बिहार में सम्राट चौधरी कैबिनेट के विस्तार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के साथ होने वाली हाई-प्रोफाइल मीटिंग में नए मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर लगेगी. एक तरफ जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली में रणनीति बना रहे हैं. वहीं नीतीश कुमार अपने भरोसेमंद साथियों के साथ सरकार के भविष्य और स्वरूप पर मंथन कर रहे हैं. जानिए सम्राट कैबिनेट का नया फॉर्मूला क्या होगा, किन चेहरों को मिलेगी जगह और नीतीश के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर जदयू ने क्या खास रणनीति तैयार की है.
नीतीश कुमार का पता और पद भले ही बदल गया है. पर बिहार की राजनीति में उनका कद अभी भी बरकरार है. 20 वर्षों से सत्ता की धुरी रहे पूर्व मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द ही बिहार की राजनीति घूम रही है. शनिवार को भी इसकी बानगी दिखी. जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का दिल्ली दौरा तय हुआ और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने करीबियों में पूर्व मंत्री अशोक चौधरी, डिप्टी सीएम बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी से मुलाकात की. कयास लगाए जा रहे हैं कि सम्राट कैबिनेट में किसकी एंट्री होगी या बिहार का मंत्रिमंडल कैसा रहेगा? इस पर चर्चा होगी. सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में भाजपा अब बड़े भाई की भूमिका में नजर आ रही. मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए अपनी ताकत और भविष्य की रणनीति का अहसास कराने को तैयार है. वहीं नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहते हुए भी मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं. आइए जानते हैं इस मुलाकात के मायने.
नीतीश का संदेश लेकर दिल्ली गए सम्राट चौधरी?
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली जाने से पहले नीतीश कुमार से बात कर सम्राट चौधरी उनका कोई खास संदेश भी अपने साथ दिल्ली ले गए हैं। माना जा रहा है कि अमित शाह के साथ सीएम सम्राट की बातचीत के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार के लिए मंत्रियों की सूची पर विचार-विमर्श और उसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।
सम्राट चौधरी के रविवार शाम पटना लौटने की संभावना
इसके अलावा, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत में राज्य में राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मामलों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में अपनी बैठकें समाप्त करने के बाद मुख्यमंत्री के रविवार को पटना लौटने की उम्मीद है।
पटना के 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर नीतीश से मिले थे सम्राट चौधरी
इससे पहले सम्राट चौधरी ने पटना के 7 सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर उनसे मुलाकात की थी। इसे लेकर मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बातचीत को सौहार्दपूर्ण बताया और कहा कि उन्हें नीतीश कुमार के अनुभव और मार्गदर्शन से प्रेरणा मिली।
कैबिनेट का नया फॉर्मूला 15-15 या 16-16?
बिहार में पहली बार भाजपा और जदयू के बीच सत्ता का संतुलन बदलता दिख रहा है. चर्चा है कि इस बार भाजपा और जदयू के बीच 15-15 या 16-16 मंत्रियों का फॉर्मूला लागू हो सकता है. या फिर भाजपा कोटे से मुख्यमंत्री समेत 16 और जदयू कोटे से डिप्टी सीएम समेत 16 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इसके अलावा सहयोगी दलों में चिराग पासवान की एलजेपी (आर), जीतन राम मांझी की हम (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम को मिलाकर 4 मंत्री बनाए जाने की संभावना है.
बदलाव के संकेत या पुराने चेहरों पर भरोसा?
अंदर खाने की मानें तो भाजपा इस बार अपने कोटे से चौंकाने वाले नाम सामने ला सकती है. पार्टी का फोकस जातीय संतुलन, अनुभव और युवा नेतृत्व पर है. चर्चा में मंगल पांडेय, विजय सिन्हा और रामकृपाल यादव के साथ-साथ श्रेयसी सिंह और संगीता कुमारी जैसे महिला चेहरों के नाम भी प्रमुखता से लिए जा रहे हैं.
बात करें जदयू खेमे की तो नीतीश कुमार अपने पुराने भरोसेमंद चेहरों जैसे श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह और जमा खान को दोहरा सकते हैं. विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव पहले ही सरकार का हिस्सा बन चुके हैं.
नीतीश की सक्रियता और निशांत की पॉलिटिकल एंट्री
एक तरफ सम्राट चौधरी दिल्ली में सरकार का ढांचा तैयार कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ शनिवार सुबह नीतीश कुमार की सक्रियता ने सबका ध्यान खींचा. मुख्यमंत्री आवास (1 अणे मार्ग) खाली कर 7 सर्कुलर रोड शिफ्ट होने के बाद नीतीश कुमार ने जेडीयू के दिग्गज नेताओं अशोक चौधरी, बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी से मुलाकात की. इन मुलाकातों के पीछे सबसे बड़ा राजनीतिक एंगल नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सक्रियता को माना जा रहा है. परिवारवाद के विरोधी रहे नीतीश कुमार अब अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करने के लिए मशक्कत करते दिख रहे हैं. निशांत कुमार 3 मई से चंपारण से अपनी बिहार यात्रा शुरू कर रहे हैं. जदयू ने इस यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह यात्रा भविष्य में पार्टी की बागडोर निशांत को सौंपने की तैयारी का हिस्सा है.
बता दें कि नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद सम्राट चौधरी ने बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ ही विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
अभी सीएम और दोनों डिप्टी सीएम ही संभाल रहे हैं बिहार सरकार के सभी विभाग
वर्तमान में मंत्रिमंडल विस्तार न होने के कारण, मुख्यमंत्री 29 विभागों का कार्यभार संभाल रहे हैं, जबकि विजय कुमार चौधरी 10 विभागों और बिजेंद्र प्रसाद यादव 8 विभागों का प्रबंधन कर रहे हैं। इस मंत्रिमंडल विस्तार से प्रशासनिक बोझ कम होने की संभावना है और इससे अधिक नेताओं को शासन में शामिल होने का अवसर मिलेगा।







