राष्ट्रीय दुग्ध दिवस विशेष ……………

दूध मनुष्यों के लिए फॉस्फोरस, कैल्शियम, विटामिन बी, विटामिन डी और पोटेशियम का एक आदर्श स्रोत है। डेयरी उद्योग भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 5.3% का योगदान देता है। भारत में हर साल 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय दुग्ध उद्योग के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन को […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 27 नवंबर 2025, 07:52 AM 12 मिनट read
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राष्ट्रीय दुग्ध दिवस विशेष ……………
Photo: UB India News Archive

दूध मनुष्यों के लिए फॉस्फोरस, कैल्शियम, विटामिन बी, विटामिन डी और पोटेशियम का एक आदर्श स्रोत है। डेयरी उद्योग भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 5.3% का योगदान देता है। भारत में हर साल 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय दुग्ध उद्योग के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन को सम्मान देने के लिए समर्पित है, जिन्हें श्वेत क्रांति के पिता (Father of the White Revolution) कहा जाता है। भारत को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और सफेद क्रांति लाने में उनका योगदान अभूतपूर्व रहा है।  डॉ. कुरियन को विश्व के व्यापक कृषि कार्यक्रम ऑपरेशन फ्लड का नेतृत्व करने के कारण भारत में श्वेत क्रांति का जनक माना जाता है। डॉ. वर्गीस कुरियन ने 14 दिसंबर 1946 को अमूल की शुरुआत की थी। इसकी शुरुआत दो सहकारी डेयरी समितियों और केवल 247 लीटर दूध से हुई थी। इसके अलावा, यह पोल्सन डेयरी में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ने में किसानों की मदद करने की एक पहल थी।

वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने आजादी का अमृत महोत्सव के एक भाग के रूप में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाने की शुरुआत की जिसे आज सम्पूर्ण देश में व्यापक स्तर पर मनाया जाता है । इसी क्रम में बिहार की राजधानी पटना में भी कई कार्यक्रम आयोजित किये गये जिनमे मुख्य रूप से पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग और कॉफ्फेड की ओर से पटना के एक होटल में कार्यक्रम आयोजित किया गया , जिसमे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ,पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री सुरेंद्र मेहता सहित विरिय पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किये । इसके अलावा बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में और पटना डेयरी प्रोजेक्ट वैशाल पाटलिपुत्र दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0, पटना के प्रांगण में कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग और कॉफ्फेड की ओर से पटना में आयोजित कार्यक्रम

इस अवसर पर पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग और कॉफ्फेड की ओर से पटना के एक होटल में  पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में आगामी दो वर्षों में दूध उत्पादन को दोगुना करने का लक्ष्य है। डेयरी को अलग से विभाग बनाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे। जल्द ही सड़कों पर घूमने वाली आवारा गाय, भैंस और बैलों को प्रखंड स्तर पर रखने की व्यवस्था भी सरकार करेगी। इसे मूर्तरूप देने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा की  दुग्ध क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए शानदार काम हुए हैं। इस अवधि में राज्य का दूध उत्पादन तीन गुना बढ़ चुका है। बिहार के ब्रांड सुधा के उत्पाद अब विदेशों तक पहुंच चुके हैं। इसकी सभी यूनिट को प्रखंड स्तर तक ले जाया जाएगा। इसे पंचायत से सीधे जोड़ा जाएगा।

वही पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता ने कहा कि आज दुग्ध उत्पादन एक बड़े उद्योग का रूप धारण कर चुका है। इससे पशुपालक किसानों की आय बढ़ी है। हमारी जिम्मेदारी है कि राज्य में दुग्ध उत्पादन को और आगे बढ़ाया जाए।  पशुपालन से जुड़े हुए तमाम किसानों के लिए बिहार सरकार खड़ी है और उनके विकास को लेकर जिस तरह की भी योजनाएं शुरू करनी चाहिए, वे तमाम योजनाएं शुरू करके उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने का काम बिहार सरकार करेगी ।

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉक्टर एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि बिहार पशुपालन के क्षेत्र में पूरे देश में चौथे स्थान पर है, लेकिन दूध उत्पादन में अभी हम काफी पीछे हैं, जिसको लेकर हमें और काम करने की जरूरत है। उन्होंने बिहार मिल्क कोऑपरेटिव फेडरेशन (COMFED) के कार्यों में आ रही सुस्ती पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि वर्तमान कार्य-प्रणाली काफी धीमी है, जबकि आज बाजार में कई दूध से जुड़े विभिन्न उत्पाद के साथ निजी कंपनियां सक्रिय हो चुकी हैं। उनकी तुलना में ‘सुधा’ की रफ्तार बहुत कम है। यदि स्थिति ऐसे ही बनी रही तो आने वाले दिनों में उसका अस्तित्व खत्म हो सकता है।

बिहार के विकास आयुक्त डॉ. एस. सिद्धार्थ ने COMFED और सुधा की कार्य-प्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अब समय बदल चुका है. बाजार में दूध सहित डेयरी से जुड़ी कई प्राइवेट कंपनियां आ चुकी हैं, प्रतिस्पर्धा बढ़ा है। अब COMFED के अधिकारियों को पुरानी व्यवस्था से बाहर निकलकर नई व्यवस्था के साथ जुड़कर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आप लोग सुधा से जुड़े उत्पादों की क्वालिटी में सुधार लाने के साथ सिस्टम के अंदर कार्य-प्रणाली में भी सुधार लाएं। मौके पर कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक, पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह और निदेशक डेयरी केदारनाथ सिंह भी मौजूद थे।

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग और कॉफ्फेड की ओर से पटना में आयोजित कार्यक्रम

बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के तहत संजय गांधी गव्य प्रौद्योगिकी संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.इन्द्रजीत सिंह ने कहा की दूध उत्पादन के मामले में भारत विश्व में पहले स्थान पर है और वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग 23 प्रतिशत योगदान देता है। दूसरे सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले देश भी इसका मुकाबला नहीं कर सकते। यह हमारे लिए गर्व की बात है। जिस प्रकार पर्यावरण और मौसम में बदलाव देखा जा रहा है, पशुपालकों और डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों को देशी पशुओं पर निर्भरता बढ़ानी चाहिए। बिहार में संभावनाओं की कमी नहीं है, विद्यार्थी नौकरी के पीछे न भागकर उद्यम स्थापित करने की दिशा में काम करें।

संस्थान के डीन डॉ. उमेश सिंह ने कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी है कि उन्नत नस्ल के पशुओं को पाला जाए। बिहार के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने बताया कि साहिवाल और थारपारकर जैसी देसी नस्ल के पशु बिहार के वातावरण के अनुरूप बेहद अनुकूल हैं और इनसे अच्छी उत्पादकता प्राप्त होगी। उन्नत नस्ल के पशुओं का झुंड तभी तैयार हो सकता है जब पशुपालकों को क्वालिटी सीमेन उपलब्ध हो और कृत्रिम गर्भाधान कुशलता से किया जाए।

बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के तहत संजय गांधी गव्य प्रौद्योगिकी संस्थान में आयोजित कार्यक्रम

इस अवसर पर इंडियन डेयरी एसोसिएशन बिहार चैप्टर के अध्यक्ष डी.के. श्रीवास्तव अपने संबोधन में ने कहा कि राष्ट्रीय दुग्ध दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि किसानों को सशक्त बनाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और सहकारी मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प है। डॉ. कुरियन की विरासत हमें लगातार प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने बताया कि डॉ. कुरियन ने किसानों को संगठित कर अमूल मॉडल के माध्यम से सहकारी आंदोलन की ऐसी नींव रखी, जिसने भारत को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाया, जो डॉ. कुरियन के दूरदर्शी नेतृत्व और ‘ऑपरेशन फ्लड’ की ऐतिहासिक सफलता का परिणाम है। अपने संबोधन में उन्होंने बिहार के दुग्ध क्षेत्र की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने, उन्नत नस्ल सुधार, और डिजिटल डेयरी प्रबंधन जैसी पहल को राज्य के लिए बहुत आवश्यक है ….

वैशाल पाटलिपुत्र दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0, पटना के प्रांगण में हर्षोल्लास के साथ “राष्ट्रीय दुग्ध दिवस” मनाया गया

वही “श्वेत कान्ति के जनक” एवं पटना डेयरी प्रोजेक्ट के प्रथम अध्यक्ष पद्मविभूषण डा0 वर्गीज कुरियन के जन्म दिवस को “राष्ट्रीय दुग्ध दिवस” के रूप में वैशाल पाटलिपुत्र दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0, पटना के प्रांगण में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के मौके पर संघ के अध्यक्ष  संजय कुमार, संघ के समस्त निदेशक मंडल सदस्यगण, प्रबंध निदेशक  रूपेश राज एवं संघ के सभी पदाधिकारियों / कर्मचारियों ने डा0 कुरियन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित कर संघ के सभी कार्यक्षेत्रों में संघ की विपणन टीम द्वारा सुधा दूध की सेम्पलिंग करायी गई तथा उपभोक्ताओं को सुधा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के मौके पर संघ के अध्यक्ष संजय कुमार ने डा0 कुरियन को नमन करते हुए बताया कि डा0 वर्गीज कुरियन संघ के संस्थापक अध्यक्ष रहे। उनकी सोच का ही परिणाम है कि आज लाखों किसान दुग्ध व्यवसाय से जुड़े हैं तथा यह व्यवसाय उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। उन्होंने संघ के किसान बन्धुओं से आग्रह किया डा0 कुरियन के दिखाए रास्ते पर चलते हुए पटना डेयरी प्रोजेक्ट से जुड़कर गुणवत्तायुक्त दूध संग्रहित करें एवं ज्यादा से ज्यादा लाभ अर्जित करें।

संघ के प्रबंध निदेशक रूपेश राज ने डा0 कुरियन को याद करते हुए कहा कि आज उनके जन्मदिन के अवसर पर पटना डेयरी प्रोजेक्ट की तरफ से हम उन्हें सादर नमन करते हैं। संघ के प्रथम अध्यक्ष के रूप में उनके योगदान को पटना डेयरी हमेशा याद रखता है। उनके प्रयासों से ही गॉव-गॉव में किसान पटना डेयरी प्रोजेक्ट से जुड़कर दुग्ध व्यवसाय के कार्य में सम्मिलित हुए। उनके दिखाए रास्ते पर चलकर कॉम्फेड के नियंत्रणाधीन यह संस्था पटना डेयरी प्रोजेक्ट सुधा ब्राण्ड के रूप में अग्रणी संस्था के रूप में बिहार में प्रगति के पथ पर अग्रसर है। चाहे संघ का संग्रहण हो, विपणन हो, प्लांट विस्तार हो, सभी में संस्था एक नये रिकॉर्ड के साथ कार्य कर रही है। संघ स्तर से विभिन्न प्रकार की योजनाओं के माध्यम से समितियों को सुविधाएँ प्रदान की जा रही है। बिहार में सुधा एक प्रतिष्ठित संस्था के रूप में खड़ा है, इसमें अविस्मरणीय योगदान डा0 कुरियन का है जिन्हें बिहार के पशुपालक कभी भूल नहीं सकते।

 

आइए जानते हैं कि भारत में दुग्ध दिवस कब और क्यों मनाने की शुरुआत हुई। दूध के लिए एक दिन क्यों समर्पित किया गया और 26 नवंबर को इतिहास क्या है।

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस का इतिहास :

1950 के दशक में भारत में दूध की भारी कमी थी। डॉ. कुरियन ने ‘ऑपरेशन फ्लड’ के नाम से दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम शुरू किया। इससे किसानों को सीधे दूध बेचने और उचित कीमत पाने की सुविधा मिली। दूध के बड़े ब्रांड्स की नींव भी उनके प्रयासों का परिणाम है। वर्ष 2014 में पहली बार भारत में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया गया।

26 नवंबर को ही क्यों मनाया जाता है दूग्ध दिवस ?

दूग्ध दिवस डॉ. वर्गीस कुरियन को समर्पित है। डाॅ. कुरियन का जन्म 26 नवंबर 1921 को हुआ था। डॉ. कुरियन ने 1965 में गुजरात के आनंद से शुरू की गई ‘सफेद क्रांति’ के जरिए भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनाया। उन्हें दुग्ध क्षेत्र में योगदान को देखते हुए वर्ष 2014 में भारतीय डेयरी एसोसिएशन (IDA) ने निर्णय लिया कि उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य 

  • दूध और डेयरी उत्पादों के महत्व को बढ़ावा देना
  • पोषण और स्वास्थ्य में दूध की भूमिका बताना
  • डेयरी किसानों के योगदान को सम्मान देना
  • भारत में डेयरी सेक्टर की उपलब्धियों के बारे में जागरूकता फैलाना
  • सफेद क्रांति के नायक डॉ. कुरियन को याद करना

ऑपरेशन फ्लड क्या है?

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर, भारत दुग्ध उत्पादन में क्रांति लाने में ऑपरेशन फ्लड के योगदान को याद करता है। किसानों को उत्पाद का सही मूल्य दिलाने में मदद के लिए 13 जनवरी 1970 को ऑपरेशन फ्लड चलाया गया था। इस डेयरी विकास कार्यक्रम ने डेयरी फार्मिंग को तीस वर्षों के भीतर एक स्थायी ग्रामीण रोजगार क्षेत्र में बदलने में मदद की।इस पहल ने किसानों को दूध और दुग्ध उत्पादों के उत्पादन और विकास पर सीधा नियंत्रण प्रदान किया। इस पहल ने श्वेत क्रांति लाने और दूध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने में मदद की।

प्रथम चरण – यह चरण 1970-1980 के बीच चला और इसका उद्देश्य 10 शहरों के 18 दुग्ध केंद्रों में डेयरी सहकारी समितियाँ स्थापित करना था। इसका उद्देश्य इन केंद्रों को महानगरीय बाज़ार से जोड़ना था।

दुसरा चरण II- इस चरण में, दूध की दुकानों की संख्या बढ़कर 290 शहरी बाज़ारों और 136 दूध शेडों तक पहुँच गई। लगभग 4,250,000 दूध उत्पादक भारत की विभिन्न सहकारी समितियों में फैले हुए हैं।

तीसरा चरण III- इस चरण में दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया।

दुग्ध दिवस का महत्व

  • दूध का योगदान पोषण में है। दूध को सम्पूर्ण आहार माना जाता है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन D, B12, पोटेशियम जैसी जरूरी पोषक तत्व होते हैं।
  • किसानों की आजीविका का एक साधन दूध भी है। भारत में लाखों किसान डेयरी पर निर्भर हैं।
  • दूध आरोग्य एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बच्चों से बुजुर्गों तक सबके लिए दूध लाभकारी है।
  • दूध आर्थिक विकास में भी योगदान देता है। डेयरी सेक्टर भारत की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
  • यह दिन डॉ. कुरियन की विरासत है। यह दिन उनकी प्रेरणादायक यात्रा और देश के विकास में उनके योगदान को याद कराता है।

 

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस कैसे मनाया जाता है?

  • स्कूलों व कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम
  • डेयरी फार्मों में विशेष आयोजन
  • पोषण और डेयरी से जुड़े सेमिनार
  • स्किम्ड/लो-फैट मिल्क वितरण कार्यक्रम
  • सोशल मीडिया कैंपेन
  • किसानों को सम्मानित करना
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