गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता खतरे में ……….

बांका के JDU सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता खतरे में है। पार्टी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस देकर उनकी अयोग्यता की मांग कर दी। हजारी-चौधरी के बेटा-बेटी के दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने पर चुप्पी साध लेने वाले नीतीश कुमार की पार्टी ने गिरिधारी यादव की कुर्सी पर तलवार लटका […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 26 मार्च 2026, 08:08 AM 8 मिनट read
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गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता खतरे में ……….
Photo: UB India News Archive

बांका के JDU सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता खतरे में है। पार्टी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस देकर उनकी अयोग्यता की मांग कर दी।

हजारी-चौधरी के बेटा-बेटी के दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने पर चुप्पी साध लेने वाले नीतीश कुमार की पार्टी ने गिरिधारी यादव की कुर्सी पर तलवार लटका दी है।

गिरिधारी की सांसदी बचेगी या चली जाएगी। क्या बिहार की राजनीति में एक बार फिर ‘अनुशासन’ का चोला ओढ़कर सत्ता का गणित साधा जा रहा है। इन्हीं सवालों का जवाब आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…।

 JDU अपने सांसद की सदस्यता क्यों खत्म कराना चाहती है? क्या आरोप है?

पार्टी के संसदीय दल के नेता और सुपौल से सांसद दिलेश्वर कामत ने नोटिस में यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण अयोग्य घोषित करने की मांग की है।

गिरिधारी यादव पर 2 बड़े आरोप हैं…

गिरिधारी यादव ने अपने बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन को विधानसभा चुनाव में RJD से टिकट दिलवाया। वह बांका की बेलहर सीट से JDU प्रत्याशी मनोज यादव के खिलाफ महागठबंधन के कैंडिडेट थे। सांसद ने पार्टी लाइन से अलग जाकर अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार किया, लेकिन वो हार गए।

जुलाई 2025 में यादव ने पार्टी लाइन से अलग जाकर EVM के खिलाफ सार्वजनिक बयान दिया था। जिसे पार्टी ने अपने आधिकारिक रुख के खिलाफ बताया था और कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

नोटिस में कहा गया था, ‘चुनावी साल में इतने संवेदनशील मामले पर आपकी सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल पार्टी के लिए शर्मिंदगी का कारण बनती हैं, बल्कि विपक्ष के लगाए गए निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोपों को अनजाने में विश्वसनीयता भी मिलती हैं।’

JDU के एक्शन पर नेताओं के बयान…

  • JDU सांसद दिलेश्वर कामत ने कहा, ‘पिछले विधानसभा चुनाव में सांसद ने अपने बेटे को RJD से टिकट दिलवाया और उसके समर्थन में प्रचार किया। उन्होंने पार्टी विरोधी गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। इसी कारण पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है और इसी आधार पर लोकसभा अध्यक्ष को कार्रवाई करने का पत्र भेजा गया है।’
  • JDU की कार्रवाई पर बांका सांसद गिरिधारी यादव ने कहा, ‘जब मुझसे पूछा जाएगा तो मैं स्पीकर को जवाब दूंगा और सबूत पेश करूंगा। 2010 में पार्टी में शामिल होने के बाद से ही मैं नीतीश कुमार का समर्थन करता रहा हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरे खिलाफ ऐसा नोटिस क्यों भेजा गया।’
  • यादव ने कहा, ‘मेरा बेटा RJD में है, लेकिन वह बालिग है और जो चाहे करने के लिए स्वतंत्र है। लोकतंत्र में ऐसा कोई नियम नहीं है कि परिवार का कोई सदस्य विरोधी पार्टी में शामिल नहीं हो सकता। इस मामले पर स्पीकर फैसला करेंगे।’
  • JDU सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा, ‘गिरिधारी यादव ने राजद के टिकट पर अपने बेटे को मैदान में उतारा था। खुद बेटे के लिए चुनाव प्रचार किया था। इसके प्रमाण मिले हैं। इसी आधार पर हमारे संसदीय नेता ने उनको अयोग्य करने का आवेदन सौंपा है। अब इस पर स्पीकर विचार करेंगे।’
  • JDU सांसद और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा, ‘चुनाव के दौरान उनके (JDU सांसद गिरिधारी यादव) बेटे ने RJD जॉइन कर ली और उसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा जहां से वे सांसद हैं। उन्होंने RJD के टिकट पर चुनाव लड़ा और उनके लिए चुनाव प्रचार किया। यह स्पष्ट रूप से पार्टी छोड़ने का मामला है। इसके बाद और क्या बचता है?’
  • RJD सांसद मीसा भारती ने कहा, ‘वह JDU सांसद हैं। मेरा मानना ​​है कि अगर उनके बेटे ने चुनाव लड़ा है, तो वह वयस्क हैं और उन्हें खुद सोचना चाहिए। उन्होंने अपना फैसला खुद लिया है। हमें देखना होगा कि क्या कार्रवाई की जाती है, लेकिन यह गलत है। जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और अपने फैसले खुद लेते हैं।’

2ः JDU के नोटिस देने से क्या बांका सांसद गिरिधारी यादव की जाएगी सांसदी?

संभावना बेहद कम है, लेकिन आखिरी फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को करना है। दरअसल, सांसद की सदस्यता पार्टी नोटिस देकर खत्म नहीं करा सकती।

सांसद सदस्य की अयोग्यता के लिए संविधान की 10वीं अनुसूची में प्रावधान किया गया है। जिसे दलबदल विरोधी कानून भी कहा जाता है।

संविधान की 10वीं अनुसूची की धारा-2 कहती है कि किसी सदस्य की सदस्यता 2 ही स्थितियों में जा सकती है।

  1. जब कोई सदस्य अपनी पार्टी की सदस्यता इच्छा से छोड़ दे।
  2. जब कोई व्यक्ति पार्टी के व्हिप के खिलाफ वोट दे।

धारा की व्याख्या में स्पष्ट लिखा है, ‘चुनाव में जिस राजनीतिक पार्टी ने किसी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया था, वह उसी पार्टी का सदस्य माना जाएगा।’

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला है…

  • सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग केसों (जी. विश्वनाथन और अमर सिंह) में स्पष्ट कहा है- ‘अगर पार्टी सांसद को निकाल भी दे तो भी वह मूल पार्टी का सदस्य माना जाता है, जब तक वह खुद दूसरी पार्टी जॉइन न कर ले। जॉइन करने पर ही डिफेक्शन लागू होता है।’
  • 2016 में अमर सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने अपना स्टैंड क्लियर करते हुए कहा था- पार्टी के निष्कासन से स्वतः अयोग्यता नहीं होती। सांसद अनअटैच्ड (स्वतंत्र/बिना किसी पार्टी के) के रूप में सदन में रहते हैं। अगर बाद में कोई नई पार्टी जॉइन या व्हिप तोड़ता है तो स्पीकर फैसला ले सकते हैं।
2025 विधानसभा चुनाव से पहले JDU सांसद गिरिधारी यादव के बेटे ने RJD जॉइन की थी। वे बेलहर सीट से JDU के खिलाफ चुनाव लड़ थे।
2025 विधानसभा चुनाव से पहले JDU सांसद गिरिधारी यादव के बेटे ने RJD जॉइन की थी। वे बेलहर सीट से JDU के खिलाफ चुनाव लड़ थे।

क्या गिरिधारी JDU के पहले नेता हैं, जिनके बेटे ने दूसरे दल से चुनाव लड़ा?

नहीं। हाल फिलहाल में ऐसे दो नेता और हैं। महेश्वर हजारी और अशोक चौधरी। 2024 लोकसभा चुनाव के समय महेश्वर हजारी और अशोक चौधरी नीतीश सरकार में JDU कोटे से मंत्री थे।

हजारी के बेटे सन्नी हजारी कांग्रेस के टिकट पर और चौधरी की बेटी शांभवी चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) के टिकट पर समस्तीपुर से चुनाव मैदान में थी। अशोक चौधरी नीतीश कुमार की 10वीं सरकार में भी मंत्री हैं। और महेश्वर हजारी बतौर विधायक अभी मंत्री रेस में हैं।

हजारी-चौधरी पर कार्रवाई क्यों नहीं…

  • पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘महेश्वर हजारी नीतीश कुमार के पुराने भरोसेमंद हैं। चौधरी भी काफी करीबी हैं। दोनों दलित समाज से आते हैं। चौधरी की बेटी NDA की पार्टी के टिकट पर ही थी, इसलिए कोई नाराजगी जैसी बात नहीं है।’
  • प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘गिरिधारी यादव नीतीश के कोर वोटर वाले समाज से नहीं आते हैं। हजारी-चौधरी दलित हैं। दलितों का नीतीश पर भरोसा रहा है, ऐसे में उन पर कार्रवाई करने से गलत मैसेज जा सकता था। यादव पर कार्रवाई करने से वोट बैंक भी नहीं बिगड़ेगा और असंतुष्टों को चेतावनी भी मिल जाएगी।’

बांका सांसद पर एक्शन लेकर JDU क्या मैसेज देना चाहती है?

मौटे तौर पर इसके 3 बड़े मैसेज हैं…

1. पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि: कोई भी नेता (चाहे सांसद ही क्यों न हो) पार्टी लाइन के खिलाफ नहीं जा सकता। विपक्ष को फायदा पहुंचाने वाले बयान या गतिविधियां बर्दाश्त नहीं होंगी। हम किसी भी हालत में इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते।

2. NDA में एकजुटता जरूरीः JDU अभी NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) का हिस्सा है और नीतीश कुमार राज्य सरकार की बागडोर छोड़कर दिल्ली जा रहे हैं। उनके बेटे निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। ऐसे में गठबंधन में एकजुटता दिखानी जरूरी है।

अगर बयानबाजी करने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आगे दिक्कत हो सकती है। गठबंधन में पार्टी अपने ट्रस्ट को बनाए रखना चाहती है। इस कार्रवाई से JDU दिखाना चाहती है कि पार्टी में ‘नीतीश की नजर’ से बाहर जाने पर सख्ती बरती जाएगी।

3. असंतुष्टों को सीधी चेतावनी-हम तेजस्वी-कांग्रेस नहीं हैः विधानसभा चुनाव में कुछ नेताओं के नाराज होने की खबरें आई थी। हाल में JDU ने 11 नेताओं को पार्टी से बाहर निकाला है। अब गिरधारी पर कार्रवाई के लिए नोटिस दे दिया है।

इस कार्रवाई के जरिए JDU नेतृत्व अपने असंतुष्ट नेताओं को सीधी चेतावनी दे रहा है कि हमको तेजस्वी यादव और कांग्रेस समझने की भूल मत करें। JDU कमजोर नेतृत्व नहीं, मजबूत लीडरशिप वाली पार्टी है।

  • दरअसल, राज्यसभा चुनाव में RJD कैंडिडेट को ही RJD का एक विधायक वोट देने नहीं आया। इस पर 10 दिन बाद भी तेजस्वी यादव ने कोई कार्रवाई नहीं की है। और ना ही कारण बताओ नोटिस ही जारी किया है।
  • कांग्रेस के 3 विधायक भी वोटिंग से गैर हाजिर थे। पार्टी ने अब तक सिर्फ कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। कांग्रेस तो अब तक विधायक दल का नेता तक नहीं चुन पाई है।
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