इंडियन एक्सप्रेस में एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है. नितिन नवीन को जेपी नड्डा के बाद भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. इसके बाद वे राज्यसभा के लिए चुने गए, जिसके कारण उन्होंने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. बांकीपुर सीट पर 1995 से भाजपा का ही कब्जा रहा है. पहले यहां से नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा विधायक थे और बाद में नितिन नवीन खुद यहां से लगातार जीतते रहे.
जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के अनुसार, जन सुराज 5 जुलाई को अपनी कोर कमेटी की बैठक के बाद उम्मीदवार का आधिकारिक एलान करेगी. भारती का कहना है कि बांकीपुर के लोग भाजपा के कुशासन से परेशान हैं और वे चाहते हैं कि प्रशांत किशोर खुद यहां से चुनाव लड़ें. पार्टी के कार्यकर्ता भी यही मांग कर रहे हैं.
बांकीपुर सीट पटना के शहरी इलाके में आती है. यहां कायस्थ और व्यापारी वर्ग के मतदाता भाजपा के सबसे मजबूत समर्थक माने जाते हैं. नीतीश कुमार के हटने के बाद, अप्रैल में सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बने हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी के लिए यह पहली बड़ी चुनावी परीक्षा होगी. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की खाली की हुई सीट पर हारना या जीत का अंतर कम होना भाजपा और नए मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका हो सकता है. फिलहाल भाजपा की तरफ से नितिन नवीन के करीबी कार्यकर्ता नील रंजन घोष का नाम रेस में सबसे आगे है.
2025 के विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी ने 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था. लेकिन पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी और उसे सिर्फ 3.4% वोट मिले. ऐसे में इस उपचुनाव को प्रशांत किशोर अपनी राजनीतिक वापसी के मौके के रूप में देख रहे हैं. अगर प्रशांत किशोर यहां से जीतते हैं या भाजपा को कड़ी टक्कर देते हैं, तो जन सुराज बिहार की राजनीति में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगी. लेकिन अगर वे यहां असफल रहते हैं, तो पार्टी के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो सकते हैं. प्रशांत किशोर ने अब तक ग्रामीण इलाकों में पदयात्रा करके अपना नेटवर्क बनाया है, इसलिए पटना के पढ़े-लिखे शहरी वोटरों को रिझाना उनके लिए एक कठिन परीक्षा होगी. वहीं दूसरी ओर मुख्य विपक्षी पार्टी राजद भी शहरी वोटों के बिखराव का फायदा उठाने की ताक में है. हालांकि उसने भी अभी तक पत्ते नहीं खोले हैं.







