बिहार सरकार ने राज्य को टेक्नोलॉजी के नक्शे पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. ‘बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026’ को अंतिम रूप देते हुए सरकार ने निवेशकों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया है. इस नीति का उद्देश्य राज्य में सेमीकंडक्टर और एआई इंडस्ट्री को बढ़ावा देना, बड़े निवेश को आकर्षित करना […]
By UB India News • Patna, Bihar रविवार, 26 अप्रैल 2026, 06:40 AM • 4 मिनट read
बिहार सरकार ने राज्य को टेक्नोलॉजी के नक्शे पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. ‘बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026’ को अंतिम रूप देते हुए सरकार ने निवेशकों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया है. इस नीति का उद्देश्य राज्य में सेमीकंडक्टर और एआई इंडस्ट्री को बढ़ावा देना, बड़े निवेश को आकर्षित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है. नई नीति के तहत निवेश करने वाली कंपनियों को बिजली, जमीन और पूंजीगत निवेश (Capital Investment) पर भारी सब्सिडी दी जाएगी. सरकार का मानना है कि बिहार में उपलब्ध विशाल मानव संसाधन (Human Resource) और सस्ते श्रम का लाभ उठाकर सेमीकंडक्टर कंपनियां यहां अपनी असेंबली और टेस्टिंग इकाइयां स्थापित कर सकती हैं.
सस्ती बिजली और पानी की बड़ी राहत
नई नीति के तहत सेमीकंडक्टर यूनिट्स को मात्र 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी. वास्तविक लागत का शेष हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी. जानकारी के अनुसार, यह सुविधा 10 वर्षों तक लागू रहेगी, भले ही बिजली दरों में बढ़ोतरी क्यों न हो. इसके अतिरिक्त, उद्योगों को 4 रुपये प्रति घन मीटर की दर से पानी उपलब्ध कराया जाएगा. यह रियायत भी यूनिट स्थापित होने के बाद 10 साल तक मिलेगी. सरकार का मानना है कि इससे उत्पादन लागत में बड़ी कमी आएगी और निवेश आकर्षित होगा.
पेटेंट और लोन पर विशेष सहायता
नीति में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट फाइलिंग पर भी बड़ी राहत दी गई है. कंपनियों को पेटेंट लागत का 75% तक प्रतिपूर्ति मिलेगी. भारत में पेटेंट के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तो विदेश में पेटेंट के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये की लागत आएगी. इसके साथ ही, बैंक या वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋण पर 5% ब्याज सब्सिडी दी जाएगी. यह सहायता उत्पादन शुरू होने के बाद 7 वर्षों तक मिलेगी और इसकी अधिकतम सीमा 25 करोड़ रुपये तय की गई है.
निवेश और रोजगार का लक्ष्य
बता दें कि बिहार सरकार ने इस सेक्टर में 25 हजार करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य रखा है. अनुमान है कि वर्ष 2030 तक इससे 2 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे. साथ ही, अगले 5 वर्षों में 50 हजार सेमीकंडक्टर प्रोफेशनल तैयार करने की योजना है. सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के जीएसडीपी में इस क्षेत्र का योगदान 5% तक पहुंचाया जाए.
एआई और टेक हब बनने की तैयारी
दरअसल, अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार ने एआई और सेमीकंडक्टर क्लस्टर बनाने की घोषणा की थी. इसके तहत मोबाइल, ड्रोन और मिसाइलों के लिए चिप निर्माण का लक्ष्य रखा गया है.
नीति में मेगा टेक सिटी, फिनटेक सिटी और स्मार्ट सिटी के विकास की भी योजना शामिल है. साथ ही, केंद्र सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन से जुड़कर चिप मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और डिजाइन यूनिट्स स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है.
टैलेंट पूल और स्किलिंग पर जोर
एआई हब बनाने के लिए सरकार आईआईटी पटना और एनआईटी जैसे संस्थानों के साथ मिलकर विशेष ‘एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित करेगी. राज्य के युवाओं को सेमीकंडक्टर चिप डिजाइनिंग और एआई कोडिंग में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि उन्हें राज्य के भीतर ही उच्च वेतन वाली नौकरियां मिल सकें.
लागत और औद्योगिक ढांचा
सेमीकंडक्टर फैब यूनिट्स की स्थापना में भारी निवेश की जरूरत होती है. जिनमें बड़ी फैब यूनिट्स के लिए 80 हजार करोड़ से 2.5 लाख करोड़ रुपये, पैकेजिंग और टेस्टिंग यूनिट्स के लिए 7 हजार से 27 हजार करोड़ रुपये और सहायक इकाइयों के लिए 10 करोड़ से 50 करोड़ रुपये लगते हैं. ऐसे में राज्य सरकार की सब्सिडी और रियायतें निवेशकों के लिए बड़ा आकर्षण बन सकती हैं.
निवेश और सब्सिडी का गेमचेंजर दांव
जानकारों की नजर में बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 राज्य के औद्योगिक विकास के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. सस्ती बिजली-पानी, पेटेंट सहायता और ब्याज सब्सिडी जैसे कदम निवेशकों को आकर्षित करने में मदद करेंगे. यदि योजना सफल होती है, तो बिहार आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख टेक हब के रूप में उभर सकता है.