वर्ष 2018 में सम्राट चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. इस पॉलिटिकल ट्रांजिसन के बाद तो भाजपा उनके लिए एक ऐसा मंच साबित हुई जहां उनकी आक्रामक शैली और कुशल सांगठनिक क्षमता को सही पहचान मिली. पार्टी ने उन्हें पहले प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया और फिर 2023 में बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष […]
By UB India News • Patna, Bihar बुधवार, 15 अप्रैल 2026, 05:24 AM • 4 मिनट read
वर्ष 2018 में सम्राट चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. इस पॉलिटिकल ट्रांजिसन के बाद तो भाजपा उनके लिए एक ऐसा मंच साबित हुई जहां उनकी आक्रामक शैली और कुशल सांगठनिक क्षमता को सही पहचान मिली. पार्टी ने उन्हें पहले प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया और फिर 2023 में बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी. इसी दौरान सम्राट ने अपना मशहूर ‘मुरेठा’ (साफा) बांधने का संकल्प लिया था. उन्होंने कसम खाई थी कि जब तक बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार नहीं बन जाती, वे अपना मुरेठा नहीं खोलेंगे.
डिप्टी सीएम से सीएम तक का सफर
इसके बाद बिहार की राजनीति में फिर बदलाव हुआ और जनवरी 2024 में जब नीतीश कुमार ने फिर से पाला बदलकर एनडीए (NDA) का दामन थाम लिया. नई सरकार में सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया और वह नीतीश कुमार के साथ हो लिए. इस दौरान उन्होंने पहले वित्त और बाद में गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले. वर्ष 2025 के विधानसभा चुनावों में तारापुर से बड़ी जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी लोकप्रियता भी साबित की. अब, जब नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने गए और उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया तो भाजपा ने अपने सबसे भरोसेमंद चेहरे सम्राट चौधरी को कमान सौंपी है.
सम्राट चौधरी के राजनीतिक सफर की मुख्य उपलब्धियां
- सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा.
- सम्राट चौधरी महज 31 साल की उम्र में 1999 में कृषि मंत्री बने.
- परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने थे सम्राट चौधरी.
- 19 मई 1999: बिहार सरकार में कृषि मंत्री के पद की शपथ ली.
- 2000-2010: परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव लड़ा और जीता.
- 2010: बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के मुख्य सचेतक बनाए गए.
- 2 जून 2014: शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री पद की शपथ ली.
- 2018: राजद और जदयू में रहने के बाद सम्राट चौधरी का भाजपा में शामिल.
- 2018: भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया.
- 24 अगस्त 2022 से 20 अगस्त 2023 सम्राट चौधरी बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता
रहे.
- मार्च 2023 से 25 जुलाई 2024 तक सम्राट चौधरी बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे.
- जनवरी 2024 में बिहार का उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया गया.
- 20 नवंबर 2025 को सम्राट चौधरी ने फिर से डिप्टी सीएम पद की शपथ ली.
- 15 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी तक पहुंच गए सम्राट चौधरी
पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री: एक नया युग
बिहार के इतिहास में यह पहली बार है जब भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रहा है. अब तक भाजपा ने हमेशा नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार किया था, लेकिन सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा ने अब ‘लीडिंग रोल’ प्राप्त कर लिया है. जेडीयू कोटे से बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी का उनके साथ डिप्टी सीएम के तौर पर काम करना बिहार की बदली हुई राजनीतिक सच्चाई को भी बता रहा है.
तीन दौर की राजनीति, एक चेहरा, सम्राट चौधरी कैसे बिहार की सत्ता के शीर्ष तर पहुंचे. भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ.
सम्राट के उदय का राजनीतिक महत्व और संदेश
सम्राट चौधरी की यात्रा यह दिखाती है कि बिहार की राजनीति में लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) और समय के साथ खुद को ढालना कितना अहम है. उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक ध्रुवों के साथ काम करते हुए अनुभव प्राप्त किया और अंततः सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे. अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती शासन की है. वो नीतीश कुमार को रीप्लेस कर रहे हैं ऐसे में बिहार की जनता की अपेक्षाएं नई सरकार से काफी ज्यादा हैं और यही आने वाले समय में उनकी असली परीक्षा भी होगी.