मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में कानून व्यवस्था सुधारने, भ्रष्टाचार मिटाने और विकास को गति देने का संकल्प लिया है. एनडीए सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को प्राथमिकता दे रही है. सम्राट सरकार का फोकस अपराध मुक्त बिहार बनाने पर है, जिसमें जाति या पृष्ठभूमि से परे सभी अपराधियों पर समान कार्रवाई हो. सरकार के समर्थकों का तर्क है कि राजद के शासन को इन्हीं अपराधियों के कारण जंगल राज कहा जाता है. राजद राज में अपराधियों को संरक्षण मिलता था. अब एनकाउंटर उसी विरासत के बचे-खुचे तत्वों के खिलाफ हैं. सम्राट चौधरी ने राजद पर आरोप लगाया है कि वे अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. सम्राट का संकल्प बिहार को सुशासन की राह पर ले जाना है, जहां विकास, रोजगार और सुरक्षा का काम साथ-साथ चले. सम्राट के अनुसार एनकाउंटर राजनीतिक नहीं, बल्कि अपराध नियंत्रण का हिस्सा है.
राष्ट्रीय जनता दल लंबे समय से अपराध और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा है. 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के शासन को जंगल राज कहा जाता है. ऐसा इसलिए कहा जाता है कि अपहरण, लूट, हत्या और रंगदारी उस वक्त आम थी. लालू के साले साधु यादव और सुभाष यादव जैसे नाम इस दौर के प्रतीक बन गए. सुभाष यादव ने कुछ दिन पहले ही खुलासा किया था कि अपहरण के मामलों में सीएम हाउस से ही फिरौती की डील होती थी. साधु यादव पर शिल्पी-गौतम हत्याकांड समेत कई आपराधिक मामलों के आरोप लगे. राजद पर आरोप है कि उसने अपराधियों को टिकट दिए और संरक्षण दिया, जिससे पार्टी की छवि खराब हुई. आज भी राजद पर यह आरोप लगता है कि वह यादव-मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए अपराधियों को बचाता है. तेजस्वी का हालिया बयान भी इसी धारणा को मजबूत करता दिखता है, जहां वे एनकाउंटर को एक जाति विशेष से जोड़ रहे हैं. राजद की बदनामी की जड़ें काफी गहरी हैं. उसके शासन काल की घटनाओं में चारा घोटाला, अलकतरा घोटाला जैसे भ्रष्टाचार का उल्लेख होता है.
जिन्होंने 1990-2000 के दशक का दौर देखा है, उन्हें पता है कि पूर्व सीएम राबड़ी देवी के भाई द्वय- साधु यादव और सुभाष यादव बिहार की राजनीति और अपराध जगत में चर्चित नाम थे. इन्हें लालू का S-1 (सुभाष-1) और S-2 (सुभाष-2) कहा जाता था. आरोपों के अनुसार इनके इशारे पर ठेकेदारियां, ट्रांसफर-पोस्टिंग और अपहरण जैसे काम होते थे. साधु यादव पर हत्या, जबरन वसूली और अन्य गंभीर आरोप लगे. उनकी गतिविधियों को आतंक माना जाता था. सुभाष यादव ने हाल के इंटरव्यू में खुद अपहरण इंडस्ट्री का जिक्र किया. हालांकि वे खुद को बचाने की कोशिश करते दिखे. ये दोनों भाई राजद की छवि को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले चेहरे रहे. उनकी वजह से ही लालू परिवार की सत्ता पर सवाल उठे और आखिरकार उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी. आज भी बिहार के लोग साधु-सुभाष युग को जंगल राज का प्रतीक मानते हैं.
तेजस्वी यादव का हालिया बयान उन्हें फंसाता दिख रहा है. मसलन उनकी आलोचना हो रही है. एक तरफ वे अपराधियों की कोई जाति नहीं का नारा देते हैं तो दूसरी तरफ एनकाउंटर को यादवों से जोड़ कर जाति की राजनीति कर रहे हैं. एनडीए नेताओं ने कहा है कि तेजस्वी अपराधियों की रक्षा कर रहे हैं. हालांकि बिहार में अपराध कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन वर्तमान सरकार इसे नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है. तेजस्वी का बयान सुशासन के मुद्दे से ध्यान हटा कर जाति विभाजन पर ले जाता है. विपक्ष का तर्क है कि अगर अपराधी यादव हैं तो उनकी जाति छिपाने की जरूरत क्यों? अपराध पर सख्ती सभी के लिए होनी चाहिए.







