बिहार में नीतीश कुमार की वापसी तय! RJD बन सकती है सबसे बड़ी पार्टी !

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों का मतदान पूरा हो चुका है और अब सभी की निगाहें 14 नवंबर को आने वाले नतीजों पर टिकी है. इस बीच Axis My India का एग्जिट पोल सामने आया है. एक्सिस माय इंडिया सर्वे के अनुसार बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनती दिख रही […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 13 नवंबर 2025, 05:02 AM 15 मिनट read
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बिहार में नीतीश कुमार की वापसी तय! RJD बन सकती है सबसे बड़ी पार्टी !
Photo: UB India News Archive
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों का मतदान पूरा हो चुका है और अब सभी की निगाहें 14 नवंबर को आने वाले नतीजों पर टिकी है. इस बीच Axis My India का एग्जिट पोल सामने आया है. एक्सिस माय इंडिया सर्वे के अनुसार बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनती दिख रही है, जबकि आरजेडी (RJD) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है. सर्वे के अनुसार NDA गठबंधन को 121 से 141 सीटें मिल सकती हैं. वहीं महागठबंधन (INDIA Bloc) को 98 से 118 सीटों का अनुमान है. वहीं, अन्य दलों को 5 से 10 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. यानी कि सर्वे के नतीजे बताते हैं कि मुकाबला कड़ा है, लेकिन बहुमत की रेखा पार करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला NDA सरकार बनाने की स्थिति में है.
RJD सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी
Axis My India के सर्वे में दिलचस्प बात यह है कि तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी को 67 से 76 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है. यानी सीटों के लिहाज से RJD सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है, लेकिन महागठबंधन का आंकड़ा बहुमत से दूर है. वहीं जेडीयू को भी फायदा मिलता दिख रहा है. जेडीयू को 56 से 62 सीटें मिलती दिख रही है. वहीं BJP को 50 से 56 सीटें मिलने का अनुमान है.

Axis My India के अनुसार किसको कितनी सीटें?

NDA: 121-141
BJP- 50-56
JDU-56-62
LJPR- 11-16
HAM- 2-3
RLM- 2-4
महागठबंधन: 98-118
आरजेडी- 67-76
कांग्रेस- 17-21
लेफ्ट (एमएल)- 10-14
वीआईपी- 3-5
जेडीयू को फायदा
सर्वे के मुताबिक, जेडीयू (JDU) को इस बार 2020 की तुलना में हल्का सुधार दिख रहा है. एनडीए का वोट शेयर करीब 44 से 46 प्रतिशत के बीच बताया गया है. वहीं, महागठबंधन का वोट शेयर 42 से 44 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है- यानी मुकाबला बेहद करीबी है.

मुंबई के बुकीज का डिटेल एनालिसिस

मुंबई सट्टा बाजार के ताजा अनुमानों के अनुसार, NDA को बिहार में 147 से 150 सीटें मिल सकती हैं। इसका मतलब है कि सट्टा बाजार नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA की वापसी को लगभग तय मान रहा है। सट्टा बाजार के अनुसार महागठबंधन (RJD, कांग्रेस और वाम दल) को 86-89 सीटें मिलने की उम्मीद है।

सट्टा बाजार का अनुमान है कि भाजपा को 70–72 और जेडीयू को 62–64 सीटें मिल सकती हैं। ऐसा हुआ तो भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आएगी। वहीं, नीतीश कुमार की जेडीयू को 60 से अधिक सीटें मिलने का मतलब है कि बिहार में NDA गठबंधन में स्थिरता रहेगी।

दूसरी ओर RJD को 66-68 सीटें मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर मुंबई सट्टा बाजार NDA को स्पष्ट बढ़त (147–150 सीटें) दे रहा है। वहीं, महागठबंधन 100 के अंदर सिमटता दिख रहा है।

सट्टा बाजार के भाव ग्राउंड रिपोर्ट, सोशल मीडिया ट्रेंड और उम्मीदवारों की छवि जैसे पहलुओं पर आधारित होते हैं। सट्टेबाजी भारत में अवैध है, लेकिन विश्लेषक इसे चुनावी हवा का एक “अनौपचारिक बैरोमीटर” मानते हैं। इस बार यह हवा पूरी तरह NDA के पक्ष में बह रही है।

एक रोचक बात यह भी है कि महागठबंधन के लिए मुंबई का भाव 1:1 है। यह फलोदी से बेहतर दिख रहा है, जहां महागठबंधन को 88-91 सीटें दी गई हैं। इससे पता चलता है कि मुंबई के सटोरियों का आत्मविश्वास थोड़ा कम हो गया है, लेकिन फिर भी महागठबंधन की स्थिति कमजोर दिख रही है। मुंबई सट्टा बाजार के मुताबिक, इस बार 1.5 लाख करोड़ रुपए का सट्टा पूरे बिहार में लगाया गया है।

मुंबई सट्टा बाजार के अनुमान और भाव

पार्टी/गठबंधन अनुमान Odd/Even भाव
NDA 150 1
महागठबंधन 89 1
BJP 70-72 1.97
JDU 62-64 1.97
RJD 66-68 1.97

दूसरे चरण की वोटिंग के बाद मुंबई के सटोरियों का आत्मविश्वास थोड़ा कम हुआ। NDA के भाव में गिरावट आई (150 से 139-145) और महागठबंधन के भाव में बढ़ोतरी (89 से 94-97)। हालांकि, यह बदलाव मामूली है और NDA की जीत पर विश्वास अभी भी बरकरार है।

मुंबई सट्टा बाजार में Odd/Even सीटों पर भाव

मुंबई सट्टा बाजार में एक दिलचस्प स्थिति है कि Odd और Even सीटों पर दांव एक समान है।

  • BJP के लिए: Odd 1.97, Even 1.97
  • JDU के लिए: Odd 1.97, Even 1.97
  • RJD के लिए: Odd 1.97, Even 1.97

समान भाव का मतलब है कि मुंबई के सटोरियों को लगता है कि किसी भी पार्टी की सीटें ODD या EVEN कोई भी हो सकती हैं। इसका अर्थ है कि सीटों की संख्या में थोड़ा-बहुत उतार-चढ़ाव हो सकता है। जैसे-

  • BJP को 70 सीटें हो सकती हैं (Odd) या 71 सीटें (Even)
  • JDU को 62 सीटें (Odd) या 63 सीटें (Even)
  • RJD को 66 सीटें (Odd) या 67 सीटें (Even)

मुंबई बाजार vs अन्य बाजारों की तुलना

सट्टा बाजार NDA सीटें महागठबंधन सीटें इसलिए महत्वपूर्ण
मुंबई 147-150 86-89 सबसे आशावादी NDA के लिए
दिल्ली 142-145 88-91 राजधानी का प्रभाव
फलोदी 140-145 88-91 सबसे पुराना, सटीकता के लिए प्रसिद्ध
हापुड़ 138-145 93-100 कम आशावादी
भोपाल 140-145 90-95 औसत अनुमान

अन्य प्रमुख सट्टा बाजारों का अनुमान

फलोदी सट्टा बाजार (राजस्थान): राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित फलोदी शहर का सट्टा बाजार सबसे सटीक माना जाता है। इस बाजार ने 2020 के बिहार चुनाव में NDA को ठीक 125 सीटें दी थीं। यह सटीक साबित हुई।​​

फलोदी के लेटेस्ट अनुमान

  • NDA: 140-145 सीटें
  • BJP: 68-71 सीटें
  • JDU: 58-61 सीटें
  • महागठबंधन: 88-91 सीटें
  • RJD: 67-71 सीटें
  • कांग्रेस: 13-15 सीटें​​

दिल्ली सट्टा बाजार: राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस और चांदनी चौक के सट्टा बाजार ने भी NDA को बड़ी बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया है।

  • NDA: 142-145 सीटें
  • BJP: 69-71 सीटें
  • JDU: 59-61 सीटें
  • महागठबंधन: 88-91 सीटें
  • RJD: 67-69 सीटें​

हापुड़ और आगरा सट्टा बाजार (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश का हापुड़ अवैध सट्टेबाजी का बड़ा केंद्र है। यहां के सिटी प्लाजा मार्केट और फ्यूचर्स ट्रेडिंग सेंटर के अनुमान हैं-​

  • NDA: 138-145 सीटें
  • महागठबंधन: 93-100 सीटें

हापुड़ में NDA की जीत पर ₹1 के दांव पर 80 पैसे का रिटर्न मिल रहा है, जबकि महागठबंधन पर ₹1.25 का भाव है।​ ​

क्या हैं अन्य प्रमुख सट्टा बाजार के अनुमान?

भोपाल (मध्य प्रदेश):

NDA- 140-145 सीटें

महागठबंधन- 90-95 सीटें

गुजरात के शहरों के सट्टा बाजार का अनुमान

गुजरात के पांच शहर- ऊंझा, मेहसाना, अहमदाबाद, सूरत और राजकोट में भारी सट्टेबाजी हो रही है।​ सट्टा बाजार के अनुसार किस पार्टी को कितनी सीटें मिल रही हैं?

NDA गठबंधन

  • BJP: 68-85 सीटें
  • JDU: 45-61 सीटें
  • LJP (R): 4-6 सीटें
  • HAM और अन्य: 2-4 सीटें
  • कुल: 135-145 सीटें​

महागठबंधन

  • RJD: 67-78 सीटें
  • कांग्रेस: 13-17 सीटें
  • वाम दल: 3-6 सीटें
  • कुल: 88-115 सीटें​

अन्य

  • जन सुराज (प्रशांत किशोर): 0-2 सीटें
  • AIMIM (ओवैसी): 2-3 सीटें​
जदयू ऑफिस पहुंचकर नीतीश कुमार ने पार्टी के लोगों से मुलाकात की। (फाइल फोटो)
जदयू ऑफिस पहुंचकर नीतीश कुमार ने पार्टी के लोगों से मुलाकात की। (फाइल फोटो)

नीतीश के CM फेस को लेकर क्या भाव है?

फलोदी सट्टा बाजार में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने का भाव 40 से 45 पैसे चल रहा है। यह सट्टा बाजार में सबसे स्थिर और मजबूत भाव माना जा रहा है।​​

सट्टा बाजार की भाषा में भाव का मतलब

  • ₹1 से कम भाव: जीत की बहुत ज्यादा संभावना
  • ₹1 से ₹1.25: सामान्य संभावना
  • ₹2 से ऊपर: जीतने की बहुत कम संभावना​

नीतीश कुमार के सीएम बनने पर भाव 40-45 पैसे हैं। इसका मतलब है कि अगर कोई सटोरिया नीतीश के सीएम बनने पर 1000 रुपए लगाता है तो ऐसा होने के बाद उसे 1000 रुपए के साथ 400-450 रुपए और मिलेंगे। सट्टा बाजार में NDA के भीतर नीतीश के अलावा किसी अन्य नेता को CM चेहरा नहीं माना जा रहा है।​

क्या हंग असेंबली पर भी लग रहा दांव?

मुंबई के एक सटोरी ने बताया, ‘कुछ सट्टा बाजारों में हंग असेंबली पर भी दांव लगाए जा रहे हैं, लेकिन इसका भाव बहुत ऊंचा (करीब ₹8 से ₹10 प्रति रुपए) है। इसका मतलब है कि सटोरियों को हंग असेंबली की संभावना बहुत कम लग रही है।’​

फलोदी सट्टा बाजार के एक मुंबई बुकी के अनुसार, मुश्किल से 2-3% लोग ही हंग असेंबली पर दांव लगा रहे हैं। ज्यादातर लोग NDA की साफ जीत पर ही पैसा लगा रहे हैं।

दो चरणों के बाद क्या हैं सट्टा बाजार के भाव?

सट्टा बाजार का भाव हर घंटे बदलता है। बाजार आमतौर पर सुबह 10 बजे खुलता है और शाम 5 बजे तक चलता है। पहले चरण में रिकॉर्ड 65.08% मतदान के बाद, बाजार ने NDA को 140-145 सीटें और महागठबंधन को 90-95 सीटें दी थीं।

दूसरे चरण में 67.14% मतदान हुआ। इसके बाद भाव में मामूली बदलाव आया। वर्तमान अनुमान में NDA को 135-145 और महागठबंधन को 88-100 सीटें हैं।

पिछले दो विधानसभा चुनावों का क्या अनुमान था?

2020 बिहार चुनाव: 2020 के चुनाव में फलोदी सट्टा बाजार ने NDA को 125 सीटें दी थीं, जो बिल्कुल सटीक साबित हुई। यह सट्टा बाजार की सबसे बड़ी सफलता थी।​​ 2020 में ज्यादातर एग्जिट पोल गलत साबित हुए। टुडे चाणक्य ने तो महागठबंधन को 180 सीटें दी थीं, जो पूरी तरह गलत था।​

2015 बिहार चुनाव: सट्टा बाजार का अनुमान नाटकीय रूप से बदला। तीसरे चरण तक महागठबंधन को 145 सीटें, चौथे चरण के बाद NDA को 126 सीटें, पांचवें चरण के बाद NDA को 126 और महागठबंधन को 110​​ सीटें मिलने का अनुमान था। नतीजे आए तो महागठबंधन ने 178 सीटें जीतीं। NDA को केवल 58 सीटें मिलीं।​

दूसरे चरण की वोटिंग के बाद तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर काउंटिंग में गड़बड़ी नहीं होने देने की बात कही।
दूसरे चरण की वोटिंग के बाद तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर काउंटिंग में गड़बड़ी नहीं होने देने की बात कही।

सट्टा बाजार कैसे काम करता है?

अंडरवर्ल्ड पर एक दर्जन से ज्यादा किताबें लिख चुके मुंबई के सीनियर जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल ने कहा, ‘सिर्फ मुंबई के सट्टा बाजार से 4 हजार से ज्यादा सट्टेबाज जुड़े हैं। ये बहुत ही सिस्टेमैटिक तरीके से काम करते हैं। करीब 40 बड़े सट्टेबाज हैं, जो 1 हजार करोड़ से ऊपर का खेल चलाते हैं। ये सट्टेबाजी के पूरे कारोबार को कंट्रोल करते हैं। इनके लोग पूरे देश में फैले हैं।’

विवेक ने कहा, ‘सट्‌टेबाज हर पार्टी या गठबंधन की लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सीट का अनुमान लगाते हैं। ये अनुमान राज्य और शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। इसकी जानकारी टीम के एक या दो लोगों तक पहुंचाई जाती है। इसके बाद एक टीम इन नतीजों का एनालिसिस करती है। फिर इसे चुनाव की तारीख से एक महीने पहले ओपन करते हैं।’

विवेक आगे बताते हैं कि सट्टा बाजार का अनुमान अलग-अलग फैक्टर्स पर आधारित होता है। जैसे- ओपिनियन पोल, पिछले चुनावों के रुझान और वोटिंग के वक्त का माहौल।

सट्टेबाज कैसे लगाते हैं जीत-हार का अनुमान?

ग्राउंड रिपोर्ट के लिए स्थानीय लोग: बुकीज का दावा है कि उनके इन्फॉर्मर पूरे बिहार में फैले हैं। वे जमीनी हालात की जानकारी देते हैं। मुंबई के एक बुकी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘हमारे पास बिहार के हर जिले में लोग हैं। ये स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और व्यापारियों से बात करके हवा का रुख भांपते हैं।’

मतदाता का रुझान: हर चरण की वोटिंग के बाद मतदान प्रतिशत, विशेषकर महिला और युवा मतदाताओं के रुझान का विश्लेषण किया जाता है।

जातीय समीकरण: विभिन्न जातियों के वोट बैंक का गणित भाव तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।

रैलियों की भीड़: बड़े नेताओं की रैलियों में जुटने वाली भीड़ को भी एक संकेत माना जाता है।

दांव पर लग रहा कितना पैसा: किस पार्टी या उम्मीदवार पर कितना पैसा दांव पर लग रहा है, इससे भी भाव प्रभावित होता है।

विधानसभा चुनाव में 1-1.5 लाख करोड़ का सट्टा लगने की उम्मीद

अनुमान है कि इस बिहार विधानसभा चुनाव में 1-1.5 लाख करोड़ रुपए का सट्टा लग सकता है। ये अब तक का रिकॉर्ड है। इसके पहले के चुनावों में ज्यादातर 50 लाख करोड़ रुपए तक सट्टा लगा था।

अब ऑनलाइन हुई सट्टेबाजी

विवेक बताते हैं, ‘अब फोन पर सट्टेबाजी नहीं होती। ये पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है। सभी बुकी ऑनलाइन सट्टेबाजी पोर्टल और ऐप्स के सर्वर विदेशों में रखते हैं, ताकि पकड़े जाने के बावजूद उनका काम चलता रहे। ऑनलाइन सट्टेबाजी में पंटर को जितनी लिमिट मिलती है, उसके ऊपर उसे सौदे करने की इजाजत नहीं होती है।

सट्टेबाज बोला- सेंटिमेंट बदलने के लिए पार्टियां अपने हिसाब से रेट खुलवाती हैं

चुनाव पर सट्टेबाजी का खेल किस तरह चल रहा है, इसे लेकर दैनिक भास्कर ने एक सट्टेबाज से बात की। पहचान सामने न लाने की शर्त पर सट्टेबाज ने बताया कि किसी भी सट्टेबाजी में पैसा YES या NO दोनों पर लगता है।

हर राज्य के अनुमान अलग-अलग होते हैं। आप दो-चार पेटी (2-4 लाख) या दो-चार खोखा (2-4 करोड़) लगा सकते हैं। इसमें आप 50 खोखा (50 करोड़) भी लगा सकते हैं। पैसा घर पहुंचाने की गारंटी हमारी रहती है। शुरू में पार्टियां भी अपने हिसाब से रेट खुलवाती हैं, ताकि पब्लिक का सेंटिमेंट उनकी ओर जा सके। हालांकि, वोटिंग प्रोसेस खत्म होने के बाद रेट फेयर रहता है।

12 दिन पहले सट्टा लगे 15 हजार करोड़ रुपए

बुकी ने बताया कि हर शहर में 40-40 लोग चुनाव से पहले का अनुमान लगाने के लिए काम कर रहे हैं। ये न सिर्फ सीटों का रुझान बताते हैं, बल्कि वहां से पैसे उठाकर केरल, मुंबई और दिल्ली के सट्टा बाजार में लगाते हैं। इन चुनावों में कुल कितना पैसा लगा है, इसकी कोई गिनती नहीं है। हालांकि, 12 दिन पहले तक 15 हजार करोड़ रुपए लग चुके थे।

ऑनलाइन बेटिंग में सरकार को जाता है 30% कमीशन

अगर जीत गए तो पैसा घर तक कैसे पहुंचेगा? इस सवाल पर बुकी ने कहा कि अब पैसा ऑनलाइन सीधे खाते में पहुंचता है। पहले हवाला का इस्तेमाल किया जाता था। सरकार इन्हें ट्रेस नहीं कर पाती है। अब तो सरकार भी इसमें शामिल है। ऑनलाइन बेटिंग साइट्स के जरिए सरकार 30% कमीशन लेती है।

IPL में सट्टेबाजी का जिक्र करते हुए बुकी ने बताया, ‘हमें TV पर टेलीकास्ट होने से एक बॉल पहले ही पता चल जाता है कि मैच में क्या हुआ है। उसी के हिसाब से ऑनलाइन बेटिंग के लिए रेट खोला जाता है। हमें सिर्फ कमीशन से मतलब होता है। कोई जीते या हारे, दोनों ओर से फायदा हमारा होता है। हमें 20% का कमीशन मिलता ही है।’

ऑनलाइन से डार्क वेब तक: ऐसे चलता है सट्टेबाजी का नेटवर्क

पहले सट्टेबाजी मुख्य रूप से फोन कॉल्स या व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए होती थी, लेकिन अब यह हाई-टेक हो गया है।

पारंपरिक तरीके: फोन पर फोन नंबरों से दांव लगाना, नकद में लेन-देन और हवाला के जरिए पैसे का ट्रांसफर आज भी जारी है।

टेलीग्राम और वॉट्सऐप: सैकड़ों टेलीग्राम ग्रुप्स (“Bihar Election Satta Live” जैसे नामों से) पर लाइव भाव दिए जाते हैं। भुगतान के लिए UPI, क्रिप्टोकरेंसी और वॉलेट्स का इस्तेमाल होता है।

डार्क वेब और ऐप्स: Fairplay, JannatBook.com जैसी कई वेब-साइटें, जो फिलीपींस या यूएसए जैसे विदेशी सर्वरों पर होस्ट होती हैं, क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट लेती हैं। Bet365 जैसे अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर भी दांव लगाए जाते हैं।

‘फेक अकाउंट्स’ का जाल

डिजिटल रिस्क मैनेजमेंट कंपनी mFilterIt की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा धंधा ‘फेक अकाउंट्स’ पर चलता है। ये खाते कई बड़े बैंकों में खोले जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी रोजाना करीब 25,000 ऐसे UPI आईडी और फेक अकाउंट्स की पहचान करके बैंकों को रिपोर्ट करती है।

सट्टा अवैध, फिर भी धड़ल्ले से जारी

भारत में पब्लिक गेमिंग एक्ट, 1867 के तहत सट्टा और जुआ बैन है। 2025 में सरकार ने प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पारित कर इसे और सख्त बनाया है।

अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म चलाने पर 3 साल की जेल और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना है। इसका विज्ञापन करने पर 2 साल की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना है। इसके बावजूद, विदेशी सर्वर और हवाला नेटवर्क के कारण यह धंधा फल-फूल रहा है।

सट्टा बाजार के अनुमान चाहे एनडीए को बढ़त दिखा रहे हों, लेकिन असली फैसला 14 नवंबर को बिहार की 7.43 करोड़ जनता के वोट से होगा। जैसा कि एक सटोरिये ने कहा, ‘सट्टा बाजार जनता की नब्ज पकड़ने की कोशिश करता है, लेकिन बिहार की जनता की नब्ज इतनी पेचीदा है कि 2015 की तरह कोई भी गलत साबित हो सकता है।’

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