जुलाई के पहले सप्ताह में संभावित मोदी कैबिनेट फेरबदल को लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारे में सरगर्मी तेज है। कौन बनेगा, कौन हटेगा, इसकी कयासबाजी जोरों पर है। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर है, जिनके मोदी कैबिनेट में शामिल होने की बातें कही जा रही हैं।
नीतीश कुमार क्या कैबिनेट में शामिल होंगे, बिहार के किस नेता की कुर्सी खतरे में है और क्यों,
नीतीश कुमारः मोदी-शाह की चाहत, अंतिम फैसला नीतीश करेंगे
14 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने वाले नीतीश कुमार का नाम नरेंद्र मोदी कैबिनेट में शामिल होने वालों में प्रमुखता से चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी और अमित शाह दोनों नीतीश कुमार को कैबिनेट में शामिल करने की इच्छा रखते हैं।
बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार को भाजपा की टॉप लीडरशिप की राय बता दी गई है। हालांकि, अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही करना है। नीतीश कुमार को लेकर मंत्री बनने और नहीं बनने, दोनों तरह की चर्चा है। जानिए…
नीतीश को मंत्री बनाने के पीछे 3 कारण
- नीतीश कुमार के पास रेलवे, कृषि और भूतल परिवहन जैसे महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रालयों को संभालने का लंबा प्रशासनिक अनुभव है। केंद्र में उनकी मौजूदगी से मोदी सरकार को नीतिगत फैसलों में मजबूती मिलेगी।
- JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते दिल्ली में उनकी उपस्थिति से BJP और JDU के बीच राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर तालमेल बनेगा। मोदी-शाह की जोड़ी उनके कद का उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर करना चाहती है।
- बिहार में मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद नीतीश कुमार को केंद्र में बड़ा और सम्मानजनक पोर्टफोलियो देना NDA गठबंधन के भीतर उनके सम्मान और संतुलन को बनाए रखने के लिए जरूरी है।
हालांकि, उनके मंत्री नहीं बनने की चर्चा करने वालों के 2 तर्क
- मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता से वादा किया था कि वे बिहार के बीच रहकर जमीनी स्तर पर काम करेंगे। केंद्रीय मंत्री बनने से उनका ध्यान पूरे देश पर केंद्रित हो जाएगा, जिससे बिहार में संगठन पर पकड़ कमजोर हो सकती है।
- बढ़ती उम्र के कारण वे दिल्ली की व्यस्त और भागदौड़ भरी राजनीति के बजाय बिहार में रहकर मार्गदर्शक की भूमिका निभाना ज्यादा पसंद कर सकते हैं।
गिरिराज सिंहः बढ़ती उम्र के कारण हो सकती है छुट्टी
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह को लेकर चर्चा है कि उनको मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है। उनकी जगह पर भूमिहार कोटे से नवादा सांसद विवेक ठाकुर को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है।
हालांकि, गिरिराज सिंह को लेकर दोनों तरह की चर्चा है। उनको लेकर हर बार चर्चा होती है, लेकिन वह पद पर बने रहते हैं।
गिरिराज सिंह की क्यों हो सकती है छुट्टी, 2 तर्क
- गिरिराज सिंह 73 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व धीरे-धीरे 70-75 वर्ष से अधिक उम्र के नेताओं को संगठन या मार्गदर्शक मंडल में भेजकर युवाओं को मौका दे रहा है।
- उनके कुछ मंत्रालयों में प्रदर्शन (नॉन-परफॉर्मेंस) को लेकर केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह संतुष्ट नहीं है, जिसके कारण चेहरे को बदलने की मांग उठ रही है।
गिरिराज सिंह क्यों मंत्री बने रह सकते हैं
- गिरिराज सिंह बिहार और देश में बीजेपी के कट्टर और मुखर हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं। चुनावी ध्रुवीकरण और कोर वोटर को जोड़े रखने के लिए नेतृत्व उन्हें कैबिनेट से हटाने का जोखिम नहीं लेना चाहेगा।
- बेगूसराय और आसपास के क्षेत्रों में भूमिहार समाज के बीच उनका मजबूत जनाधार है। मोदी की धारा के नेता हैं।
गिरिराज की जगह विवेक ठाकुर क्यों
- युवा और साफ-सुथरी छवि: पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. ठाकुर के पुत्र विवेक ठाकुर की छवि एक पढ़े-लिखे, गंभीर और विवादों से दूर रहने वाले युवा नेता की है।
- जातीय और क्षेत्रीय संतुलन: गिरिराज सिंह की जगह भूमिहार कोटे से उन्हें लाकर बीजेपी एक तीर से दो निशाने साध सकती है। इससे बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के भूमिहार वोट बैंक पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ेगा।
हालांकि, केंद्रीय स्तर पर बड़े मंत्रालय को संभालने का उनके पास पहले का कोई प्रशासनिक या कैबिनेट अनुभव नहीं है, जो उनके आड़े आ सकता है।
सतीश चंद्र दुबेः नितिन नवीन की टीम में हो सकते हैं शामिल
केंद्रीय कोयला और खान राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे को लेकर चर्चा है कि उनको मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है। उनकी जगह पर ब्राह्मण कोटे से राज्यसभा सांसद मनन मिश्रा को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
बिहार में बीजेपी को आगामी संगठनात्मक चुनौतियों के लिए जमीन पर मजबूत और सक्रिय चेहरों की जरूरत है। दुबे को संगठन में कोई बड़ी और अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। बताया जा रहा है कि नितिन नवीन की नई टीम में उन्हें स्थान मिल सकता है।
चंपारण और ब्राह्मण समाज के भीतर सतीश चंद्र दुबे की पकड़ मजबूत मानी जाती है। वे जमीन से जुड़े नेता हैं और पार्टी के वफादार रहे हैं।
दुबे की जगह मनन मिश्रा की चर्चा क्यों
- राज्यसभा सदस्य मनन मिश्रा ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) के चेयरमैन हैं। उनकी कानूनी और बौद्धिक क्षमता का लाभ मोदी कैबिनेट को विधि, न्याय या अन्य नीतिगत मंत्रालयों में मिल सकता है।
- चंपारण और शाहाबाद क्षेत्र के ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए मनन मिश्रा एक नया और प्रभावशाली विकल्प साबित हो सकते हैं।
हालांकि, वे मुख्य रूप से कानूनी और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े रहे हैं, इसलिए विशुद्ध चुनावी राजनीति और मास-लीडरशिप के पैमाने पर नेतृत्व अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।
जनार्दन सिंह सिग्रीवालः चर्चा ज्यादा, लेकिन राह में रोड़े भी
महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के मोदी कैबिनेट में शामिल होने की चर्चा है। बिहार कोटे से मोदी कैबिनेट में राजपूत समाज से अभी कोई मंत्री नहीं है।
सिग्रीवाल क्यों मंत्री बन सकते हैं
- बिहार बीजेपी में इस समय मोदी कैबिनेट के भीतर राजपूत समाज के एक कद्दावर और बड़े चेहरे की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सिग्रीवाल इस कमी को पूरा कर सकते हैं।
- सिग्रीवाल बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं और लोकसभा में भी सांसद के तौर पर लंबा अनुभव रखते हैं। उनकी बेदाग छवि और सांगठनिक अनुभव उनके पक्ष में जाता है।
हालांकि, उनके मंत्री बनने की राह में उनका अपना समाज ही रोड़ा है। फिलहाल राजपूत कोटे से बिहार में बीजेपी के पास कई अन्य सीनियर और बड़े नाम जैसे-राधामोहन सिंह, राजीव प्रताप रूड़ी भी रेस में शामिल हैं, जिससे अंदरुनी दांव-पेच इनका काम बिगाड़ सकता है।







