क्या यह सही है कि आज राबड़ी देवी जिस बंगले के विवाद में उलझी हुई हैं, उसके लिए एक हद तक तेजस्वी यादव भी जिम्मेदार हैं? अगर तेजस्वी 5 देशरत्न मार्ग बंगला रखने के लिए पटना हाईकोर्ट नहीं गये होते तो आज राबड़ी देवी के सामने ये समस्या नहीं आयी होती। तेजस्वी यादव का हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाना कई कारणों से उनके बड़ा झटका साबित हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने 5, देशरत्न मार्ग बंगला खाली करने के आदेश को तो बरकरार रखा ही, उसने अदालत का समय बर्बाद करने के लिए तेजस्वी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। उनके केस की सुनवाई के दौरान ही पटना हाईकोर्ट ने बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला देने के नियम को रद्द कर दिया था। इसकी वजह से लालू यादव और राबड़ी देवी को जो सरकारी आवासीय सुविधा मिल सकती थी, वह नहीं मिल पायी। अगर पहले का नियम लागू रहता तो राबड़ी देवी को शायद 10, सर्कुलर रोड आवास खाली करने का नोटिस नहीं मिला होता।
उपमुख्यमंत्री की हैसियत से मिला था तेजस्वी को आवास
तेजस्वी यादव 2015 में उपमुख्यमंत्री बने थे। इस हैसियत से उन्हें 5, देशरत्न मार्ग बंगला आवंटित हुआ था। जुलाई 2017 में तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री पद से हट गये। उन्हें विधानसभा में नेता विरोधी दल का पद मिला। नयी सरकार बनी तो सुशील कुमार मोदी उपमुख्यमंत्री बने। चूंकि 5, देशरत्न मार्ग उपमुख्यमंत्री के लिए निर्धारित था इसलिए यह सुशील कुमार मोदी को आवंटित हुआ। लेकिन तेजस्वी यादव ने 5, देशरत्न मार्ग खाली करने से इंकार कर दिया। नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से तेजस्वी को 1, पोलो रोड का बंगला आवंटित हुआ था।
पटना HC ने कहा था तेजस्वी को बंगला खाली करना होगा
तेजस्वी यादव 5 देशरत्न मार्ग आवास में ही रहने के लिए अड़े रहे। मामला कोर्ट में गया। पटना हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अक्टूबर 2018 में फैसला
सुनाया कि तेजस्वी यादव को 5 देशरत्न मार्ग आवास खाली करना ही होगा। तेजस्वी चूंकि उपमुख्यमंत्री नहीं रहे, इसलिए वे अब इस बंगले में नहीं रह सकते। तेजस्वी ने सिंगल बेंच के इस फैसले को डबल बेंच के समक्ष चुनौती दी। डबल बेंच ने भी सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा। तब तेजस्वी पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गये।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था तेजस्वी पर 50 हजार का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने तेजस्वी यादव की याचिका को खारिज तक दी। तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने तेजस्वी यादव से पूछा, क्या आप अपनी सहूलियत के लिए यह याचिका दाखिल कर रहे हैं? इससे न्यायपालिका का कीमती समय बर्बाद हुआ है। अदालत का समय बर्बाद करने पर सुप्रीम कोर्ट ने तेजस्वी यादव पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया था।
तेजस्वी के केस ने पूर्व सीएम के आजीवन आवास को छीना
पटना हाईकोर्ट की डबल बेंच जब तजेस्वी यादव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, तब उसने 7 जनवरी 2019 को स्वत: संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार के उस नियम पर सवाल पूछा था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला क्यों आवंटित किया जाना चाहिए। इसके बाद 19 फरवरी 2019 में पटना हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों आजीवन सरकारी बंगला देने के नियम को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने अपने फैसले में इस नियम को असंवैधानिक और जनता के धन का दुरुपयोग करार दिया था। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला देने की व्यवस्था खत्म हो गयी। इस फैसले का असर लालू यादव और राबड़ी देवी पर भी पड़ा। राबड़ी देवी को 10, सर्कुलर रोड आवास पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से मिला था। यह व्यवस्था खत्म हो गयी तो राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से 39, हार्डिंग रोड का आवास आवंटित हुआ। कानून के जानकारों का कहना है कि अब राबड़ी देवी के लिए नेता प्रतिपक्ष के लिए आवंटित आवास में रहना ही नियमानुकूल होगा।
सरकारी बंगला आवंटित करने की शक्ति सरकार के पास
तेजस्वी यादव की याचिका की सुनवाई के समय पटना हाईकोर्ट ने कहा था, सरकारी आवासों के आवंटन को कई नियम नियंत्रित करते हैं। इनमें बिहार के मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते अधिनियम 2006, बिहार विधानसभा सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम 2006 प्रमुख हैं। इन कानूनों में स्पष्ट किया गया है कि मंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष को सरकारी आवास का अधिकार है लेकिन ये कानून किसी को भी किसी विशेष बंगले की मांग का अधिकार नहीं देता। ऐसे परिसरों को आवंटित करने और पुन: आवंटित करने की शक्ति राज्य सरकार में निहित है।
क्या राबड़ी देवी के बंगले का विवाद भी कोर्ट में जाएगा?
तेजस्वी के मामले में कोर्ट की टिप्पणी थी, इस पूरे विवाद से पता चलता है कि राजनीतिक नेता कभी-कभी सरकारी आवासों के निजी संपत्ति की तरह मानने लगते हैं। 2026 में सत्ता पक्ष के नेता यही आरोप अब राबड़ी देवी पर लगा रहे हैं। अगर राबड़ी देवी के सरकारी बंगले पर विवाद बढ़ा तो इसका निराकरण कैसे होगा? प्रशासनिक हस्तक्षेप से या फिर कोर्ट के फैसले से?







