मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहजता से बड़े और ऐतिहासिक फैसले लेने में माहिर रहे हैं। शराबबंदी जैसा साहसिक फैसला एक झटके में लेकर उन्होंने सबको चौंका दिया था। नौ जुलाई, 2015 को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में जीविका दीदियों की मांग पर उन्होंने कहा कि अगली बार सरकार में आएंगे तो शराबबंदी लागू करेंगे। नवंबर, 2015 में सरकार बनते ही उन्होंने शराबबंदी का ऐलान कर दिया और पांच अप्रैल, 2016 को यह लागू हुआ।
नीतीश कुमार ने वर्ष 2005 के नंवबर में मुख्यमंत्री के रूप में बिहार की सत्ता संभाली। अपने कार्यकाल के पहले साल में ही उन्होंने त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों और प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति में महिलाओं को 50 प्रतिशत का आरक्षण देने जैसा ऐतिहासिल फैसला लिया। इसके बाद से लगातार एक-के-बाद एक उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले लिये, जो मिसाल बने। कई फैसलों को केंद्र सरकार तथा दूसरे राज्यों ने अपने यहां लागू भी किया। जलवायु परिवर्तन के संकट के देखते हुए अगस्त, 2019 में उन्होंने जल-जीवन-हरियाली अभियान शुरू किया तो इसकी सराहना संयुक्त राष्ट्र ने भी की। नीतीश कुमार ने एक तरफ शराबबंदी को लेकर कड़े कानून लागू किया, वहीं दूसरी ओर इसके लिए जन-जागरूकता कार्यक्रम भी चलाये। 21 जनवरी, 2017 को राज्य स्तर पर 12 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी मानव शृंखला बनी, जिसमें पांच करोड़ से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।
साल 2023 में राज्य में जाति आधारित और आर्थिक गणना करायी और सभा जातियों की संख्या भी जारी की। इसमें चिह्नित 94 लाख गरीब परिवारों के विकास के लिए अलग से योजना बनायी।
सभी गांवों में बिजली पहुंचाने के बाद नीतीश कुमार ने हर घर बिजली पहुंचाने का संकल्प लिया और यह 2018 में इसे पूरा कर लिया। केन्द्र सरकार ने भी बिहार की हर घर बिजली योजना को अपनाया।
जून, 2016 में लोक शिकायत निवारण अधिकार कानून राज्य में लागू किया, जिसके तहत लोगों की शिकायतें दूर करने का कानूनी अधिकार मिला। इसमें अनुमंडल, जिला और प्रमंडल स्तर पर लोगों को शिकायत करने की सुविधा दी, जिसमें शिकायतकर्ता और संबंधित पदाधिकारी आमने-सामने बैठते हैं, और लोक शिकायत पदाधिकारी सुनवाई कर फैसला देते हैं।
वर्ष 2006 में ग्राम पंचायतों और 2007 में नगर निकायों में हमने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। इसके बाद से चार चुनाव हो चुके हैं। आज बड़ी संख्या में महिलाएं जनप्रतिनिधि बनी हैं। वर्ष 2005 तक जो महिलाएं घर की चौखट नहीं लांघती थी, वहीं आज समाज और राज्य के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। नौकरियों में आरक्षण मिलने से आज बिहार में बड़ी संख्या में महिलाएं नौकरी में आयी। आज देश में सबसे अधिक बिहार में पुलिस बल में महिलाएं हैं। – नीतीश कुमार
भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्ती के लिए विशेष अधिनियम बनाया
वर्ष 2009 में राज्य के भ्रष्ट अधिकारियों के द्वारा अर्जित की गई अवैध संपत्ति की जब्ती के लिए बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम बनाया। इसके तहत कइयों की संपत्ति जब्त भी हुई।
नीतीश के सात निश्चय ने बदली सूबे की सूरत
नीतीश कुमार ने वर्ष 2015 में सात निश्चय योजना का शुभारंभ किया। इसके तहत आर्थिक हल-युवाओं को बल, आरक्षित रोजगार महिलाओं का अधिकार, हर घर तक बिजली, हर घर नल का जल, हर घर शौचालय, टोलों को पक्की सड़कों से जोड़ने तथा अवसर बढ़े आगे पढ़ें पर काम किया गया। वर्ष 2018 में ही हर घर बिजली पहुंचा दी गयी।
वर्ष 2020 से सात निश्चय-2 पर काम प्रारंभ हुआ। इसके तहत युवा शक्ति-बिहार की प्रगति, सशक्त महिला सक्षम महिला, हर खेत तक सिंचाई का पानी, स्वच्छ गांव-समृद्ध गांव, सोलर स्ट्रीट लाइट, स्वच्छ शहर-विकसित शहर, सुलम सम्पर्कता और सबके लिए स्वास्थ्य सुविधा, टेलीमेडिसिन एवं बाल हृदय योजना सभी पर काफी काम हुआ है। सात निश्चय-2 पर काम चल ही रहा है। इसके जो भी काम बचे हैं उन्हें शीघ्र पूरा किया जायेगा।
सात निश्चय-2 के तहत ही युवाओं के लिए 10 लाख नौकरी एवं 10 लाख रोजगार देना तय किया गया। लेकिन सरकार ने लक्ष्य से आगे बढ़कर काम किया। अब तक 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है जबकि 40 लाख को रोजगार दिया जा चुका है। दोनों को मिलाकर 50 लाख युवाओं को नौकरी एवं रोजगार दिया गया है।
अब अगले 5 वर्षों के लिए सात निश्चय-3 का गठन किया गया है। इसमें दोगुना रोजगार-दोगुनी आय के तहत राज्य की प्रति व्यक्ति औसत आय को दोगुना किया जायेगा। अगले 5 वर्षों में युवाओं को 1 करोड़ नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराये जाएंगे। इसके लिए युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन किया गया है। समृद्ध उद्योग सशक्त बिहार के तहत अगले 5 वर्षों में उद्योग लगाने पर पूरा जोर दिया जायेगा। सभी जिलों में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हो रही है। नये बड़े उद्योगों के लिए मुफ्त भूमि एवं अनुदान दिया जा रहा है। पुरानी बंद चीनी मिलों को चालू किया जायेगा।
कृषि में प्रगति प्रदेश की समृद्धि के तहत कृषि विकास के लिए पहले से ही काफी काम किया गया है। राज्य में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्नत शिक्षा उज्ज्वल भविष्य के तहत प्रत्येक प्रखंड में आदर्श विद्यालय एवं डिग्री कॉलेज खोले जा रहे हैं। एक नये एजुकेशन सिटी का निर्माण कराया जायेगा। सुलभ स्वास्थ्य सुरक्षित जीवन के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के लिए जिला एवं प्रखंड के अस्पतालों को विशिष्ट चिकित्सा केन्द्र बनाये जा रहे हैं। राज्य में प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जायेगा।
मजबूत आधार आधुनिक विस्तार के तहत आधारभूत संरचनाओं को बेहतर किया जायेगा जिसमें शहरों का विकास और नये नियोजित शहरों की स्थापना की जायेगी। 5 नये एक्सप्रेस-वे सड़कों का निर्माण तथा ग्रामीण सड़कों का 2-लेन चौड़ीकरण किया जायेगा। सभी इच्छुक लोगों के घर की छतों पर सोलर पैनल लगाये जायेंगे।
बिहार में पर्यटन एवं इको टूरिज्म के विकास पर विशेष जोर दिया जायेगा। पटना में स्पोर्ट्स सिटी का विकास तथा खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जायेगी। सबका सम्मान-जीवन आसान के तहत आधुनिक तकनीक तथा अच्छे प्रशासन के माध्यम से राज्य के सभी नागरिकों के जीवन को आसान बनाया जाएगा।
यात्राओं से विकास का नया मॉडल गढ़ा
नीतीश कुमार बतौर सीएम अपनी यात्राओं को लेकर भी जाने जाते हैं। अपनी यात्राओं के माध्यम से जनता से संवाद तथा धरातल की सच्चाई जान न केवल बिहार के विकास की रूपरेखा बनायी, बल्कि उसका कार्यान्वयन भी सुनिश्चित किया। इसके बाद योजनाओं की जमीन पर जाकर उसकी पड़ताल भी की। बिहार की सत्ता संभालने के बाद नीतीश कुमार ने वर्ष 2005 के बाद बिहार की राजनीति और प्रशासन में यात्राओं को एक स्थायी शैली के रूप में विकसित किया। इन यात्राओं का घोषित उद्देश्य केवल राजनीतिक संपर्क नहीं रहा, बल्कि जनता से सीधा संवाद, योजनाओं की समीक्षा, प्रशासनिक फीडबैक और विकास कार्यों की जमीनी निगरानी भी रहा है। हर यात्रा को अलग राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश के साथ प्रस्तुत किया।
नीतीश कुमार की लगभग सभी यात्राओं में जनता से संवाद, योजनाओं की समीक्षा और राजनीतिक संदेश, ये तीनों तत्व लगातार दिखाई दिए। उनकी अंतिम यात्रा समृद्धि यात्रा इसी साल 16 जनवरी से शुरू हुई थी।
न्याय यात्रा : 12 जुलाई 2005
विकास यात्रा : नौ जनवरी 2009
धन्यवाद यात्रा : 17 जून 2009
प्रवास यात्रा : 25 दिसंबर 2009
विश्वास यात्रा : 28 अप्रैल 2010
सेवा यात्रा : नौ नवंबर 2011
अधिकार यात्रा : 19 सितंबर 2012
संकल्प यात्रा : पांच मार्च 2014
संपर्क यात्रा : 13 नवंबर 2014
निश्चय यात्रा : नौ नवंबर 2016
विकास कार्यों की समीक्षा यात्रा : 12 दिसंबर 2017
जल-जीवन-हरियाली यात्रा : 03 दिसंबर 2019
समाज सुधार अभियान: 22 दिसंबर 2021
समाधान यात्रा: चार जनवरी, 2023
प्रगति यात्रा: 23 दिसंबर 2024
समृद्धि यात्रा: 16 जनवरी 2026
नीतीश कुमार ने सबसे पहले न्याय यात्रा निकाली, जो 2005 में शुरू हुई थी। यात्रा फरवरी 2005 के विस चुनाव के बाद पैदा हुए राजनीतिक विवाद और कांग्रेस के कथित गैर-संवैधानिक कदमों के विरोध की पृष्ठभूमि में सामने आई। दरअसल, 2005 के विस चुनाव के बाद बिहार में सत्ता गठन को लेकर असमंजस की स्थिति थी। एनडीए को सर्वाधिक सीटें तो मिलीं, लेकिन किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। परिणाम स्वरूप राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया। विस भंग कर दी गयी। इसी दौर में नीतीश कुमार ने न्याय यात्रा निकालकर इसे जनादेश के सम्मान और राजनीतिक न्याय के सवाल से जोड़ा। इसे जनादेश की हत्या के खिलाफ अभियान के रूप में प्रस्तुत किया। इस यात्रा ने नीतीश को राज्यव्यापी जनसंपर्क, विपक्षी लामबंदी व राजनीतिक वैकल्पिक नेतृत्व प्रस्तुत करने का मंच भी दिया। उनके आगामी शासन मॉडल की रूपरेखा भी सामने रखी, जिसमें सुशासन के आवरण में गुड गवर्नेंस और विकास को साथ रखा गया। न्याय यात्रा के बाद नीतीश की राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई व अक्टूबर 2005 के चुनाव में एनडीए गठबंधन को बहुमत मिला और इसके बाद नीतीश मुख्यमंत्री बने।
न्याय यात्रा से की शुरुआत समृद्धि यात्रा आखिरी रही
वर्ष 2005 में न्याय यात्रा से शुरू हुआ यह सफर समृद्धि यात्रा के रूप में खत्म हुआ। 2026 की समृद्धि यात्रा के बारे में भी यही कहा गया कि यह केवल औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि बिहार के विकास मॉडल, रोजगार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं की प्रगति का दस्तावेज था। नीतीश कुमार की यात्राओं का मुख्य उद्देश्य विकास योजनाओं की जमीनी समीक्षा, जनता से सीधा संवाद, अधिकारियों पर जवाबदेही सुनिश्चित करना और शासन में जनभागीदारी बढ़ाना रहा है।
नीतीश कुमार की हर यात्रा का अपना अलग फोकस रहा। जैसे प्रगति यात्रा में कार्यों की गति जांचना, समृद्धि यात्रा में आर्थिक विकास व सात निश्चय योजनाओं का मूल्यांकन। साथ ही विकास कार्यों की प्रगति व क्रियान्वयन का आकलन करना, पूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन व नए कार्यों की आधारशिला रखना भी इसका उद्देश्य रहा।सीएम ने अपनी यात्राओं के माध्यम से जनता की शिकायतें सुनीं, सुझाव और प्रशासनिक सुधार के लिए फीडबैक लिया। इससे उन्हें भविष्य की योजना बनाने में तो मदद मिली ही, जमीन पर आम लोगों की जरूरतों को देखने और समझने का भी अवसर मिला। इससे उन्होंने न केवल विकास योजनाएं बनायी, बल्कि राजनीतिक संदेश भी दिया। जन समर्थन मजबूत किया व विकास का एजेंडा सेट किया। ये यात्राएं बिहार के विकास मॉडल को जमीनी स्तर पर लागू करने का माध्यम बनीं, जहां अधिकारियों को जिम्मेवार बनाकर कार्य पूर्ण कराए गए।
मजबूत इच्छा शक्ति ने बेमिसाल बनाया
नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव में एक प्रसंग के दौरान विपक्ष की टोका-टोकी का जवाब देते हुए कहा था-हमलोग रहें न रहें क्या फर्क पड़ता है? लेकिन लोगों ने जब काम करने का मौका दिया है तो कुछ ऐसा काम कर दो कि लोगों को उसका लाभ हो। सच, बिहार के मुख्यमंत्री रूप में उन्होंने ऐसे अनगिनत कार्य किए हैं जो बिहार के विकास में मील के पत्थर हैं और रहेंगे।
नीतीश कुमार ने 24 नवम्बर 2005 को मुख्यमंत्री बनने के बाद कहा था-हम एक छोटी लकीर के समानांतर बड़ी लकीर खीचेंगे। काम करने में विश्वास करते हैं। काम करेंगे और बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। नीतीश कुमार ने दोनों ही बातें अपने करीब दो दशक के शासन के दौरान साबित की। बतौर बिहार के मुख्यमंत्री ऐसी लकीर खींची, जिसे मिटाना मुश्किल होगा।
दो दशकों में बिहार ने जो बदलाव देखा है, वह केवल नीतियों का परिणाम नहीं, बल्कि नीतीश कुमार की विकास के प्रति प्रतिबद्धता और योजनाओं को सरजमीन पर उतारने की उनकी जिद का फलाफल है। बिहार की बागडोर मिलने के बाद वह कहा करते थे, हमारे पास साधन नहीं है। बिहार लैंड लॉक्ड स्टेट है लेकिन हमारे पास पानी है और काम करने वाले मेहनती हाथ। चुनौतियों को हम अवसर में बदलेंगे। और उन्होंने इसे कर के दिखाया, लोगों के हृदय में बिहारी गौरव का बोध जगाने के लिए जब उन्होंने 22 मार्च को ‘बिहार दिवस’ मनाने की शुरुआत की तो राज्यवासी समेत दुनियाभर में रह रहे बिहारियों ने इसे एक पावन पर्व के रूप में हाथों-हाथ लिया।
बेटियाें और महिलाओं को दिया अवसर
नीतीश कुमार ने यूं तो हर क्षेत्र और हर तबके के विकास के लिए काम किया, लेकिन बिहार की बेटियां और महिलाएं घर की देहरी से निकालकर अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर देने के लिए उन्हें सदा याद रखेंगी। नीतीश कुमार ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था-हमने साइिकल योजना की शुरुआत की। गांव-गांव से लड़की साइकिल चलाकर समूह में स्कूल जाने लगी। प्रदेश का पूरा दृश्य बदल गया।
नीतीश कुमार सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए हमेशा याद रखे जाएंगे। उनके शासनकाल में राज्य में एक भी बड़ी साम्प्रदायिक घटना नहीं हुई। एक साक्षात्कार के दौरान राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की हुड़दंग पर की गई उनकी एक टिप्पणी खास है-‘आप अपने घर में उत्साहित हो सकते हैं। खूब ढोल नगाड़ा बजाइए। यह बात समझ लीजिए, यह देश बहुत बड़ा है। कोई एक पार्टी का कार्यकर्ता ही देश नहीं है। इस को समझना चाहिए।
नीतीश कुमार हाशिए के लोगों को मुख्यधारा में लाने को लेकर हमेशा सक्रिय रहे। उनके विकास की योजनाएं बनाईं तथा लाभ के अवसर सृजित कर उन्हें आगे बढ़ाया। अपनी सभाओं में वे कहते थे-विकास का मतलब है समाज के सभी वर्गों का विकास। सभी क्षेत्रों का विकास। खासकर उन्हें मुख्यधारा में लाना है जो किसी कारण पीछे छूट गए हैं।







