बता दें कि बीजेपी ने पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं, जदयू कोटे से पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे व स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, शिवरानी प्रजापति, भारती मेहता और ललन प्रसाद के नामों का ऐलान हुआ है. दूसरी ओर महागठबंधन ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिसके कारण सियासी कयासों का बाजार गर्म है.
कुशवाहा के बेटे दीपक का मंत्री पद से हटना तय!
RLM नेता और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने पर खतरा मंडराने लगा है। दरअसल बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले MLC चुनाव के लिए NDA ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है।
जेडीयू और बीजेपी ने शुक्रवार को 4-4 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। एक सीट पर चिराग पासवान की पार्टी LJP (R) ने अशरफ अंसारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, दीपक प्रकाश का नाम NDA की लिस्ट में नहीं है।
इस फैसले ने पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय की दावेदारी को बड़ा झटका दिया है। NDA कैंडिडेट की लिस्ट आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
दीपक प्रकाश का नाम लिस्ट में नहीं होने पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, ये सवाल बीजेपी के बड़े नेताओं से पूछिए। वो उनके साथ गठबंधन में हैं। RLM से पूछिए वो बताएंगे क्या मामला है।
मंत्री बने रहने के लिए विधान मंडल का सदस्य होना जरूरी
दीपक, बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को मंत्री बनने के 6 महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है।
ऐसा नहीं होने पर उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है। ऐसे में MLC चुनाव को दीपक प्रकाश के लिए सदन की सदस्यता हासिल करने का सबसे अहम मौका माना जा रहा था, लेकिन NDA की लिस्ट में नाम नहीं आने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
दीपक प्रकाश को टिकट नहीं मिलने के बाद उनके मंत्री पद को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे आगे भी मंत्री बने रहेंगे या फिर मंत्रिमंडल में उनकी जगह पर संकट खड़ा हो सकता है।

NDA ने घोषित किए अपने सभी उम्मीदवार
भाजपा और जदयू ने अपने-अपने कोटे की चार-चार सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह, डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है।
वहीं, जदयू ने निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद को मैदान में उतारा है। इन नामों की घोषणा के साथ ही स्पष्ट हो गया कि दीपक प्रकाश को MLC चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलेगा।
सीटों के गणित में फंसा दीपक प्रकाश का दावा
बिहार विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के अनुसार, एक एमएलसी सीट जीतने के लिए करीब 25 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। एनडीए के पास 8 उम्मीदवारों को आसानी से जिताने लायक संख्या बल है।
भाजपा और जदयू ने चार-चार उम्मीदवार उतारकर सभी सीटों पर अपना दावा मजबूत कर लिया है। गठबंधन के भीतर बची हुई सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का दावा मजबूत माना जा रहा है।
ऐसे में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के हिस्से कोई सीट नहीं आ सकी, जिससे दीपक प्रकाश का दावा कमजोर पड़ गया।
18 जून के मतदान से पहले बढ़ी सियासी हलचल
दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे हैं। लंबे समय से उनके एमएलसी उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
एमएलसी चुनाव के लिए 18 जून को मतदान होना है। उससे पहले दीपक प्रकाश को टिकट नहीं मिलने और उनके मंत्री पद पर मंडरा रहे संकट ने बिहार की राजनीति को नया सवाल खड़ा कर दिया है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या फैसला होता है और क्या वे मंत्री पद बचाने का कोई नया रास्ता निकाल पाते हैं।







