बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सदन में बोलते हुए तेजस्वी यादव और लालू परिवार पर तंज कसा। त्रिवेदी ने बिहार विधानसभा चुनाव रिजल्ट के आलोक में तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिता ने कहा था कि भूरा बाल साफ करो। तेजस्वी यादव ने इस बार पूरा बाल साफ कर दिया।
पटना: ‘एक जमाने में लालू प्रसाद यादव जी कहे थे। बिहार में भूरा बाल साफ करो। चार जातियों का नाम लेकर। मगर उनके बेटे ने ये कहा- काहे परेशान हो रहे हैं। बेटे ने तो काम ही खत्म कर दिया। उसने भूरा नहीं पूरा बाल साफ करवा दिया। मुंडन करवा दिया। इसलिए मुझे लगता है, अब इसकी आवश्यकता ही नहीं है।’ उपरोक्त बयान राज्यसभा सांसद और बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी के हैं। त्रिवेदी राज्यसभा में बोलते हुए आरजेडी पर तंज कस रहे थे। उन्होंने सदन में जोर- जोर से कहा कि अब काम खत्म हो गया है। तेजस्वी यादव ने पूरा बाल साफ कर दिया है। सुधांशु त्रिवेदी का ये बयान सोशल मीडिया पर खूब चल रहा है।
क्या था ‘भूरा बाल’?
लालू प्रसाद यादव का ” भूरा बाल साफ करो ” नारा बिहार की राजनीति में 1990 के दशक के मध्य में गूंजा एक ऐसा विवादास्पद और विभाजनकारी आह्वान था, जिसने राज्य की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को गहराई से प्रभावित किया। “भूरा बाल” शब्द का उपयोग उन्होंने ब्राह्मण (भू), भूमिहार (रा), राजपूत (बा) और कायस्थ (ल) समुदायों के लिए किया था, जो पारंपरिक रूप से बिहार की राजनीति और सत्ता में प्रभावशाली रहे थे। इस नारे का सीधा मकसद इन सवर्ण जातियों की राजनीतिक सत्ता को चुनौती देना और राज्य के अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दलितों और मुसलमानों को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बैनर तले एकजुट करना था। यह नारा लालू प्रसाद यादव की सामाजिक न्याय की राजनीति का सबसे तीखा और विवादास्पद प्रतीक बन गया, जिसने बिहार के सत्ता समीकरण को हमेशा के लिए बदल दिया।
यह नारा सीधे तौर पर बिहार की सामाजिक संरचना में एक गहरा विभाजन पैदा करने वाला था। हालांकि, लालू प्रसाद यादव और RJD ने इसे सत्ता के विकेंद्रीकरण और शोषित-वंचित वर्गों को उनका राजनीतिक अधिकार दिलाने के प्रयास के रूप में सही ठहराया, लेकिन आलोचकों ने इसे जातिगत घृणा फैलाने और समाज में टकराव पैदा करने वाला करार दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नारे ने RJD को भले ही सत्ता के शिखर पर पहुँचाया, लेकिन इसने सवर्ण जातियों को एकजुट होने के लिए मजबूर किया और कालांतर में वे जनता दल (यूनाइटेड) और भाजपा जैसी पार्टियों की ओर झुक गए। इस नारे ने यह भी दर्शाया कि लालू प्रसाद यादव की राजनीति कितनी तीखी और सीधी थी, जो सामाजिक न्याय के नाम पर सत्ता के पारंपरिक केंद्रों को खुली चुनौती देने से नहीं कतराती थी।
फिलहाल इसकी चर्चा क्यों?
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा में यह बयान देकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की मौजूदा राजनीतिक रणनीति और आंतरिक स्थिति पर गहरा तंज कसा। उन्होंने लालू प्रसाद यादव के पुराने और विवादास्पद नारे “भूरा बाल साफ करो” का जिक्र किया। त्रिवेदी का आशय यह था कि लालू यादव ने भले ही विशिष्ट सवर्ण जातियों (भूरा) को निशाना बनाया था, लेकिन उनके बेटे और RJD नेता तेजस्वी यादव की नीतियों और फैसलों के कारण अब RJD का आधार और जनाधार इतना कमजोर हो गया है कि वह ‘पूरा बाल साफ’ होने जैसी स्थिति में है। इस तंज के माध्यम से उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि RJD अब सिर्फ सवर्ण ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों का समर्थन भी खो चुकी है, और इसीलिए विपक्ष अब उन पुरानी जातियों के नाम लेने की आवश्यकता महसूस नहीं कर रहा है जिन्हें लालू यादव कभी निशाना बनाते थे।
लालू यादव ने भूरा कहा था और बेटे तेजस्वी ने ‘पूरा बाल’ साफ कर दिया, राज्यसभा में RJD पर गरजे सुधांशु त्रिवेदी
बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सदन में बोलते हुए तेजस्वी यादव और लालू परिवार पर तंज कसा। त्रिवेदी ने बिहार विधानसभा चुनाव रिजल्ट के आलोक में तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिता ने कहा था कि भूरा बाल साफ करो। तेजस्वी यादव ने इस बार पूरा बाल साफ कर […]
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