बांकीपुर उपचुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प……………

बिहार की राजधानी पटना की प्रतिष्ठित सीट बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राजनीतिक मुकाबला बेहद रोमांचक और दिलचस्प मोड़ पर आ गया है. भाजपा के पूर्व विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई इस सीट पर पारंपरिक तौर पर त्रिकोणीय लड़ाई साफ दिख रही है. इसके लिए चुनावी मैदान में मुख्य रूप से भाजपा […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 19 जुलाई 2026, 07:46 AM 7 मिनट read
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बांकीपुर उपचुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प……………
Photo: UB India News Archive
बिहार की राजधानी पटना की प्रतिष्ठित सीट बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राजनीतिक मुकाबला बेहद रोमांचक और दिलचस्प मोड़ पर आ गया है. भाजपा के पूर्व विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई इस सीट पर पारंपरिक तौर पर त्रिकोणीय लड़ाई साफ दिख रही है. इसके लिए चुनावी मैदान में मुख्य रूप से भाजपा (BJP) से नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज पार्टी (JSP) से खुद प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से रेखा गुप्ता के बीच सीधी और कांटे की टक्कर है. बांकीपुर के दशकों पुराने सामाजिक समीकरण और भाजपा के परंपरागत गढ़ के इतिहास को देखते हुए, राजनीति के जानकारों का मानना है कि यहां पहले स्थान से ज्यादा रोचक लड़ाई अब दूसरे नंबर के लिए छिड़ गई है.
बता दें कि बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले तीन दशक से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है. यह सीट शहरी मतदाताओं वाली है और यहां भाजपा का संगठन तथा परंपरागत वोट बैंक दोनों मजबूत माने जाते हैं. यही वजह है कि उपचुनाव में भी भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को शुरुआती बढ़त वाला उम्मीदवार माना जा रहा है. दूसरी ओर चुनाव प्रचार में भले ही जन सुराज के प्रशांत किशोर का शोर और सोशल मीडिया बज बहुत अधिक दिख रहा हो, लेकिन जमीन पर राजद का पारंपरिक ‘माय’ यानी मुस्लिम-यादव समीकरण और वैश्य कार्ड प्रशांत किशोर की राह में सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है.

दूसरे नंबर की लड़ाई क्यों बनी दिलचस्प?

वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने के बाद चुनाव का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है. लेकिन, जमीनी समीकरणों को देखें तो मुकाबला सिर्फ प्रचार या फिर सोशल मीडिया कैंपेन से तय नहीं होगा. दूसरी ओर बांकीपुर में जन सुराज का संगठन अभी भाजपा और राजद की तुलना में नया है. इसके बरअक्श राजद वर्षों से यहां अपना एक स्थायी सामाजिक आधार बनाए हुए है. इसलिए सबकी नजर इस बात पर है कि विपक्ष में सबसे मजबूत दावेदार कौन बनकर उभरता है.
दरअसल, प्रशांत किशोर की सभाओं में भीड़ और सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता चर्चा का विषय अवश्य है, लेकिन चुनावी राजनीति में भीड़ हमेशा वोट में बदल जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं होती. उन्हें उन मतदाताओं तक पहुंच बनानी होगी जो पारंपरिक दलों से हटकर मतदान करने को तैयार हों. इसके साथ ही उन्हें राजद के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगानी होगी, जो आसान चुनौती नहीं मानी जा रही है. भाजपा को अपने परंपरागत समर्थकों पर भरोसा है, जबकि राजद अपने कोर वोट बैंक पर निर्भर है. दूसरी ओर जन सुराज की उम्मीद नए और असंतुष्ट मतदाताओं के समर्थन पर टिकी है.

बांकीपुर का कुल मतदाता आधार और सामाजिक ताना-बाना

बता दें कि आगामी 30 जुलाई को होने वाले बांकीपुर उपचुनाव में लगभग 3.79 लाख मतदाता कुल 422 बूथों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. वहीं, सामाजिक ताने-बाने की बात करें, तो यह विधानसभा क्षेत्र कायस्थ और शहरी सवर्ण मतदाताओं के भारी वर्चस्व वाला क्षेत्र माना जाता है. राजनीतिक अनुमानों के अनुसार, अकेले कायस्थ समुदाय के ही करीब 1.50 लाख (लगभग 14 प्रतिशत) मतदाता इस सीट पर निर्णायक भूमिका में हैं. इसके अतिरिक्त, यहां वैश्य समाज (साहू, रौनियार, मारवाड़ी), मुस्लिम, यादव और दलित वोटर्स की भी खासी आबादी है. सवर्ण और वैश्य वोटरों का एकमुश्त झुकाव भाजपा के पक्ष में रहने के कारण विपक्षी दलों के लिए नंबर एक की लड़ाई बेहद कठिन होती है. यही कारण है कि ऐतिहासिक रूप से, यह सीट हमेशा से भाजपा की सबसे सुरक्षित सीटों में शुमार रही है. लेकिन, इस बार पीके के मैदान में उतरने से मामला थोड़ा हाई प्रोफाइल हो गया है ऐसे में इस बार सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जमीनी तौर पर दूसरे पायदान पर कौन सा दल कब्जा जमाता है.
अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि दरअसल, प्रशांत किशोर की रणनीति पारंपरिक दलों से असंतुष्ट मतदाताओं, खासकर युवाओं और सवर्णों के एक हिस्से को साधने की है. वहीं दूसरी ओर, राजद की रेखा गुप्ता अपने पार्टी कैडर और जमीनी नेटवर्क के भरोसे मैदान में हैं. ऐसे में यह मुकाबला ‘प्रचार बनाम जनाधार’ का रूप ले चुका है. प्रशांत किशोर जहां आधुनिक चुनावी प्रबंधन, छोटी-छोटी जनसभाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी हवा बनाने में लगे हैं, वहीं राजद की रेखा गुप्ता चुपचाप घर-घर जाकर अपने वोट बैंक को एकजुट करने में जुटी हैं. अशोक कुमार शर्मा वर्तमान सामाजिक और सियासी समीकरण पर दो टूक कहते हैं कि यदि भाजपा का कोर वोटर उसके पाले में खड़ा रहता है, तो प्रशांत किशोर को नंबर दो पर आने के लिए राजद के इसी किले को ढहाना होगा, लेकिन यह आसान तो बिल्कुल ही नजर नहीं आता.

आरजेडी का ‘माई’ जनाधार रहा इंटैक्ट तो पीके के लिए राह मुश्किल

बांकीपुर में भी अल्पसंख्यकों और यादवों का एक बड़ा वोट बैंक है, जो अमूमन हर कठिन चुनाव में भी राजद के साथ ही मजबूती से खड़ा रहा है. ऐसे में इस बार भी अगर मुस्लिम और यादव मतदाताओं के बिखराव न होने की स्थिति में रेखा गुप्ता को एक ठोस बुनियादी वोट शेयर मिलना तय है, जबकि पीके को शून्य से शुरुआत कर नए वोटर्स को जोड़ना पड़ रहा है. जबकि, पीके की पार्टी ‘जन सुराज’ अभी नई है और उसके पास राजद जैसा पुराना कैडर और समर्पित वोट बैंक नहीं है.

राजद का ‘वैश्य कार्ड’ बिगाड़ सकता है जन सुराज का खेल

दूसरी ओर, राजद ने इस बार बेहद सधे हुए रणनीतिक कदम के तहत रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है, जो वैश्य (साहू) समुदाय से आती हैं. बांकीपुर में वैश्य मतदाताओं की संख्या भी अच्छी-खासी है और आमतौर पर इन्हें भाजपा का समर्थक माना जाता है. लेकिन, रेखा गुप्ता के उम्मीदवार होने से इस वर्ग के मतदाताओं के मन में अपनी जाति की प्रत्याशी के प्रति सहानुभूति और झुकाव दिखने की बातें सामने आ रही हैं. यदि रेखा गुप्ता भाजपा के वैश्य वोट बैंक में थोड़ी भी सेंध लगाने में कामयाब हो जाती हैं और उनका अपना पारंपरिक ‘माई’ वोट बैंक साथ दे देता है, तो वह दूसरे नंबर की स्थिति को बेहद मजबूत कर लेंगी.

क्या कहते हैं मौजूदा राजनीतिक संकेत?

बहरहाल, बांकीपुर उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशांत किशोर की जमीनी परीक्षा तो राजद के जनाधार को एक बार फिर टेस्ट करने का मौका भी बन गया है. ऐसी परिस्थिति में अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में भाजपा अब भी सबसे मजबूत दावेदार दिखाई देती है. वहीं, विपक्षी खेमे में यह मुकाबला दिलचस्प हो गया है कि दूसरे स्थान पर कौन रहेगा. यदि राजद का पारंपरिक मुस्लिम-यादव वोट बैंक और अन्य समर्थक वर्ग एकजुट रहता है तो प्रशांत किशोर के लिए दूसरे स्थान तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. हालांकि अंतिम तस्वीर मतदान के दिन मतदाताओं के रुझान और मतदान प्रतिशत पर निर्भर करेगी.
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