बिहार विधानपरिषद चुनाव 2026 को लेकर बिहार की सियासत अचानक से गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार एक्शन में आ गए हैं। वो सोमवार की सुबह पार्टी के दो कद्दावर नेताओं के घर बारी-बारी से पहुंचे। माना जा रहा है कि जदयू के MLC उम्मीदवारों की लिस्ट बस फाइनल होने ही वाली है।
यह राजनीतिक मुलाकात इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है. क्योंकि इससे ठीक पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के कद्दावर मंत्री और पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी को भी अचानक मुख्यमंत्री आवास पर मिलने के लिए बुलाया था. विजय चौधरी से लंबी गुफ्तगू के तुरंत बाद अब संजय झा के घर पहुंचना इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के दोनों सबसे भरोसेमंद और ट्रबलशूटर नेताओं के साथ किसी बहुत बड़े एजेंडे पर काम कर रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि नीतीश कुमार जेडीयू के भीतर सांगठनिक स्तर पर कोई बड़ा फेरबदल करने वाले हैं या फिर आगामी रणनीतियों को लेकर कोई गोपनीय खाका खींचा जा रहा है.
नीतीश कुमार का यह कहना कि सब ठीक है अक्सर तब आता है जब राजनीतिक हलकों में चर्चाएं गर्म होती हैं. जेडीयू के भीतर इस समय राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और विजय चौधरी की भूमिकाएं सबसे महत्वपूर्ण हैं. संजय झा जहां दिल्ली और केंद्रीय नेतृत्व (भाजपा) के साथ समन्वय का मुख्य जरिया हैं. वहीं विजय चौधरी बिहार में पार्टी के भीतर और प्रशासनिक मामलों में नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार हैं. इन दोनों शीर्ष नेताओं के साथ बैक-टू-बैक मीटिंग और संजय झा को अगले ही दिन सुबह 10:30 बजे बुलाना यह साफ करता है कि बात सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात तक सीमित नहीं है.
बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति और सरकार के कामकाज को देखते हुए माना जा रहा है कि नीतीश कुमार अगले कुछ दिनों में कोई बड़ा चौंकाने वाला फैसला ले सकते हैं. यह फैसला संगठन को मजबूत करने, आगामी चुनावों की रूपरेखा तैयार करने या फिर मंत्रिमंडल के भीतर किसी बड़े बदलाव से जुड़ा हो सकता है. फिलहाल नीतीश कुमार की इस एक्टिव पॉलिटिक्स ने विपक्षी खेमे के साथ-साथ खुद एनडीए के भीतर भी हलचल तेज कर दी है. हर किसी की नजर अब मुख्यमंत्री आवास पर होने वाली अगली बड़ी बैठक पर टिकी है.







