आज बिहार अपना 114वां स्थापना दिवस मना रहा , मुख्य समारोह शाम 5 बजे गांधी मैदान में , कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे

आज बिहार दिवस के अवसर पर राजधानी पटना में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. यह समारोह शाम 5 बजे गांधी मैदान में आयोजित होगा. जहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे. इस मौके पर राज्य सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 20 मार्च 2026, 02:48 AM 14 मिनट read
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आज  बिहार अपना 114वां स्थापना दिवस मना रहा , मुख्य समारोह शाम 5 बजे गांधी मैदान में , कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे
Photo: UB India News Archive

आज बिहार दिवस के अवसर पर राजधानी पटना में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. यह समारोह शाम 5 बजे गांधी मैदान में आयोजित होगा. जहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे. इस मौके पर राज्य सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी उपस्थित रहेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स हेंडल पर लिखा- बिहार दिवस के अवसर पर राज्य के अपने सभी परिवारजनों को अनेकानेक शुभकामनाएं. भारतीय विरासत को भव्यता और दिव्यता प्रदान करने वाला हमारा यह प्रदेश आज प्रगति के नित-नए अध्याय गढ़ने में जुटा है. मुझे विश्वास है कि विकसित बिहार के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में यहां के कर्मठ एवं ऊर्जावान लोगों का समर्पण और सामर्थ्य बहुत काम आएगा.

‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ के रंग में रंगा पटना

‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ के मूल मंत्र के साथ बिहार दिवस का यह आयोजन मात्र उत्सव नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक धरोहर, विकास यात्रा और एकता का प्रतीक है. 1912 में बंगाल से अलग होकर बने बिहार की यह 114वीं वर्षगांठ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगी. लाखों बिहारवासी इन कार्यक्रमों में शामिल होकर राज्य गौरव का अनुभव करेंगे. ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ का नारा गूंजता रहेगा. पटना इन दो दिनों में सांस्कृतिक राजधानी बन जाएगा, जहां संगीत, नृत्य, हास्य और नाटक का अनोखा संगम देखने को मिलेगा.

बिहार दिवस 2026: पटना में सांस्कृतिक महाकुंभ की धूम, गांधी मैदान, श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल और रविंद्र भवन में आज और कल धमाल!

बिहार अपनी 114वीं स्थापना दिवस पर 22 और 23 मार्च 2026 को राजधानी पटना में भव्य सांस्कृतिक उत्सव मना रहा है. थीम ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ के तहत आयोजित तीन दिवसीय समारोह का मुख्य केंद्र गांधी मैदान है, जबकि श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल और रविंद्र भवन में शास्त्रीय, लोक और नाट्य प्रस्तुतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देंगी. बिहार सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बॉलीवुड से लेकर लोक संस्कृति तक के सितारे चमकेंगे. खास बात यह है कि प्रवेश निशुल्क है और यहां विकास योजनाओं की प्रदर्शनी, पुस्तक मेला व व्यंजन मेला भी सजेंगे.

बिहार दिवस पर पटना बना सांस्कृतिक राजधानी

22 मार्च यानी आज बिहार दिवस की शुरुआत गांधी मैदान से होगी. मुख्य मंच पर प्रसिद्ध बॉलीवुड गायिका सोना महापात्रा अपनी मधुर आवाज में दर्शकों को झूमाएंगी। शाम होते-होते पूरा मैदान संगीत की लहरों से गूंज उठेगा. वहीं श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में शास्त्रीय संगीत की धरोहर पंडित जगत नारायण पाठक ध्रुपद गायन की प्रस्तुति देंगे. उनके बाद ओडिसी नृत्य की माहिर रमिंदर खुराना और समकालीन नृत्य की प्रतिभा प्राची पल्लवी साहू अपनी कलाकारी से मंच को रोशन करेंगी. रविंद्र भवन में लोक संगीत का आनंद कमलेश कुमार सिंह के गीतों से मिलेगा. इसके बाद भोजपुरी लोक संस्कृति के महान कलाकार भिखारी ठाकुर की अमर रचना ‘गबरघिचोर’ की नाट्य प्रस्तुति दर्शकों को भावुक कर देगी.

बिहार दिवस पर सितारों की महफिल तैयार

सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक गांधी मैदान के सांस्कृतिक पवेलियन में स्थानीय कलाकारों के नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम लगातार चलेंगे. शिक्षा विभाग की प्रदर्शनी में छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। पर्यटन, कला-संस्कृति और अन्य विभागों के स्टॉल बिहार की विरासत और उपलब्धियों को प्रदर्शित करेंगे. पारंपरिक व्यंजनों की महक और पुस्तक मेला युवाओं व परिवारों को आकर्षित करेगा.

 

बिहार को अलग राज्य बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

दिल्ली की सर्दी आज नहीं, सालों से फेमस है। साल 1911 की दिसंबर कुछ ज्यादा सर्द थी। दिल्ली का भव्य शाही दरबार सजा था। हजारों की भीड़ इकट्ठी थी। राजाओं-महाराजाओं की लाइन लगी थी। कलकत्ता से ब्रिटिश राज की राजधानी को दिल्ली शिफ्ट किया जा रहा था। मगर, जॉर्ज पंचम से पटना (बिहार) की ख्वाहिश कुछ और थी। आखिरकार वो घड़ी आई जब जॉर्ज पंचम ने 2 करोड़ 15 लाख लोगों (तब बिहार-ओडिशा की आबादी इतनी ही थी) के चेहरे पर मुस्कान ला दी। होली और दिवाली एक साथ मनाई गई। बिहारियों की किस्मत हमेशा के लिए बदल गई। सदियों तक बंगाल की राजनीतिक और सांस्कृतिक परछाईं में दबे बिहार को अपनी स्वतंत्र पहचान मिली। इंग्लैंड के राजा जॉर्ज पंचम ने जब बिहार और ओडिशा को मिलाकर अलग प्रांत बनाने का ऐलान किया। ‘बिहार बिहारियों के लिए’ के नारे की जीत हुई। आज के आधुनिक बिहार के उदय की दास्तां काफी रोमांचक है।

कई बार सवाल उठता है कि आखिर बंगाल से बिहार को अलग होने की जरूरत क्यों पड़ी? जब ब्रिटिश राज की गुलामी ही करनी थी तो बंगाल से अलग होकर कौन-सा तीर मार लिए? दरअसल, उस समय बंगाल प्रेसिडेंसी का हिस्सा बिहार था। इसका मुख्यालय कलकत्ता (कोलकाता) था। जिसके चलते बिहारियों (ओडिशा और झारखंड भी शामिल) को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।

  • बंगाल प्रेसिडेंसी की अधिकांश सरकारी नौकरियों और प्रशासनिक पदों पर बंगालियों का कब्जा था। बिहार के शिक्षित नौजवानों को रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे थे।
  • बजट का बड़ा हिस्सा कोलकाता और उसके आस-पास के क्षेत्रों पर खर्च होता था। बिहार के शिक्षण संस्थानों और बुनियादी ढांचे की अनदेखी की जा रही थी।
  • बिहार की भाषा, संस्कृति और परंपराएं बंगाल से अलग थीं। बिहार के लोग चाहते थे कि उनकी एक अलग पहचान हो ताकि वे अपनी संस्कृति का संरक्षण कर सकें।
  • पटना से कोलकाता की दूरी और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की कमी के कारण आम जनता को छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए काफी परेशान होना पड़ता था।

सबसे पहले बिहार को अलग राज्य बनाने की मांग कैसे उठी?

बंगाल प्रेसिडेंसी के दौर में बिहार अपनी पहचान के लिए तरस रहा था। कभी पाटलिपुत्र (पटना) की धरती से एशिया के कई देशों पर शासन हुआ करता था। उस पटना को छोटे-छोटे कामों के लिए कोलकाता का चक्कर काटना पड़ता था। 20वीं सदी की शुरुआत में बिहार-झारखंड, बंगाल और ओडिशा एक ही प्रशासनिक इकाई ‘बंगाल प्रेसिडेंसी’ का हिस्सा थे। सारा शासन कोलकाता से चलता था। ऐसे में बिहार को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के नायक डॉ सच्चिदानंद सिन्हा थे। उन्होंने महसूस किया कि बिना स्वतंत्र पहचान के बिहार का विकास असंभव है।

  • 1894 में सच्चिदानंद सिन्हा ने ‘बिहार टाइम्स’ नाम से पत्रिका शुरू की। तथ्यों के साथ बताया कि बिहार को अलग करना, ब्रिटिश हुकूमत की मजबूरी के साथ बिहारियों की जरूरत भी है।
  • डॉ सच्चिदानंद सिन्हा और महेश नारायण ने बिहार टाइम्स पत्रिका के माध्यम से नारा दिया था- बिहार बिहारियों के लिए (Bihar for Biharis)।
  • फिर 1908 में ‘बिहार प्रादेशिक सम्मेलन’ का पहला अधिवेशन हुआ, जिसमें औपचारिक रूप से अलग प्रांत की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया।
  • साल 1911 के दिल्ली दरबार में ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और 22 मार्च 1912 को बिहार (ओडिशा और झारखंड सहित) एक अलग राज्य बन गया।

आधुनिक बिहार के जनक डॉ सच्चिदानंद सिन्हा का सपना

डॉ सच्चिदानंद सिन्हा (1871–1950) को ‘आधुनिक बिहार का जनक’ माना जाता है। वे एक प्रसिद्ध वकील, प्रखर पत्रकार और दूरदर्शी राजनेता थे। पटना, कोलकाता और लंदन में उनकी पढ़ाई हुई थी। पेशेवर बैरिस्टर थे। उनको ब्रिटिश राज के काम करने तौर-तरीके मालूम थे। बिहार को अलग राज्य बनाने के आंदोलन के ‘भीष्म पितामह’ डॉ सच्चिदानंद सिन्हा माने जाते हैं। उन्होंने ही बंगाल से अलग बिहार का सपना देखा और उसे 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली के ऐतिहासिक ‘शाही दरबार’ में इंग्लैंड के राजा जॉर्ज पंचम ने पूरा किया। फिर 22 मार्च 2012 को आधुनिक बिहार की नींव पड़ी।

  • राजा जॉर्ज पंचम ने दिल्ली के शाही संबोधन में कहा- बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर बिहार और ओडिशा को एक नए प्रांत (Province) के रूप में गठित किया जाएगा।
  • प्रशासन एक लेफ्टिनेंट गवर्नर-इन-काउंसिल के हाथ में होगा क्योंकि बंगाल प्रेसिडेंसी बहुत बड़ी हो गई है, इसलिए कुशल प्रशासन के लिए इसे विभाजित करना आवश्यक है।
  • जॉर्ज पंचम के इस घोषणा के साथ ही ये तय हो गया कि नए प्रांत की राजधानी पटना होगी। डॉ सच्चिदानंद सिन्हा और उनके साथियों की बरसों की मेहनत पर ‘शाही मुहर’ लग गई।
  • शाही घोषणा के 102 दिन बाद 22 मार्च 1912 को आधिकारिक अधिसूचना जारी हुई, इसीलिए हम 22 मार्च को बिहार दिवस मनाते हैं।

बिहार से दो राज्य और बने ओडिशा-झारखंड

बिहार बनने के 24 साल बाद एक और विभाजन हुआ। मतलब, बिहार बनने की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। 1 अप्रैल 1936 को भाषाई आधार पर ओडिशा बिहार से अलग हुआ। कुछ सालों तक मामला शांत रहा। इसके 64 साल बाद 15 नवंबर 2000 को दक्षिण बिहार के पठारी हिस्से को अलग कर ‘झारखंड’ राज्य का गठन किया गया। इन विभाजनों के बावजूद बिहार की सांस्कृतिक आत्मा आज भी अखंड है। बंगाल से अलग होने वाले बिहार के दो टुकड़े हो चुके हैं। मगर, आज भी बिहार दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बिहारी अस्मिता का प्रतीक है।

बिहार दिवस 2026

24 मार्च तक तीन दिवसीय समारोह की तैयारियों को लेकर सरकार के स्तर पर संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है। गांधी मैदान में विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं पर प्रदर्शनी लगायी जाएगी। लजीज बिहारी व्यंजनों से लेकर लोक-संस्कृति की भी धूम मचेगी। गांधी मैदान में पुस्तक मेला, विज्ञान प्रदर्शनी, नुक्कड़ नाटक, शैक्षणिक और खेलकूद प्रतियोगिता का भी आयोजन होगा। कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा कई नामचीन कलाकारों के जरिये सांगीतिक कार्यक्रम भी होंगे।

संबंधित स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल एवं शौचालय व्यवस्था के संबंध में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और पटना नगर निगम को सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि आंगतुकों एवं अतिथियों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिल सके। विधि व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण एवं सुगम ट्रैफिक संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया है। यातायात प्रबंधन तथा सुगम आवागमन के मैपिंग और उसके प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिया गया है। कार्यक्रम से जुड़े सभी संबंधित पदाधिकारी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन करेंगे।

 

बिहार दिवस 2026: राजधानी में तीन दिन कला-संस्कृति का महोत्सव

बिहार दिवस 2026 के अवसर पर राजधानी पटना के गांधी मैदान, प्रेमचंद रंगशाला और रवीन्द्र भवन में कला, संस्कृति और रंगमंच का भव्य आयोजन होगा। 22, 23 और 24 मार्च को होने वाले इस तीन दिवसीय उत्सव में बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत किया जाएगा।

सुबह से शाम तक चलने वाले इस कार्यक्रम में लोकगीत, शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य और नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुतियां होंगी। गांधी मैदान का सांस्कृतिक मंच मुख्य आकर्षण रहेगा, जबकि प्रेमचंद रंगशाला और रवीन्द्र भवन में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान कुल 69 स्थानीय कलाकार और संस्थाएं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी।

22 मार्च: लोक संस्कृति और शास्त्रीय गायन उत्सव के पहले दिन सुबह 10 बजे शनिष यादव और नवल किशोर शर्मा के लोकगायन से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। दोपहर में सुनिधि सुमन, पूजा उपाध्याय और डॉ. निशा परासर लोकगीत प्रस्तुत करेंगी। शाम को डॉ. अमृता का शास्त्रीय गायन और सबेरा कला केंद्र के कलाकारों द्वारा सामूहिक लोकनृत्य होगा। इसी दिन नाटकों का मंचन भी किया जाएगा।

22 मार्च को मुख्य मंच पर मशहूर बॉलीवुड गायिका सोना महापात्रा अपनी प्रस्तुति देंगी। उनके गानों से कार्यक्रम की शुरुआत बेहद खास होने की उम्मीद है। इसी दिन श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में पंडित जगत नारायण पाठक द्वारा शास्त्रीय संगीत की ध्रुपद शैली में प्रस्तुति दी जाएगी, जो संगीत प्रेमियों के लिए एक खास अनुभव होगा।

ओडिसी नृत्य के साथ रमिंदर खुराना और प्राची पल्लवी साहू द्वारा समकालीन नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं रवींद्र भवन में कमलेश कुमार सिंह द्वारा लोकगीत प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा भोजपुरी लोक संस्कृति के महान कलाकार भिखारी ठाकुर की प्रसिद्ध रचना ‘गबरघिचोर’ का नाट्य मंचन भी किया जाएगा, जो दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा।

23 मार्च: लोकगायन और शास्त्रीय नृत्य दूसरे दिन की शुरुआत रंगनाद समूह के लोकगायन से होगी, जिसके बाद शास्त्रीय नृत्य की श्रृंखला प्रस्तुत की जाएगी। इस दिन गांधी मैदान के मुख्य मंच पर लोकप्रिय गायक शान अपनी प्रस्तुति देंगे। उनके गानों से माहौल और भी खुशनुमा हो जाएगा। वहीं श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में सुदीपा घोष द्वारा ‘बुद्धचरित’ पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा रवींद्र भवन में प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा और उनकी टीम द्वारा हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। साथ ही ‘वैजयंती’ नाटक का मंचन भी किया जाएगा।

24 मार्च: मैथिली संस्कृति की झलक अंतिम दिन डॉ. पूनम सिन्हा और अवधेश कुमार के लोकगायन से कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इस दिन मैथिली संस्कृति की विशेष झलक देखने को मिलेगी। 24 मार्च को गांधी मैदान के मुख्य मंच पर प्रसिद्ध गायक पापोन अपनी सुरीली आवाज से लोगों का मनोरंजन करेंगे। उनके गीत कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होंगे और बड़ी संख्या में लोग उन्हें सुनने पहुंचेंगे।

मशहूर गायक होंगे शामिल

बिहार दिवस पर इस वर्ष मशहूर गायक सोना मोहापात्रा, शान व पपोन जैसे गायक अपने कला से प्रदेश के लोगों का मनोरंजन करने आ रहे हैं।। शिक्षा विभाग की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में और भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। जिसमें लोकगीत, नृत्य, ध्रुपद गायन, समकालीन गीत, नाटक, हास्य कवि सम्मेलन, बिहार दर्पण, मुशायरा समेत अनेक कार्यक्रम सम्मिलित हैं।

प्रेमचंद रंगशाला में होगा पांच दिवसीय महिला नाट्य उत्सव

बता दें कि कला संस्कृति विभाग की तरफ से 22 मार्च से 26 मार्च तक पांच दिवसीय महिला नाट्य उत्सव का आयोजन किया जायेगा। बिहार सरकार की कला संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस बार बिहार दिवस के मौके पर विभाग की तरफ से खास आयोजन किया जा रहा है। जिसमें 22 मार्च को पारो, 23 मार्च को बिदेसिया, 24 मार्च को फर्क है, 25 मार्च को चारुलता व 26 मार्च को आधे-अधूरे का मंचन किया जायेगा।  जिसके लिए राजेंद्र नगर स्थित प्रेमचंद रंगशाला, फ्रेजर रोड स्थित नृत्य कला मंदिर में जोर-शोर से तैयारियां चल रही है। वहीं इस मौके पर म्युजिक, पेंटिंग के लिए वर्कशॉप का भी आयोजन किया जा रहा है।

गायन के साथ अतिथि उठायेंगे हास्य कविताओं व मुशायरा का आनंद

22 मार्च से 24 मार्च तक चलने वाले इस कार्यक्रम में मशहूर गायक सोना मोहापात्रा 22 मार्च को अपने गायन से जलवा बिखरेंगी। इसके साथ ही तन्हा दिल फेम शान 23 मार्च व 24 मार्च को और पापोन भी अपनी गायिकी से दर्शकों का मनोरंजन करते नजर आयेंगे। यह सभी कार्यक्रम गांधी मैदान स्थित एसके मेमोरियल हॉल में आयोजित किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने यह भी कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम में रुचि रखने वाले अतिथियों के लिए लोक गीत, नृत्य, ध्रुपद गायन, समकालीन गीत, नाटक, हास्य कवि सम्मेलन मुशायरा समेत अनेक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

इसके अलावा गांधी मैदान में बनाए गए सांस्कृतिक पवेलियन में हर दिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक स्थानीय कलाकारों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इसमें लोक नृत्य, गीत-संगीत और नुक्कड़ नाटक शामिल होंगे। इससे स्थानीय कलाकारों को मंच मिलेगा और दर्शकों को पूरे दिन मनोरंजन का अवसर मिलेगा।

 

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