभग हर सीट पर उसने मुकाबले को त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय बना दिया है.

पिछले चुनाव का गणित: बराबरी की टक्कर

बता दें कि 2020 के विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो इन 121 सीटों में से 61 पर महागठबंधन ने जीत दर्ज की थी, जबकि एनडीए को 59 सीटें मिली थीं. मतलब यह कि मुकाबला पूरी तरह समान शक्ति संतुलन वाला था. तब एलजेपी ने अकेले चुनाव लड़ा था और महज एक सीट हासिल कर पाई थी. खास बात यह कि इन 121 सीटों में सबसे ज्यादा 42 सीटें आरजेडी के खाते में थीं, जबकि 32 सीटें बीजेपी ने जीती थीं. जेडीयू ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 27 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं, वीआईपी को 4 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं.

जेडीयू के लिए निर्णायक है पहला चरण

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए यह चरण बेहद अहम माना जा रहा है. वर्ष 2020 में उनकी पार्टी के जो 43 विधायक जीतकर आए थे, उनमें से 23 विधायक इसी पहले चरण की सीटों से चुने गए थे, यानी जेडीयू की आधी से अधिक राजनीतिक ताकत यहीं से निकलती है. अब जबकि 20 साल से शासन की सत्ता-विरोधी लहर और नई पीढ़ी की आकांक्षाओं से नीतीश का सामना है, ऐसे में यह चरण उनके लिए राजनीतिक अस्तित्व की परीक्षा बन गया है.

तेजस्वी यादव के लिए भी ‘रेपुटेशन फेज’

वहीं, तेजस्वी यादव और महागठबंधन के लिए भी यह फेज बेहद महत्वपूर्ण है. पिछली बार जिन 121 सीटों पर चुनाव हुए थे, उनमें से 61 सीटें इंडिया ब्लॉक के हिस्से में गई थीं. अब जब महागठबंधन में सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे पर असंतोष दिखा और कई जगहों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ चल रही है (6 सीटों पर), तब यह चरण तेजस्वी की रणनीति और पकड़ दोनों की परीक्षा बनेगा.

बड़ी टक्कर: सीट-दर-सीट रोचक मुकाबले

जेडीयू की 57 सीटों में 36 सीटों पर उसका सीधा मुकाबला आरजेडी से, 13 सीटों पर कांग्रेस से, 7 सीटों पर लेफ्ट दलों से और 2 सीटों पर वीआईपी से है. वहीं, बीजेपी की 48 सीटों में 23 पर आरजेडी, 13 पर कांग्रेस और कुछ सीटों पर एलजेपी (रामविलास) तथा जनसुराज से दिलचस्प मुकाबला है. एलजेपीआर को 10 सीटों पर आरजेडी और 5 सीटों पर बीजेपी से सीधी टक्कर है. उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम के दोनों प्रत्याशियों का मुकाबला आरजेडी से होगा.

इन मंत्रियों की परीक्षा भी इसी चरण में

पहले चरण में नीतीश सरकार के कई मंत्री मैदान में हैं. इनमें बीजेपी कोटे के 11 और जेडीयू कोटे के 5 मंत्री शामिल हैं. बीजेपी के प्रमुख मंत्रियों में सिवान से स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे, बख्तियारपुर से सड़क मंत्री नितिन नवीन, तारापुर से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, लखीसराय से डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, दरभंगा से नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा, दरभंगा से ही राजस्व मंत्री संजय सरावगी, कुढ़नी से पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, साहिबगंज से पर्यटन मंत्री राजू कुमार, अमनौर से आईटी मंत्री कृष्ण कुमार मंटू, बिहारशरीफ से पर्यावरण मंत्री सुनील कुमार और बछवारा से खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता शामिल हैं.

जेडीयू के इन मंत्रियों की किस्मत आजमाइश

वहीं, जेडीयू के प्रमुख मंत्रियों में सराय रंजन से जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी,नालंदा से ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, बहादुरपुर से समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी, कल्याणपुर से जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी और सोनबरसा से मंत्री रमन सदा की साख दांव पर है.

कुशवाहा-पासवान फैक्टर से एनडीए मजबूत

पिछली बार अकेले मैदान में उतरने वाले चिराग पासवान इस बार एनडीए के साथ लौट आए हैं और उपेंद्र कुशवाहा की वापसी ने भी जेडीयू को जातीय गणित के लिहाज से राहत दी है. दोनों नेताओं का साथ मिलना एनडीए के लिए खासकर दक्षिण और मध्य बिहार में काउंटर बैलेंसिंग फैक्टर का काम करेगा.

तीसरे पक्ष की चुनौती और ‘एंटी इनकंबेंसी’

हालांकि, मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा दिखता है, लेकिन तीसरी पंक्ति के रूप में उभर रही जनसुराज, एआईएमआईएम और आजाद समाज पार्टी जैसी ताकतें कई सीटों पर निर्णायक वोट-कटवा की भूमिका निभा सकती हैं. इससे पारंपरिक जातीय समीकरणों में इधर-उधर होना तय है.

नीतीश-तेजस्वी के लिए ‘पॉलिटिकल लिटमस टेस्ट’

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण सिर्फ वोटों की लड़ाई नहीं, बल्कि सियासी संतुलन और भविष्य की सरकार की दिशा तय करने वाली परीक्षा बन गया है. यह चरण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, दोनों के लिए ‘पॉलिटिकल लिटमस टेस्ट’ साबित होने वाला है. वजह साफ है यहीं से नीतीश की सत्ता की नींव सबसे मजबूत रही है और यहीं से तेजस्वी के गठबंधन ने पिछले चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं. अब जब दोनों ओर से ‘गठबंधन के भीतर असंतोष’ और ‘बाहर से चुनौती’ दोनों मौजूद हैं तो यह फेज तय करेगा कि बिहार की सियासत किस करवट बैठेगी.
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