- नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ लेने के बाद भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कहा, “नीतीश कुमार भारत में एक ‘मानक’ की तरह हैं. मैं उन्हें 40 सालों से जानता हूं. मुझे लगता है कि यह उनके जीवन का चौथा अध्याय है. वह पहले कभी राज्यसभा के सदस्य नहीं रहे थे. वे लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रहे हैं और अब वे राज्यसभा में प्रवेश कर रहे हैं. इस तरह वे संविधान में बताए गए राज्य और देश के लोकतंत्र के चारों स्तंभों के सदस्य बन गए हैं, लेकिन हमारे लिए और पूरे बिहार के लिए वे मुख्यमंत्री हैं और राज्य उनके मार्गदर्शन के अनुसार ही काम करता रहेगा. वे लोकप्रिय हैं और सभी उन्हें स्वीकार करते हैं. वे एक अच्छे इंसान हैं. मैं उन्हें बधाई देता हूं.”
- JDU नेता संतोष निराला ने नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ लेने पर कहा, “खुशी की बात है कि हमारे नेता नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ ले रहे हैं. हम सब उन्हें बधाई देने के लिए आए हुए हैं इसी तरह से और आगे बढ़ते रहे देश की राजनीति और राज्य की राजनीति जो आपकी पहचान है उस पहचान को और मजबूती से बिहार को आगे लेकर जाए.”
- बिहार JDU अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ लेने पर कहा , “बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के बिना पत्ता नहीं हिल सकता है. नीतीश कुमार जो चाहते हैं वही होता है नीतीश कुमार के हिसाब से ही बिहार की राजनीति आगे चलेगी और इसमें जल्दबाजी किस बात की है. आज उनका (नीतीश कुमार) शपथ समारोह है तो उनका ये पहले से कार्यक्रम तय था और ये सदन की गरिमा की बात है. हम लोग के लिए ये गर्व की बात है कि उनके नेतृत्व में हमें काम करने का मौका मिला. बिहार में नीतीश मॉडल ही लागू रहेगा.”
दिलीप जायसवाल भी भाजपा के कद्दावर नेता हैं. उन्होंने कई बार मंत्री पद संभाला है. उनका भी सीएम पद की रेस में नाम चल रहा है. इसके बाद नित्यानंद राय भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हैं. बिहार में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है. खासकर ओबीसी और पिछड़े वर्गों में उनका अच्छा प्रभाव है. रेणु देवी भाजपा की महिला नेता हैं और वे पूर्व उप मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं. दलित और महिला आरक्षण को ध्यान में रखते हुए उनका नाम अहम माना जा रहा है. संजीव चौरसिया भाजपा के प्रमुख चेहरे हैं जिनकी ब्राह्मण समुदाय में अच्छी पकड़ है. जनक राम भी पार्टी के अंदर सक्रिय नेता हैं. यह दोनों नाम भी सीएम पद की रेस में शामिल हैं.
बिहार की राजनीति में 1946 से 2026 तक 23 अलग-अलग नेताओं ने मुख्यमंत्री पद संभाला. राज्य के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह थे, जिन्होंने 1946 से 1961 तक लंबा कार्यकाल पूरा किया. इसके बाद समय-समय पर कई नेताओं ने सत्ता संभाली, जिनमें महामाया प्रसाद सिन्हा, कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी प्रमुख हैं. वहीं, नीतीश कुमार सबसे लंबे समय तक और रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री रहे, जिनका कार्यकाल अलग-अलग चरणों में 2000 से 2026 तक फैला रहा. जीतन राम मांझी ने भी 2014-2015 के बीच मुख्यमंत्री पद संभाला. 2026 में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है.







