बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित हो गए हैं और माना जा रहा है कि अब वे दिल्ली की राजनीति में ज्यादा सक्रिय रहेंगे. इस कड़ी में बदलते सियासी घटनाक्रम में बिहार में एनडीए सरकार की कमान संभालने के लिए भाजपा और जदयू दोनों स्तर पर मंथन चल रहा है. भाजपा कोटे […]
By UB India News • Patna, Bihar बुधवार, 18 मार्च 2026, 09:00 AM • 6 मिनट read
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित हो गए हैं और माना जा रहा है कि अब वे दिल्ली की राजनीति में ज्यादा सक्रिय रहेंगे. इस कड़ी में बदलते सियासी घटनाक्रम में बिहार में एनडीए सरकार की कमान संभालने के लिए भाजपा और जदयू दोनों स्तर पर मंथन चल रहा है. भाजपा कोटे से डिप्टी सीएम के तौर पर नीतीश सरकार में शामिल सम्राट चौधरी की दावेदारी सबसे मजबूत कही जा रही है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि वे लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ यात्रा कर रहे हैं और मंच साझा कर रहे हैं. इस बीच पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता बढ़ती हुई प्रतीत रही है. कई बार नीतीश कुमार ने मंच से सम्राट को ‘भविष्य की उम्मीद’ जैसी बातें कही हैं और उनकी पीठ पर हाथ रखकर कुछ-कुछ सियासी संकेत देते हुए लगे हैं. साफ है कि इससे कार्यकर्ताओं में यह धारणा मजबूत हुई है कि सम्राट चौधरी ही अगले मुख्यमंत्री होंगे. लेकिन, राजनीति के जानकारों की नजर में यह संकेत हो सकते हैं, निर्णय नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा की केंद्रीय नेतृत्व की कार्यशैली हमेशा से अप्रत्याशित रही है.
बिहार में नए सीएम के नाम पर सस्पेंस गहरा
राजनीति के जानकार कुछ नामों का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद मध्य प्रदेश में मोहन यादव, राजस्थान में भजनलाल शर्मा और छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साई जैसे नाम सामने आए जो स्थानीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा में नहीं थे. हरियाणा में नायब सिंह सैनी और दिल्ली की रेखा गुप्ता को भी अचानक मुख्यमंत्री बनाया गया था. इन फैसलों में जातीय समीकरण, पार्टी अनुशासन, महिला प्रतिनिधित्व और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति को प्राथमिकता दी गई थी. माना जा रहा है कि ठीक उसी तरह बिहार में भी दिल्ली अब एक ऐसे नाम पर विचार कर रही है जो अभी तक कम चर्चा में रहा हो लेकिन पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
भाजपा दे सकती है चौंकाने वाला नाम
सूत्रों के मुताबिक रेणु कुशवाहा और रमा निषाद जैसी महिला विधायकों के नाम तो चल रहे हैं, क्योंकि भाजपा महिला सशक्तिकरण के एजेंडे को मजबूत करना चाहती है. नित्यानंद राय, विजय कुमार सिन्हा और शाहनवाज हुसैन जैसे अनुभवी नेता भी दौड़ में हैं. लेकिन असली सरप्राइज नाम इससे अलग हो सकता है. कुछ लोग कह रहे हैं कि यह नाम किसी ऐसे नेता का हो सकता है जो जातीय संतुलन बनाए रखे, एनडीए के भीतर एकता को मजबूत करे और नीतीश कुमार के साथ अच्छा तालमेल रख सके. दिल्ली में मंथन जारी है और अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही लेगा.
सस्पेंस क्यों बढ़ रहा है?
जानकार कहते हैं कि सम्राट चौधरी की दावेदारी भले ही मजबूत हो, लेकिन भाजपा कभी भी स्थानीय स्तर की सबसे मजबूत आवाज को ही चुनती है, ऐसा हरदम नहीं होता है. वह पार्टी की दृष्टि से राष्ट्रीय हित, गठबंधन की मजबूती और भविष्य की रणनीति को देखती है. नीतीश कुमार भी चाहते हैं कि नया मुख्यमंत्री ऐसा हो जो उनकी विरासत को आगे बढ़ाए और एनडीए को मजबूत रखे. इसी बीच महिला नेता को मुख्यमंत्री बनाने की बात भी जोर पकड़ रही है, क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों ने भाजपा-जदयू के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को भरपूर साथ दिया. को साधने की कोशिश हो रही है. लेकिन सरप्राइज नाम क्या होगा यह अभी भी रहस्य बना हुआ है. दूसरी ओर राजनीति के गलियारों के कई सूत्र कहते हैं कि यह नाम किसी ऐसे युवा या मध्यम आयु के नेता का हो सकता है जिनकी छवि साफ-सुथरी हो और जो बिहार के विकास एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ा सके.
स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में इस समय सस्पेंस का माहौल चरम पर है. सम्राट चौधरी की दावेदारी मजबूत दिख रही है, लेकिन भाजपा की पुरानी सरप्राइज देने वाली कार्यशैली और दिल्ली की गुप्त चर्चाएं कह रही हैं कि आखिरी फैसला सबको चौंका सकता है. नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में नई सरकार बनेगी या नहीं यह तो आने वाले दिनों में साफ होगा. इस बीच पार्टी ने साफ किया है कि एक बात तय है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री चाहे कोई भी हो पार्टी एकजुट रहेगी और विकास के कामों पर फोकस जारी रहेगा. फिलहाल पूरा राजनीतिक गलियारा उस सरप्राइज नाम की ओर टकटकी लगाए बैठा है जो सस्पेंस को और बढ़ा रहा है.
इधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के जमुई में समृद्धि यात्रा के दौरान बड़ा बयान दिया है. दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जमुई दौरे के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा-“अब यही सब काम करेंगे.” इस एक बयान को लेकर अब कई तरह के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. दरअसल इन दिनों बिहार के सियासी गलियारे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. ऐसे में नीतीश कुमार के इस बयान के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं.
दरअसल, जमुई में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी दोनों मंच पर मौजूद थे. इसी दौरान बातचीत के बीच नीतीश कुमार ने सार्वजनिक तौर पर यह बात कही. उनके इस बयान के बाद से ही अटकलों का दौर शुरू हो गया है कि क्या बिहार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई बड़ा संकेत दिया गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह बयान सामान्य नहीं है. इसे भविष्य की राजनीति और जिम्मेदारियों के बंटवारे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. कुछ जानकार इसे सम्राट चौधरी की बढ़ती भूमिका के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे सत्ता में संभावित बदलाव की भूमिका मान रहे हैं.