81000 एकड़ में पाटलिपुत्र टाउनशिप का विस्तार , नई टाउनशिप में लैंड पूलिंग मॉडल क्या है?

सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व में 22 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें राज्य में 11 नए आधुनिक शहर बसाने का फैसला लिया गया। बिहार की तस्वीर बदलने वाली इन सेटेलाइट टाउनशिप का नामकरण प्राचीन सांस्कृतिक नामों पर होगा। पटना के पुनपुन में 81 हजार एकड़ में पाटलिपुत्र नाम का नया शहर बसेगा। सेटेलाइट टाउनशिप […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 25 अप्रैल 2026, 05:17 AM 13 मिनट read
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81000 एकड़ में पाटलिपुत्र टाउनशिप का विस्तार , नई टाउनशिप में लैंड पूलिंग मॉडल क्या है?
Photo: UB India News Archive

सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व में 22 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें राज्य में 11 नए आधुनिक शहर बसाने का फैसला लिया गया। बिहार की तस्वीर बदलने वाली इन सेटेलाइट टाउनशिप का नामकरण प्राचीन सांस्कृतिक नामों पर होगा। पटना के पुनपुन में 81 हजार एकड़ में पाटलिपुत्र नाम का नया शहर बसेगा। सेटेलाइट टाउनशिप के लिए चुने गए इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। बिहार में दिल्ली-मुंबई जैसे कॉनसेप्ट पर प्लांड कॉलोनियां बसेंगी। इनमें बाजार और रहने के लिए जगह तय होंगे। चौड़ी सड़कें होंगी। हरियाली के लिए सड़क किनारे और पार्क में पेड़ लगाए जाएंगे।

बिहार की राजधानी पटना के स्वरूप में आने वाले वर्षों में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव दिखने वाला है. बिहार सरकार ने राज्य की अब तक की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड टाउनशिप विकसित करने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है. पटना के समीप लगभग 81,000 एकड़ में फैलने वाली यह टाउनशिप अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी और इसे ‘सैटेलाइट सिटी’ के रूप में पहचाना जाएगा. यह प्रोजेक्ट राज्य सरकार की उन 11 नए शहरों को बसाने की योजना का मुख्य हिस्सा है, जो बिहार के शहरीकरण की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित होगा.

कनेक्टिविटी का महाजाल: रिंग रोड और एक्सप्रेसवे

इस टाउनशिप की सबसे बड़ी खासियत इसकी शानदार कनेक्टिविटी होगी. सरकार की योजना के अनुसार, इस विशाल टाउनशिप के बीच से आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे गुजरेगा. इसके साथ ही पटना के आसपास बन रहा सिक्स-लेन रिंग रोड भी इसी क्षेत्र को जोड़ेगा. यह महाजाल न केवल आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति देगा. यातायात की इन सुविधाओं से इस नए शहर में रहने वालों के लिए राजधानी के मुख्य हिस्सों और अन्य जिलों तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा.

81 हजार एकड़ में फैला होगा शहर

पटना के पास बनने वाले टाउनशिप की प्लानिंग शहर को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने के लिए की गई है. करीब 81 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला होगा. इसमें फिनटेक सिटी, स्पोर्ट्स सिटी, लॉजिस्टिक हब और ज्यूडिशियल एकेडमी जैसी सुविधाएं विकसित होंगी.

बिहार की नई टाउनशिप में लैंड पूलिंग मॉडल क्या है?

लैंड पूलिंग मॉडल एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सरकार और जमीन मालिक एक विकास भागीदार (Development Partner) के रूप में काम करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बिना किसी विवाद के आधुनिक शहरों (ग्रीनफील्ड टाउनशिप) का निर्माण करना है।

  • सरकार किसानों से अविकसित भूमि लेती है। विकास के बाद कुल जमीन का 55% हिस्सा विकसित प्लॉट के रूप में मूल मालिकों को वापस कर दिया जाता है, जबकि शेष 45% का उपयोग सड़क, पार्क और बुनियादी सुविधाओं के लिए होता है।
  • सरकार इस क्षेत्र में बिजली, पानी, ड्रेनेज और चौड़ी सड़कों का जाल बिछाती है। इससे वापस मिलने वाली 55% जमीन की बाजार कीमत मूल जमीन के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है, जिससे मालिकों को भारी मुनाफा होता है।
  • इस योजना में देरी होने पर जुर्माने का प्रावधान है। जमीन का आवंटन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता है और पारदर्शिता के लिए इसका नक्शा राजस्व विभाग के पास सुरक्षित रहता है।

लैंड पूलिंग मॉडल में जमीन के बदले पैसा मिलता है या नहीं?

लैंड पूलिंग मॉडल में जमीन के बदले पैसा नहीं मिलता है। सरकार जमीन के बदले नकद मुआवजा नहीं देती है। इसके बजाय, ये एक ‘विकास भागीदारी’ मॉडल है। इसमें भूमि मालिक को उसकी अविकसित जमीन के बदले 55 प्रतिशत विकसित जमीन (प्लॉट) वापस दी जाती है। सरकार का तर्क है कि आधुनिक सुविधाओं (सड़क, पार्क, बिजली) के कारण इस छोटी हिस्सेदारी की बाजार कीमत मूल जमीन की तुलना में कहीं अधिक हो जाती है। यह सीधे पैसे के बजाय भविष्य के पूंजीगत लाभ पर केंद्रित निवेश अवसर है।

बिहार के किस-किस जिले में बन रही नई टाउनशिप?

बिहार सरकार ने कुल 11 शहरों के पास आधुनिक ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बनाने का फैसला लिया है। इन नए शहरों को अपनी एक सांस्कृतिक पहचान देने के लिए सरकार ने इनके विशेष नाम भी तय किए हैं। ग्रुप नंबर एक का मास्टर प्लान 31 मार्च 2027 तक आएगा। जिसमें पटना (पाटलिपुत्र), सोनपुर (हरिहरनाथपुरम), गया (मगध), दरभंगा (मिथिला), सहरसा (कोसी), पूर्णिया (पूर्णिया) और मुंगेर (अंग) शामिल है। जबकि, ग्रुप नंबर दो का मास्टर प्लान 30 जून 2027 तक आएगा। जिसमें मुजफ्फरपुर (तिरहुत), भागलपुर (विक्रमशिला), छपरा (सारण) और सीतामढ़ी (सीतापुरम) शामिल है।

बिहार के पाटलिपुत्र टाउनशिप में जमीन कैसे खरीदें?

बिहार के नए 11 ग्रीनफील्ड टाउनशिप में फिलहाल जमीन खरीदना संभव नहीं है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने इन सभी 11 चिह्नित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ये रोक मास्टर प्लान अधिसूचित होने तक (मार्च 2027 से जून 2027 के बीच तक) प्रभावी रहेगी। जब सरकार इन टाउनशिप को विकसित कर लेगी, तब जमीन खरीदे जा सकते हैं। सरकार अपने पास रखे गए हिस्से (जो लागत निकालने के लिए रखा गया है) को व्यावसायिक या आवासीय उद्देश्यों के लिए आम जनता या डेवलपर्स को बेचेगी। इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके अलावा जब 55% विकसित जमीन मूल मालिकों को वापस मिल जाएगी और सरकार खरीद-बिक्री से रोक हटा लेगी, तब उन निजी मालिकों से विकसित प्लॉट खरीद सकते हैं।

कोर एरिया और स्पेशल एरिया में बंटेगा-टाउनशिप को दो हिस्सों में विकसित किया जाएगा. विशेष क्षेत्र लगभग 81,730 एकड़ और कोर एरिया लगभग 1,010 एकड़.

शहर से दूरी और लोकेशन

  • इस टाउनशिप का कोर एरिया पटना शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर होगा.
  • मौर्यालोक से दूरी: 21 किमी
  • पटना जंक्शन: 20 किमी
  • पटना एयरपोर्ट: 24 किमी
  • कोर एरिया के पास बिहटा-सरमेरा रोड, प्रस्तावित रेलवे जंक्शन और स्पोर्ट्स सिटी जैसी सुविधाएं होंगी.
  • 9 प्रखंड के 274 गांव शामिल- इस टाउनशिप के विशेष क्षेत्र में पुनपुन, फतुहा, संपतचक, नौबतपुर, पटना ग्रामीण, दानियावां, धनरुआ, मसौढ़ी समेत 9 प्रखंडों के 274 गांव शामिल किए गए हैं. इसके अतिरिक्त पुनपुन नगर पंचायत के 6 वार्ड भी रखे गए हैं.
  • कोर एरिया के गांव के नाम जानिए- कोर एरिया में 12 गांव शामिल होंगे. इनमें पीपरा, बाजिदपुर, पनवार, नुरुद्दीनपुर, डुमरी, नादपुर खैरी, खापुरा, कलियानपुर बसियावां, पीपरा चक और सिकंदरपुर गांव शामिल हैं.
  • जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक- सरकार ने टाउनशिप के लिए चिन्हित क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण पर रोक लगा दी है. फिलहाल इसका मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है.

बिहार के सैटेलाइट टाउनशिप में क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?

बिहार की नई ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को पूरी तरह से आधुनिक और स्मार्ट शहर की तर्ज पर डिजाइन किया जाएगा। यहां रहने वालों को वो सभी सुविधाएं मिलेंगी जो वर्तमान में बड़े महानगरों (जैसे- गुरुग्राम, नोएडा और चंडीगढ़) में मिलती हैं।

  • मास्टर प्लान के तहत 22% जमीन सिर्फ सड़कों के लिए रखी गई है। इसमें मुख्य सड़कें 2-लेन से लेकर 6-लेन तक की होंगी।
  • बिजली के तार, इंटरनेट केबल और ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से अंडरग्राउंड होंगे, जिससे शहर साफ-सुथरा दिखेगा।
  • टाउनशिप को प्रमुख एक्सप्रेसवे (जैसे पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे) और रिंग रोड से जोड़ा जाएगा।
  • पटना के पाटलिपुत्र टाउनशिप में फिनटेक सिटी, स्पोर्ट्स सिटी, लॉजिस्टिक हब और ज्यूडिशियल एकेडमी जैसी सुविधाएं होंगी।
  • आईटी और सॉफ्टवेयर पार्कों के लिए अलग से जगह आरक्षित होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर नौकरियां मिलेंगी।
  • शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स और कमर्शियल स्पेस टाउनशिप के भीतर ही विकसित किए जाएंगे।
  • टाउनशिप के कुल क्षेत्र का 5% हिस्सा पार्कों, स्टेडियम और ओपन ग्रीन स्पेस के लिए सुरक्षित रखा गया है।
  • अत्याधुनिक सरकारी और निजी अस्पताल, बड़े स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थान (जैसे स्किल ट्रेनिंग सेंटर) टाउनशिप के भीतर ही होंगे।
  • ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए 3% जमीन आरक्षित है, जिससे समाज के कमजोर वर्ग को भी आधुनिक सुविधाओं के साथ रहने का मौका मिलेगा।

अन्य शहरों में भी टाउनशिप

स्पोर्ट्स सिटी और फिनटेक सिटी: आधुनिकता की पहचान

नई टाउनशिप सिर्फ आवासीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी. सरकार इसे एक बड़े आर्थिक और खेल केंद्र के रूप में विकसित करने जा रही है. इसके भीतर एक भव्य ‘स्पोर्ट्स सिटी’ बनाई जाएगी, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल मैदान और प्रशिक्षण केंद्र होंगे. इसके अलावा, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के लिए एक ‘फिनटेक सिटी’ (Fintech City) भी प्रस्तावित है. यह क्षेत्र आईटी और फाइनेंशियल कंपनियों को आकर्षित करेगा, जिससे बिहार के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

लॉजिस्टिक हब और रोजगार के नए अवसर

इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट में एक विशाल ‘लॉजिस्टिक हब’ की भी योजना है. पटना के पास होने और एक्सप्रेसवे की पहुंच के कारण यह जगह वेयरहाउसिंग और माल ढुलाई के लिए सबसे उपयुक्त मानी जा रही है. यह हब बिहार के औद्योगिक विकास में रीढ़ की हड्डी साबित होगा. इससे छोटे और बड़े उद्योगों को माल की सप्लाई करने में मदद मिलेगी, जिससे व्यापार की लागत कम होगी.

पर्यावरण और जीवनशैली पर जोर

ग्रीनफील्ड टाउनशिप होने के कारण, यहां हरियाली और व्यवस्थित विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. चौड़ी सड़कें, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, स्कूल, अस्पताल और पार्क इस शहर का मुख्य आकर्षण होंगे. भीड़भाड़ वाले पुराने पटना शहर पर दबाव कम करने के उद्देश्य से बसाए जा रहे इस नए शहर में रहने के लिए हर वर्ग के लोगों को सुविधाएं मिलेंगी. बिहार सरकार का लक्ष्य है कि यहाँ की जीवनशैली देश के अन्य विकसित महानगरों के बराबर हो.
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