बिहार में चुनावी इतिहास का एक बड़ा अध्याय अब बंद हो चुका है। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में इस्तेमाल हुई एम-1 मॉडल की ईवीएम को निर्वाचन आयोग ने नष्ट कर दिया है, जबकि 2005 से विभिन्न लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उपयोग की गई दो लाख से अधिक एम-2 मॉडल मशीनों को भी चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जा चुका है। अब चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह अधिक उन्नत और पारदर्शी मानी जा रही एम-3 मॉडल ईवीएम पर आ गई है।
2005 के पहले बिहार में एम -1 मॉडल ईवीएम से चुनाव हुआ था। बिहार में इस ईवीएम का पहली बार आम चुनाव में सभी सीटों पर इस्तेमाल 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान किया गया था। इसके पहले 1999 में लोस चुनाव बैलेट पेपर से कराये गये थे। तब 61.48 प्रतिशत मतदान हुआ था और बूथ कैप्चरिंग के भी आरोप लगे थे। लेकिन जब 2004 में ईवीएम से मतदान हुआ तब वोट प्रतिशत कम हो कर 58.04 प्रतिशत रह गया। अब, इन एम-1 मॉडल के ईवीएम को 2018-19 के बाद नष्ट किया जा चुका है।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, एक ईवीएम की आयु अधिकतम 15 साल होती है। एम -2 मॉडल के 2005-06 में उपयोग में आने के बाद एम-1 मॉडल की ईवीएम का उपयोग पूरी तरह बंद हो गया। इसके बाद पुरानी ईवीएम में थोड़ा सुधार कर नये वर्जन के तैयार किए जाने लगे ताकि चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके। बिहार में विभिन्न लोकसभा एवं विस चुनावों में इस्तेमाल हो चुकी करीब दो लाख से अधिक एम-2 मॉडल की ईवीएम नष्ट कर दी गई हैं। बिहार में इस ईवीएम की आपूर्ति वर्ष 2004-05 से 2011-12 तक की गई थी। 2005 के फरवरी एवं नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव एवं 2020 में हुए विधानसभा चुनाव तक विभिन्न चुनावों में एम-2 मॉडल की ईवीएम का इस्तेमाल किया गया। निर्वाचन विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस ईवीएम को जिलों से सीधे हैदराबाद स्थित भारत सरकार की ईवीएम निर्माण कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) को वापस भेज दिया गया और वहां उसे नष्ट किया गया। अभी एम-2 मॉडल की करीब दो हजार ईवीएम बिहार में बची हैं।
एम-1 से एम-3 तक का सफर
ईवीएम के उपयोग पर साल 1998 में एक आम सहमति बनी थी। इसका उपयोग मध्यप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के 16 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया था। 1999 में 46 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों तक इसका उपयोग बढ़ाया गया और फरवरी 2000 में हरियाणा चुनावों में 45 विस सीटों पर मशीनों का उपयोग किया गया। इसके बाद सभी विस चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल किया गया। 2013 से निर्मित नवीनतम ईवीएम ‘एम- 3’ का उपयोग चुनावों में किया जा रहा है। वहीं, बिहार में आगामी पंचायत आम चुनाव में मल्टी पोस्ट ईवीएम के इस्तेमाल की तैयारी है।







